UP Election: क्या 300 सीटें प्रभावित कर सकते हैं भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर ?

नूपेेन्द्र सिंह

उत्तर प्रदेश के चुनाव में सिर्फ धर्म का एंगल ही नहीं बल्कि जातीय समीकरण भी उलट देता है पासा, इसलिए यूपी में तकरीबन 21 फीसदी आबादी वाले दलित वोटरों को अनदेखा करना किसी भी पार्टी को पड़ सकता है भारी। यूपी में दलित वोटरों ने जिस भी पार्टी का दामन थामा चुनाव में उस पार्टी का बेड़ा पार हुआ। उत्तर प्रदेश की 403 सीटों में करीब 300 सीटें ऐसी हैं जहां पर दलित समाज निर्णायक रोल निभाता है, वहीं 20 जिलों में तो 25% से ज्यादा अनुसूचित जाति-जनजाति की आबादी है।

यूपी में जहां एक तरफ भाजपा को हराने के लिए समाजवादी पार्टी भी दलित- पिछड़ों के सभी छोटे-बड़े सियासी दलों के साथ गठबंधन कर रही है वहीं दूसरी तरफ सपा का बहुजन राजनीति के बड़े नेता भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर से गठबंधन नहीं हो पाया। इस चुनावी जंग के बीच जहां यूपी में सभी राजनीतिक पार्टियां दलित वोटरों को लुभाने की पूरी कोशिश कर रहीं हैं वहीं ऐसे वक़्त में बहुजन नेता भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर के समाजवादी पार्टी के साथ न होने पर सामाजिक न्याय पसंद लोगों के बीच चिंता बढ़ गयी है। चंदशेखर आज़ाद के समाजवादी पार्टी के साथ न होने से क्या नुकसान हो सकता है यह सवाल सामाजिक न्याय पसंद लोगों के मन में उमड़ रहा है। यह समझने के लिए यूपी में दलित समाज के वोटों की ताकत को समझना होगा…

यूपी में दलित वोट के आंकड़े

उत्तर प्रदेश में दलित वोटरों का प्रतिशत करीब 21.1 हैं, जो जाटव और गैर जाटव दलित में बंटा हुआ है. अगर जाटव दलित की बात करें तो वो 11.70 प्रतिशत हैं और BSP का कोर वोटर माना जाता है. उसके बाद 3.3 प्रतिशत पासी हैं, अगर बात कोरी, बाल्मीकी की करें तो वो 3.15 प्रतिशत हैं, वही धानुक, गोंड और खटीक 1.05 प्रतिशत हैं, अन्य दलित जातियां भी 1.57% हैं.

इन्हीं वोट बैंक की बदौलत 2007 में बहुजन समाज पार्टी ने 206 सीटों 30.43 प्रतिशत वोट के साथ जीत हाशिल कर पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में आई , इस दौरान सबसे ज्यादा सुरक्षित सीटों पर भी जीत हासिल की, 2012 में सुरक्षित सीटों पर समाजवादी पार्टी का दबदबा दिखा, तो वो सत्ता में आएं, वही 2017 में बीजेपी ने यूपी की सुरक्षित सीटों पर ऐतिहासक जीत हासिल की तो अब यूपी की सत्ता में बीजेपी काबिज है। यूपी में 403 विधानसभा सीटों में से 86 आरक्षित सीट हैं।

सुरक्षित सीटों पर प्रदर्शन

  • 2002 विधानसभा चुनाव में समाजवादी 35 सीटों पर जीती, बीएसपी 24 सीटों पर, 18 सीटों पर बीजेपी जीती. वहीं, – 
  • 2007 के चुनाव में 62 सीट पर बीएसपी जीती, 13 सीटों पर समाजवादी पार्टी और 7 सीटों पर बीजेपी. 
  • 2012 चुनाव में समाजवादी पार्टी 58 सीटों पर जीती, बीएसपी 15 सीटों
  • 2017 की बात करें तो बीजेपी 70 सीटों पर जीती, सपा सात सीटों पर और बीएसपी सिर्फ 2 सीटों पर. यानी दलित ने जिस पार्टी को पसंद किया, वही पार्टी सत्ता के सिंघसन में काबिज हुई।

पूरब और पश्चिम के जिलों में दलित वोट फीसदी –

सोनभद्र41.92%
कौशाम्बी36.10%

 सीतापुर 
31.87%
हरदोई 31.36%
उन्नाव 30.64%
रायबरेली 29.83%
औरैया29.6…
झांसी28.07%
जालौन   27.04%
बहराइच  26.89%
      चित्रकूट26.34%
  महोबा   25.78%
मिर्जापुर25.76%
हाथरस 25.20%
आजमगढ  25.73%

लखीमपुर खीरी
25.58
फतेहपुर25.04%
ललितपुर25.01%

कानपुर देहात

 25.08%

अम्बेडकर नगर

 25.14% 

राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आज़ाद जिस तरह की राजनीति करते हैं उस हिसाब से देखें तो यूपी की 403 विधानसभा सीटों में से करीब 300 सीटों पर उनका इस्तेमाल किया जा सकता था ।

3 Comments

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