भीम आर्मी के रावण ने जताई एनकाउंटर की आशंका, सरकार की मंशा में साजिश की बू

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो

सहारनपुर में एक तरफ तो शांतिबहाली के प्रयास हो रहे हैं. दूसरी तरफ शाम होते ही किसी अनहोनी के डर से लोग घरो में दुबक जाते है. इस बीच चर्चा है कि सरकारी मशीनरी के सहारे सरकार भीम आर्मी के लोगो को चिन्हित कर रही है. ताकि फिर से कोई पिछड़ा-दलित अन्याय के खिलाफ खड़ा होने की हिमाकत न कर सके. भीम आर्मी के मुखिया चंद्रशेखर आजाद रावण पहले ही खुद के एनकाउंटर की आशंका जता चुके हैं अब पूर्व आईजी एसआर दारापुरी भी सरकारी की नियत पर सवाल खड़े कर रहे हैं.

इसे भी पढ़ें- सहारनपुर हिंसा के विरोध में दलित-पिछड़े छात्र संगठन निकालंगे विधानसभा मार्च

सरेंडर से रोकना जातिवादी मानसिकता का घमंड-

एसआर दारापुरी गंभीर सवाल उठाते हैं हुए कहते हैं उत्तर प्रदेश के गृह सचिव अरविंद कुमार सिंह ने कल बयान दिया कि भीम आर्मी के संस्थापक चन्द्र शेखर के सरेंडर करने के मंसूबों को पूरा नहीं होने दिया जाएगा. यह भी सरकार का दलितों को सबक सिखाने की कार्रवाई का ही प्रतीक है. किसी भी आरोपी को पुलिस अथवा कोर्ट के सामने सरेंडर करने का अधिकार है.

इसे भी पढ़ें- सांसद द्विवेदी जी बोले बीजेपी के खिलाफ लिखा तो ठीक नहीं होगा

क्या इस मामले में प्रशासन द्वारा चन्द्र शेखर को कोर्ट में सरेंडर करने से रोकने को प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लेना दलित विरोधी मानसिकता का प्रतीक नहीं है? जहाँ तक उसकी पुलिस द्वारा गिरफ्तारी का प्रश्न है उसने तो 21 मई को दिल्ली में उत्तर प्रदेश पुलिस के सामने गिरफ्तारी के लिए आत्मसमर्पण किया ही था तब उसकी गिरफ्तारी क्यों नहीं की गयी?  सवाल उठना लाजमी है कि दिल्ली में जंतर मंतर पर नीले आसमान के नीचे जब चंद्रशेखर सामन्तवादी ताकतों व सरकार को ललकार रहा था तो पुलिस ने उसे गिरफ्तार क्यों नहीं किया, क्या चन्द्रशेखर को लेकर सरकार कुछ ताना -बना बुन रही है . ऐसे में एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में चंद्रशेखर का पुलिस की ंमंशा पर शक उठाना ठीक ही जान पड़ता है.

पूर्व आईजी ने उठाए पुलिस की कार्यशैली पर सवाल-

सहारनपुर मामले पर पूर्व आईजी एस.आर.दारापुरी का कहना है कि उत्तर प्रदेश कि योगी सरकार सहारनपुर में पीड़ित दलितों को सबक सिखाने पर उतारु है. एक तरफ सरकार भीम आर्मी के नाम पर तीन दर्जन दलित युवकों को गिरफ्तार करती है जिन में 80% छात्र हैं, दूसरी तरफ शब्बीरपुर में 5 मई को दलितों पर हमले के दोषियों में से केवल 9 लोगों को ही गिरफ्तार करती है, साथ ही हमले के शिकार 9 दलितों को भी गिरफ्तार कर लेती है.

इसे भी पढ़ें- योगीराज में ठाकुर-ब्राह्मणों का थानों पर कब्जा, दलित पिछड़ों का झुनझुना

उन्होंने कहा कि 9 मई को भीम आर्मी की प्रशासन के साथ झड़प भी प्रशासन की ही गलत कार्रवाई का परिणाम थी. क्योंकि उस दिन जिला प्रशासन द्वारा भीम आर्मी के सदस्यों को शब्बीरपुर के मामले में रविदास छात्रावास में शांतिपूर्ण ढंग से की जाने वाली मीटिंग न करने देने और बाद में उनपर लाठी चार्ज करके खदेड़ने के कारण ही हुयी थी.

इसे भी पढ़ें- सहारनपुर हिंसा में दलितों के साथ मुस्लिम-यादव वकील, सुप्रीम कोर्ट में डाली याचिका

इसके बाद जिला प्रशासन ने शब्बीरपुर के दलितों पर हमले के मामले में न तो शीघ्रता से मुआवजे की घोषणा की और न ही हमलावरों की गिरफ्तारी पर बल दिया. इससे दलितों को आभास हुआ कि प्रशासन दलितों के प्रति उपेक्षापूर्ण रवैया तथा हमलावरों के प्रति नर्म रुख अपना रहा है.

फिलहाल भविष्य में यदि भीम आर्मी के मुखिया चन्द्रशेखर के विरुद्ध संबिधान से इतर कोई कार्रवाई को अंजाम दिया गया तो अंजाम गंभीर होने की आशंका बढ़ जाएगी.

इसे भी पढ़ें- स्वागत करिए बदलते भारत की तस्वीर बयां करता है सहारनपुर का द ग्रेट चमार गांव

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Share
Share