अन्ना हजारे ने साधा PM मोदी पर निशाना, 3 साल में भारत को भ्रष्टाचार में डुबोकर, BJP ने भरी तिजोरी

नई दिल्ली, नेशनल जनमत ब्यूरो। 

भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम के नाम पर कांग्रेस की सत्ता हिला देने वाले जनलोकपाल आंदोलन के कर्ताधर्ताओं पर अंदरखाने बीजेपी का सहयोग करने के आरोप लगते रहे हैं। उसी आंदोलन से निकलीं पूर्व आईपीएस किरण बेदी बीजेपी सरकार आने के बाद राज्यपाल बनीं तो पूर्व थल सेनाध्यक्ष वीके सिंह केन्द्र सरकार में मंत्री बने।

वहीं अरविंद केजरीवाल अलग राह पकड़ते हुए आम आदमी पार्टी बनाकर दिल्ली के मुख्यमंत्री बन गए। अकेले बचे अन्ना हजारे मोदी सरकार आने के बाद तीन साल तक शांत रहे लेकिन अब अन्ना नाराज हैं और आंदोलन की घोषणा कर चुके हैं।

आंदोलन की घोषणा कर चुके सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली भाजपा सरकार पर हमला बोलते हुए शुक्रवार को कहा कि पिछले तीन साल के एनडीए शासन काल में भारत एशिया में सबसे ज्यादा भ्रष्ट देशों में शीर्ष स्थान पर आ गया है।

80 हजार करोड़ बीजेपी की तिजोरी में- 

उन्होंने दावे के साथ कहा कि पिछले पांच साल में दान के रूप में भाजपा की तिजोरी में 80 हजार करोड़ रुपए की रकम आई है। अन्ना हजारे ने ‘फोर्ब्स’ पत्रिका के एक आलेख में प्रकाशित ट्रांसपैरेंसी इंटरनेशनल सर्वे का हवाला देते हुए यह बात कही।

उन्होंने कहा, “मैं यह दावा नहीं कर रहा हूं, लेकिन एशियाई देशों में सर्वेक्षण करवाने के बाद यह फोर्ब्स पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।” हजारे ने कहा, “पिछले तीन साल से मैं चुप हूं। जब नई सरकार आती है तो हमें उसे अवश्य कुछ समय देना चाहिए। इसलिए मैं चुप रहा लेकिन अब बोलने का वक्त आ गया है।

मजबूत जन लोकपाल और देश के किसानों के लिए अगले साल 23 मार्च से दूसरा आंदोलन शुरू करने जा रहा हूं।”उन्होंने कहा कि आम जनता अभी भी समस्याओं से जूझ रही है। देश के किसान दुखी हैं।

किसानों को फसल का मूल्य नहीं मिल रहा- 

अन्ना हजारे ने कहा, “किसानों को उनकी फसलों का मूल्य नहीं मिल रहा है और वे कर्ज अदा करने में खुद को असमर्थ पा रहे हैं। यही कारण है कि किसान आत्महत्या कर रहे हैं।” हजारे ने कहा कि वह पिछले तीन साल में प्रधानमंत्री को 32 पत्र लिख चुके हैं लेकिन प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) से एक भी पत्र का उन्हें जवाब नहीं मिला है।

लोकपाल आंदोलन का चेहरा रहे हजारे ने कहा कि उन्होंने आंदोलन शुरू करने के लिए 23 मार्च की तारीख चुनी है क्योंकि उस दिन शहीद दिवस मनाया जाता है.

मोदी सरकार ने नहीं की लोकपाल की नियुक्ति- 

हजारे के एक सहयोगी ने बताया कि मोदी सरकार ने लोकपाल की नियुक्त नहीं की है. उन्होंने कहा, सरकार की तरफ से इसके लिए जो कारण दिए गए हैं, वह तकनीकी हैं.

उन्होंने कहा कि लोकपाल कानून के तहत एक समिति जिसमें प्रधानमंत्री, लोकसभा अध्यक्ष, लोकसभा में विपक्ष के नेता और प्रधान न्यायाधीश अथवा उनके द्वारा नामित कोई व्यक्ति हो, उसका गठन किया जाना चाहिए. वही समिति लोकपाल को चुने.

उन्होंने कहा, लेकिन लोकसभा में फिलहाल विपक्ष का कोई नेता नहीं है इसलिए समिति का गठन नहीं हो सकता है. ऐसे में लोकपाल की नियुक्ति भी नहीं हो सकती है।

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