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अमर सिंह पटेल के समर्थन में आए सामाजिक संगठन, बोले पिछड़ों की आवाज दबाने की हो रही कोशिश

लखनऊ, नीरज भाई पटेल (नेशनल जनमत) 

समाजवादी पार्टी सरकार के जातिवाद को मुद्दा बनाकर प्रदेश में सत्ता तक पहुंची योगी सरकार पर गठन के बाद से ही जातिवाद के आरोप लगने शुरू हो गए थे। हैरत की बात देखिए बढ़ते जातिवाद पर लगाम कसने की बजाए योगी सरकार के राज में सरकार से लेकर संगठन तक जातिवाद बढ़ता ही जा रहा है।

हाल में ही गोरखपुर विश्वविद्यालय मे हुई नियुक्तियों में आश्चर्यजनक रूप से सीएम और वहां के कुलपति विजय कृष्ण सिंह की जाति से ही असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों पर सर्वाधिक लोगों के चयन हुए। सामान्य के पदों में अकेले 56 प्रतिशत ठाकुर और 40 प्रतिशत ब्राह्मणों का चयन हुआ।

जिसे लेकर सोशल मीडिया में सरकार के जातिवादी चरित्र पर लगातार सवाल उठाए गए ‘नेशनल जनमत’ ने भी दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर जाकर पूरी लिस्ट देखी और फिर वास्तविक आंकड़ों के आधार पर खबर भी चलाई जिसमें स्पष्ठ था कि आरोप लगाने लायक नियुक्तियां तो की गई हैं।

क्या हुआ गोरखपुर की नियुक्तियों में- 

कुल नियुक्तियां हुईं 84

सामान्य- 49

ठाकुर- 25 ( 56 प्रतिशत)

ब्राह्मण- 18 ( 40 प्रतिशत)

इन्हीं नियुक्तियों पर सवाल उठाती हुई एक पोस्ट उ.प्र. सचिवालय में अपर निजी सचिव के रूप में तैनात व अपने संघ के 2011 से लगातार अध्यक्ष अमर सिंह पटेल से गलती से व्हाट्सअप ग्रुप में शेयर हो गई।

ये पोस्ट जिस ग्रुप में शेयर हुई वो सचिवालय के अपर निजी सचिवों का ही ग्रुप था। ये सामान्य इंसान भी समझ सकता है कि एक समझदार व्यक्ति ऐसे ग्रुप में ही इस तरह की पोस्ट क्यों करेगा जबकि उसको पता है कि उस ग्रुप में उससे चुनाव हारे बैठे लोग भी हैं जो लगातार इस फिराक में हैं कि कैसे अमर सिंह पटेल की बढ़ती लोकप्रियता को नुकसान पहुंचाया जाए।

खैर अगर गलती से या जानबूझकर उस ग्रुप में ये पोस्ट चली भी गई तो क्या ये उ.प्र. कर्मचारी आचरण नियमावली 1956 का इतना बड़ा उल्लंघन था कि इस मामले में सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय को हस्तक्षेप करना पड़ा ?

हस्तक्षेप किया भी था को स्पष्टीकरण मांगने चेतावनी देकर चेतावनी देकर मामला बंद भी किया जा सकता था लेकिन नहीं सरकार को पिछड़ी जाति के कर्मचारी को संदेश भी तो देना था कि सरकार के जातिवाद के खिलाफ आवाज उठाने का अंजाम क्या होगा ?

सुनिए अमर सिंह पटेल मामले पर क्या बोले नरेश उत्तम- 

एक आईएएस को बनाया है जांच अधिकारी- 

सरकार ने विशेष सचिव नागरिक उड्डयन सूर्यपाल गंगवार को जांच अधिकारी नामित करके बहुत दिमाग से कांटे से कांटा निकालने की कोशिश की है। दरअसल सूर्यपाल गंगवार और अमर सिंह पटेल एक ही जाति के हैं।

अब सरकार का खेल समझिए अगर जांच अधिकारी सूर्यपाल गंगवार अमर सिंह पटेल को आरोपों से बरी करते हैं तो उन पर जातिवाद के आरोप लगाए जाएंगे और अगर नहीं करते हैं तो सरकार आसानी से पिछड़ों को समझा सकती है कि देखों तुम्हारे समाज के जांच अधिकारी ने ही जांच की है इसमें हमारा क्या दोष ?

जबकि सरकार के रवैये को देखते हुए इतना तो सामान्य व्यक्ति भी समझ सकता है कि जांच अधिकारी को कितना निष्पक्ष रहने दिया जाएगा? जबकि मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव एसपी गोयल नागरिक उड्डयन विभाग के भी प्रमुख सचिव हैं ?

गर्मा गई है राजनीति- 

शुक्रवार को नेशनल जनमत की टीम जब सचिवालय के माहौल का जायजा लेने पहुंची तो न्यायपंसद हर अधिकारी/कर्मचारी ने सरकार के इस रवैये की आलोचना की। निजी सचिव के पद पर कार्यरत एक व्यक्ति ने कहा कि मैं इतने दिनों से नौकरी में हूं मुझे बीते 15 सालों में तो ऐसा कोई केस याद नहीं आता जब सचिवालय के किसी व्यक्ति के ऊपर ऐसी कोई कार्रवाई की गई हो।

वहीं प्रमुख विपक्षी दल समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल ने कहा कि सरकार को एक कर्मचारी की आवाज दबाने के बजाए नियुक्तियों में खत्म होते आरक्षण पर अपनी सफाई जारी करनी चाहिए थी।

सरदार सेना राष्ट्रपति को देगी ज्ञापन- 

सरदार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. आर एस सिंह पटेल ने योगी सरकार को दलित-पिछड़ा विरोधी बताते हुए कहा कि अमर सिंह पटेल पर कार्रवाई करके सरकार ने अपनी मानसिकता जाहिर की है।

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर इस सामान्य सी बात पर उनके ऊपर कार्रवाई की गई तो सरदार सेना सड़क पर उतर कर प्रदर्शन करेगी। फिलहाल सरदार सेना राष्ट्रपति महोदय को संबोधित ज्ञापन शनिवार को सौंपेगी।

जनाधार संगठन के कार्यालय में बैठक आज- 

कल यानि शनिवार 14 जुलाई को सुबह 11 बजे जागरूक व रिटायर्ड अधिकारियों-कर्मचारियों द्वारा बनाए गए ‘जनाधार संगठन’ के 1/44 विजयंत खंड गोमती नगर स्थित ऑफिस में बैठक बुलाई गई है जिसमें इस अन्याय के खिलाफ विरोध की रणनीति तैयार की जाएगी।

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