यूपी चुनाव: अखिलेश का मास्टर स्ट्रोक, सरकार बनी तो बहाल करेंगे पुरानी पेंशन

नूपेन्द्र सिंह

समाजवादी पार्टी मुखिया अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश चुनाव में सबसे बड़ा राजनीतिक दांव खेल दिया है। लाखों राज्य कर्मचारियों की मांग को देखते हुए समाजवादी सरकार बनते ही पुरानी पेंशन बहाल करने की घोषणा कर दी। इस घोषणा के बाद प्रदेश भर के दर्जनों कर्मचारी संगठनों ने अखिलेश यादव के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद दिया।

अखिलेश यादव ने यूपी चुनाव से पहले एक और बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी की सरकार बनेगी तो पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल करेंगे। यह समाजवादी पार्टी के घोषणा पत्र में शामिल किया जाएगा। 2005 से पूर्व कर्मचारियों को मिलने वाली पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू की जाएगी। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी पुरानी पेंशन लागू करने के लिए 14 लाख सरकारी कर्मचारियों के लिए सरकारी खजाना खोलेगी।

अखिलेश यादव के साथ प्रेस वार्ता में मौजूद अटेवा के अध्यक्ष विजय कुमार ‘बन्धु’ ने कहा कि पुरानी पेंशन बहाली के लिए हमने सभी के दरवाजे खटखटाए लेकिन हमारी बात को कहीं सुना नहीं गया। आज समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के द्वारा सरकारी कर्मचारियों की पुरानी पेंशन बहाली के लिए न केवल घोषणा पत्र में रखने का वादा किया बल्कि, प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार बनते ही पुरानी पेंशन बहाल करने का भरोसा दिया गया। जिसका अटेवा स्वागत करता है और आने वाले विधानसभा चुनाव में पुरानी पेंशन बहाली प्रमुख चुनावी मुद्दा बनेगा।

इसके साथ ही चिकित्सा स्वास्थ्य महासंघ के प्रधान महासचिव अशोक कुमार, लुआकटा के अध्यक्ष डॉ मनोज पाण्डेय, लखनऊ विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ. विनीत वर्मा, पी. डब्लू. डी. नियमित वर्कचार्ज कर्मचारी संघ व कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष भारत यादव, उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ के प्रदेश अध्यक्ष राम मूरत यादव, आउटसोर्सिंग संविदा कर्मचारी संघ के महामंत्री सचिदानंद मिश्रा, बाल विकास एवं पुष्टाहार के अध्यक्ष अजीत यादव, लेखपाल संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष भूपेन्द्र सिंह, स्वास्थ्य विभाग कर्मचारी संघ के अध्यक्ष संजय रावत, उत्तर प्रदेश सचिवालय के सहायक समीक्षा अधिकारी व कंप्यूटर ऑपरेटर संघ के अध्यक्ष संजय यादव और डिप्लोमा फार्मशिष्ट के श्रवण सचान ने भी अखिलेश यादव के इस निर्णय पर आभार प्रकट करते हुए कहा कि पुरानी पेंशन की बहाली कर्मचारियों का स्वाभिमान है, वर्तमान सरकार ने शिक्षकों, कर्मचारियों के हितों पर कुठाराघात किया है। सपा मुखिया ने उनका स्वाभिमान लौटाने की बात की है कर्मचारी समाज इसकी महत्व को समझते हुए समजवादी के हित में वोट का निर्णय लेगा और इस बार बदलाव होगा।

सफाई कर्मचारी संघ के वरिष्ठ नेता रामेन्द्र कुमार श्रीवास्तव ने भी कहा एक लाख सफाई कर्मचारी नयी पेंशन व्यवस्था से पीड़ित था उसकी नजर सभी राजनीतिक दलों की ओर जमी थी कि कौन उसके भविष्य की सुरक्षा का खेवनहार बनेगा, जिसका जवाब आज उसे मिल गया है, अब बारी हमारी है।

उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूल के शिक्षकों, सफाई कर्मचारियों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं सहित हजारों सरकारी कर्मचारी नई पेंशन योजना के विरोध में लामबंद हुए हैं । उनकी मांग है कि केंद्र सरकार की नई पेंशन योजना को वापस लिया जाए और पुरानी पेंशन योजना को बहाल किया जाए। कर्मचारियों की यह मांग काफी पुरानी

क्या है नई पेंशन योजना

राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) को पीएफआरडीए अधिनियम, 2013 के तहत स्थापित पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) द्वारा प्रशासित और विनियमित किया जा रहा है। एनपीएस एक बाजार से जुड़ा, परिभाषित योगदान उत्पाद है। यह नई योजना 1 जनवरी 2004 को या उसके बाद भर्ती हुए केंद्र सरकार के कर्मचारियों (सशस्त्र बलों को छोड़कर) पर अनिवार्य रूप से लागू है। पश्चिम बंगाल को छोड़कर सभी राज्य सरकारों ने अपने कर्मचारियों के लिए एनपीएस को अपनाया है। वित्तीय सेवा विभाग के अनुसार, सरकारी कर्मचारी अपने वेतन के 10 प्रतिशत की दर से मासिक योगदान करते हैं और एक समान योगदान का भुगतान सरकार द्वारा किया जाता है। केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए, 1 अप्रैल, 2019 से नियोक्ता की योगदान दर को बढ़ाकर 14 प्रतिशत कर दिया गया था।

3 Comments

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