आत्मदाह प्रकरण में फंसी योगी सरकार, HC की रोक के बाद भी, कांग्रेस प्रवक्ता अनूप पटेल की गिरफ्तारी !

नई दिल्ली, नेशनल जनमत ब्यूरो।

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में विधानसभा व मुख्यमंत्री कार्यालय यानि लोकभवन के ठीक सामने बीते 17 जुलाई को मां-बेटी आत्मदाह के मामले में कांग्रेस प्रवक्ता डॉ. अनूप पटेल की गिऱफ्तारी पर लखनऊ पुलिस घिरती नजर आ रही है। अगर कांग्रेस इस मामले में ठीक से पैरवी करती है तो लखनऊ पुलिस को कोर्ट की अवमानना का सामना करना पड़ सकता है।

दरअसल #नेशनल_जनमत के पास इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ द्वारा दिए गए एक आदेश की प्रति हाथ लगी है। आदेश के अनुसार जिस दिन लखनऊ पुलिस ने कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता डॉ. अनूप पटेल को गिऱफ्तार किया था उसी दिन लखनऊ खंडपीठ की अनिल कुमार व संगीता चंद्रा की बेंच ने अनूप पटेल की याचिका पर सुनवाई करते हुए उन्हे 30 तारीख से 6 सप्ताह यानि 42 दिन का समय निचली अदालत में अपनी बात रखने के लिए दिया था.

आदेश में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि इन 6 सप्ताह यानि 42 दिनों तक यूपी पुलिस डॉ. अनूप पटेल को इस यानि आत्मदाह मामले की एफआईआर में गिरफ्तार नहीं करेगी। इस आदेश के बाद भी न सिर्फ योगी पुलिस ने किरकिरी से बचने के लिए न सिर्फ अनूप पटेल पर मां-बंटी आत्मदाह मामले का ठीकरा फोड़ा बल्कि उनको गिरफ्तार करके जेल भेज दिया.

कांग्रेस प्रदेश नेतृत्व पर भी उठे सवाल-

उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू की छवि एक संघर्षशील नेता की है. प्रदेश भर के कई मुद्दों पर वो प्रशासन से टकराते हुए नजर आते हैं लेकिन इस मामले में उनके रुख पर सवाल उठ रहे हैं अगर अनूप पटेल को कोर्ट से मोहलत मिली हुई है तो कांग्रेस प्रदेश नेतृत्व द्वारा अभी तक इस मुद्दे को उठाया क्यों नहीं गया ? जबकि अनूप पटेल, अजय कुमार लल्लू की टीम का हिस्सा माने जाते हैं और ज्यादातर मौकों पर उनके साथ नजर आते हैं ।

गिरफ्तारी से पहले अपने एक बयान में अनूप पटेल ने सारे आरोपों से इनकार करते हुए इस सरकार की नाकामी ढ़कने की साजिश करार दिया था।

सोशल मीडिया पर उठी आवाज-

सोशल मीडिया पर अनूप पटेल के जेएनयू के साथियों ने अनूप की रिहाई के लिए अभियान छेड़ा हुआ है। ऐसे ही उनके साथी प्रशांत निहाल लिखते हैं कि उत्तर प्रदेश सरकार की तानाशाही देखिये! माननीय उच्च न्यायालय (लखनऊ बेंच) द्वारा 42 दिन के Prevention from Arrest Order पास किये जाने के बावजूद JNU के पूर्व छात्र और उत्तर प्रदेश कांग्रेस समिति के प्रवक्ता Anoop Patel पर झूठा मुकदमा दायर कर लखनऊ पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर पिछले शुक्रवार को जेल भेज दिया. योगी सरकार पीड़ितों को न्याय दिलाने के बजाए जिन लोगों ने उन्हें न्याय पाने में मदद करने कि कोशिश की उन पर ही षड्यंत्र करने और आत्मदाह करने के लिए उकसाने का आरोप लगा कर प्रताड़ित कर रही है.
#Condemn_the_arbitrary_arrest_of_AnoopPatel

क्या है मामला-

अनूप पटेल पर मां-बेटी को आत्मदाह के लिए उकसाने का आरोप है। आपको बता दें कि बीते 17 जुलाई को यूपी विधानसभा और लोकभवन यानि मुख्यमंत्री कार्यालय के ठीक सामने अमेठी की रहने वाली मां-बेटी ने आत्मदाह का प्रयास किया था. मौके पर मौजूद पुलिस कर्मियों ने दोनों के शरीर पर कंबल डालकर आग बुझाई थी.

मां-बेटी को लखनऊ सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया था. इलाज के दौरान सोफिया (मां) ने 22 जुलाई को दम तोड़ दिया था, जबकि बेटी गुड़िया बच गई. डॉक्टरों के मुताबिक सोफिया 90 फीसदी जल गई थी, जबकि गुड़िया 10 फीसदी जली थी. पुलिस ने अस्तपाल में ही दोनों का बयान लिया था, जिसमें पता चला था कि जमीन विवाद में पुलिस-प्रशासन की ओर से कार्रवाई न होने के चलते उन्होंने आत्मदाह का कदम उठाया था.

पहले लखनऊ के ज्वाइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस लॉ एंड आर्डर नवीन अरोरा ने बताया था कि, ”मां-बेटी अमेठी के जामो की रहने वाली हैं. वहां कुछ लोगों से नाली का विवाद था. इसे लेकर मारपीट हुई थी. बेटी की तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया गया था. दोनों ने वहां की पुलिस व प्रशासन पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाते हुए 17 जुलाई की शाम लखनऊ लोकभवन के सामने आत्मदाह का प्रयास किया.”

इसके बाद इस मामले में किरकिरी होने के बाद योगी सरकार की तरफ से एक तरफ अमेठी के पुलिसकर्मियों का निलंबन किया गया वहीं आत्मदाह को साजिश बताते हुए सारा आरोप विपक्ष के सर मढ़ दिया गया था।

बाद में लखनऊ पुलिस ने कहा कि इस मामले में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के अमेठी जिलाध्यक्ष कादिर खान, कांग्रेस प्रवक्ता अनूप पटेल का नाम सामने आया था. इसके अलावा आसमा और सुल्तान ने भी इस षडयंत्र में शामिल थे. इन लोगों पर गुड़िया और उसकी मां सोफिया को आत्मदाह के लिए उकसाने और दोनों को लखनऊ तक पहुंचने में मदद करने का आरोप है.

लखनऊ के हजरत गंज थाने में इन चारों पर एफआईआर भी दर्ज की गई ​थी. साथ ही अमेठी के जामो थाना प्रभारी रतन सिंह, एक उप निरीक्षक एवं एक सिपाही को निलंबित कर दिया गया था.

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4 Comments

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