एक गैंगस्टर के एनकाउंटर को जाति सम्मान से जोड़ रहे हैं राजपूत, गांव में BJP नेताओं के घुसने पर बैन

नई दिल्ली/जयपुर। नेशनल जनमत ब्यूरो।

राजस्थान में ठाकुर बिरादरी के कुख्यात अपराधी आनंदपाल सिंह का राजस्थान पुलिस ने चुरु जिले में एनकाउंटर क्या कर दिया। राजस्थान के ठाकुर समाज ने इसको अपने जातीय स्वाभिमान से जोड़ लिया फिलहाल पूरे राजस्थान में बवाल मचा हुआ है। 24 जून को आनंदपाल सिंह का एनकाउंटर हुआ था लेकिन बिरादरी के लोग अभी भी आनंदपाल के शव का अंतिम संस्कार नहीं होने दे रहे हैं।

ठाकुर समुदाय के लोग जगह -जगह वसुंधरा सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं और आनंदपाल सिंह के पुलिस एनकाउंटर को गलत साबित करते हुए सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं।

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राजस्थान के ठाकुर बिरादरी के नेताओं ने साफ कर दिया है कि वे आनंदपाल सिंह को अपराधी नहीं मानते हैं और उसकी शवयात्रा में शामिल होंगे। इसके अलावा आनंदपाल के एनकाउंटर से एक जाट जाति के ट्रेनी एसपी के जुड़े होने के कारण ठाकुर जाटों से भी नाराज हैं।

इसके अलावा ठाकुरों के प्रभाव वाले कई गांवों में ठाकुरों ने भाजपा के नेताओं के आने पर रोक लगा दी है। फेसबुक पर ठाकुर समुदाय के लोगों द्वारा चलाए जा रहे करणी सेना के पेज पर भाजपा के नेताओं को या फिर भाजपा नेताओं के एजेंटों  गांव मे न घुसने देने की बातें कही जा रही हैं।

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सांवराद में बीजेपी विरोध में हाथ उठाए राजपूत समाज ने- 

सांवराद में राजपूत समाज के बड़े नेता डेरा डाले हुए हैं। करणी सेना के प्रधान संरक्षक लोकेन्द्र सिंह कालवी, अध्यक्ष सुखदेव सिंह गोगामेड़ी, रावणा राजपूत समाज अध्यक्ष रणजीत सिंह सोढ़ाला, दुर्गा सिंह चौहान सहित अन्य नेताओं ने परिजनों व समाज के साथ बैठक की। इस दौरान सामूहिक रुप से निर्णय लिया गया कि राज्य सरकार ने यदि उनकी मांगों को नहीं माना तो राजपूत समाज भाजपा का बहिष्कार करेगा।

इस मौके पर मौजूद समाज के लोगों से हाथ खड़े कर संकल्प लिया गया कि अब वे भाजपा को वोट नहीं देंगे।  सीकर जिले के गांवों में ठाकुरों ने भाजपा नेताओं को गांवों में घुसने से मना करते हुए बैनर तक लगा दिए हैं। आनंदपाल की मौत का नागौर और सीकर जिले में खासा विरोध  हो रहा है।

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अभी तक नहीं हुआ अंतिम संस्कार- 

आनंदपाल के एनकाउंटर के 12 दिन बाद भी अंतिम संस्कार को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है. प्रशासनिक अधिकारियों के जरिए कलेक्टर कुमारपाल गौतम को चार सूत्री मांगों का  मांगपत्र सौंपा गया. उधर, आनंदपाल के सांवराद स्थित घर के सामने लोग टैंट लगाकर बैठे हैं और समाज के नेताओं की मौजूदगी में वार्ता चल रही है।

हालात देखकर यह लग रहा है कि आनंदपाल का परिवार चाहता है कि प्रशासन वार्ता की पहल करे तो वहीं प्रशासन चाहता है कि आनंदपाल का परिवार या समाज के लोग पहल करें, लेकिन पहल किसी ने नहीं की है. ऐसे मे सवाल खड़ा होता है कि जब किसी ने पहल ही नहीं कि तो समाधान कैसे होगा।

पूर्व मंत्री भाटी ने उठाए सवाल गलत काम का यही हश्र होता है- 

पूर्व मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता देवीसिंह भाटी ने आनंदपाल एनकाउंटर को सही बताते हुए कहा कि जो गलत काम करता है, उसका यही हश्र होता है। एक वायरल हुए ऑडियो के मुताबिक भाटी ने कहा है कि कहा कि आनंदपाल ने तीन राजपूतों को मारा है। उनकी विधवाओं का हाल किसी ने नहीं पूछा। आज साधु संतों के लिए कोई आगे नहीं आता। महाराणा प्रताप, शिवाजी, दुर्गादास राठौड़ की जयंती के लिए किसी को फुर्सत नहीं है। पंजाब में पता नहीं कितने एनकाउंटर किए गए तब जाकर आतंकवाद खत्म हुआ था। भिंडर वाले का भी यही हश्र हुआ था।

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एक जाट एसपी के नेतृत्व में हुआ एनकाउंटर तो जाटों को गाली देने लगे राजपूत- 

आनंदपाल के लिए प्रदर्शन कर रहे लोग जाटों को जाति सूचक गालियां तक दे रहे हैं।  इसके अलावा कई लोगों ने जाट जाति के कद्दावर किसान नेता हनुमान बेनीवाल के खिलाफ आपत्तिजनक बातें लिखते हुए फेसबुक पर उन्हे जान से मारने की बातें तक कहीं हैं।

 

 

1 Comment

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