क्या भीम आर्मी की बढ़ती ताकत से बेचैन हैं मायावती, रावण को बताया RSS का आदमी

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो 

सहारनपुर में दलितों पर हुए अत्याचार के विरोध में सामंतवादी ताकतों के खिलाफ खड़ी होने वाली भीम सेना ने 21 मई को जंतर मंतर पर जबरदस्त प्रदर्शन किया था. इस दौरान भीम आर्मी के मुखिया रावण ने खुले मंच से आव्हान किया था कि दलितों के कोटे से चुने जाने वाले नेता अगर दलितों के काम ना आए तो उन्हे सदन में मत पहुंचने दो.

ऐसा लगता है कि बसपा अध्यक्ष मायावती ने इस भीड़ और भाषण को गौर से देखा और सुना है. इसके बाद ही आनन-फानन में उन्होंने 23 मई को सहारनपुर जाने का फैसला ले लिया है. अब उस भाषण का प्रभाव कहें या भीम आर्मी की लोकप्रियता बीएसपी अध्यक्ष खुलकर उसके खिलाफ बोल रही हैं. हद तो ये है कि बहनजी ने चंद्रशेखर आजाद रावण को आरएसएस का आदमी तक बता दिया है.

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भीम आर्मी को बीएसपी से जोड़ना बीजेपी का षडयंत्र- मायावती 

बीएसपी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने कहा कि उत्तर प्रदेश की बीजेपी सरकार ने राजनीति  के तहत भीम आर्मी को बीएसपी से जोड़ दिया है. जिससे वो सहारनपुर की जातिवादी घटनाओं और अपनी विफलताओं पर पर्दा डाल सके. उन्होंने स्पष्ट किया कि बीएसपी का किसी भी रूप में भीम आर्मी नामक सगंठन से कोई सम्बन्ध नहीं है और ना ही दूर-दूर तक उससे कोई लेना-देना है.

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मायावती ने कहा बीएसपी मूल रूप में राजनीतिक पार्टी है. जिसमें समाज के हर धर्म, हर जाति, हर समाज व महिला, युवा आदि का प्रतिनिधित्व है तथा इसका अलग से ना तो कोई मोर्चा ना कोई संगठन.

भीम आर्मी पर लगाया आर्थिक शोषण का आरोप- 

मायावती ने कहा कि भीम आर्मी को बीएसपी के साथ जोड़ने की प्रदेश बीजपी सरकार की साजिश वैसी ही निन्दनीय है जैसा कि भीम आर्मी के लोग खासकर सहारनपुर में बीएसपी के साथ अपने आपको जोड़कर भोले-भाले लोगों का आर्थिक शोषण कर रहे थे। उन्होंने बताया कि उनके सहारनपुर दौरे के दौरान यह भी शिकायत मिली थी कि भीम आर्मी के लोग अपने आपको बीएसपी का शुभचिन्तक बताकर बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर जयंती के अवसर पर लोगों से धन वसूला करते थे।

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1 Comment

  • P.c.Nakodri , 26 May, 2017 @ 12:03 pm

    गौरक्षकों को भाजपा से जोड़ना सही नहीं- नितिन गडकरी
    बसपा का भीम आर्मी से कोई संबंध नहीं- बहन मायावती,
    ये दोनों बयान कल की तारीख के हैं नितिन गडकरी के बयान पर किसी गौरक्षक की प्रतिक्रिया नहीं आई लेकिन बहन जी के बयान का विरोध सबसे ज्यादा दलित और बसपाई ही कर रहे हैं।
    “दलितों से अच्छे तो अंधभक्त हैं अपने नेताओं का सम्मान तो करते हैं,,
    रकम मोटी मिल गई कहीं RSS वालों से ?

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