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बिहार: भ्रष्टाचार से पीड़ित जिले को आखिर क्यों बर्दाश्त नहीं हुए ईमानदार DM अवनीश कुमार सिंह ?

नई दिल्ली/पटना। नेशनल जनमत ब्यूरो 

बिहार की उपराजधानी कहा जानेवाला भागलपुर इन दिनों 1200 करोड़ से भी ज्यादा के सृजन महाघोटाले को लेक देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। एक के बाद एक जिले के हरेक सरकारी विभाग के इस महाघोटाले में शामिल होने की बात सामने आ रही है। एेसे में प्रशासन की नींद उड़ी हुई है।

लेकिन इस सबसे दूर भागलपुर नगर निगम के अधिकारी-कर्मचारी सुकून में हैं। कारण कि नगर निगम इस महाघोटाले से अछूता रहा। साढ़े तीन साल पहले आए एक आईएएस अधिकारी ने महाघोटाले की मास्टरमाइंड मनोरमा देवी और उनके चट्टे-बट्टों को ऑफिस के आसपास भी फटकने नहीं दिया। 2010 बैच के इस तेजतर्रार युवा आईएएस का नाम है- अवनीश कुमार सिंह।

वही अवनीश, जिन्होंने अपने बूते दिन-रात एक कर भागलपुर को स्मार्ट सिटी का दर्जा दिलाया। भागलपुर में राजनीतिक पंडितों की एक नहीं चलने दी और एक बेहतरीन कार्य-संस्कृति विकसित की।

जुलाई में पहली बार डीएम बने अवनीश कुमार- 

खैर, मूल बात पर आते हैं। जुलाई के अंत में अवनीश कुमार को लखीसराय का डीएम बनाया गया। शिक्षा, खनन, ग्रामीण विकास, पथ निर्माण, वन विभाग, जिले के अधिकतर विभाग से भ्रष्टाचार की बू आने के लोग अभ्यस्त हो चुके थे। डीएम अवनीश कुमार ने आते ही ताबड़तोड़ विभागों का ऑपरेशन शुरू कर दिया।

परिचय बैठक(इंट्रोडक्टरी मीटिंग) में अधिकारियों को जब उन्होंने अपनी कार्यशैली से अवगत कराया, तो सभी सन्न हो गए और उन्हें पता चल गया कि एक ईमानदार नेतृत्व के नीचे काम करने के लिए उन्हें पुराना ढर्रा छोड़ना ही होगा।

ज्वाइनिंग के साथ ही डीएम अवनीश ने विभागों को निरीक्षण शुरू कर दिया और गड़बड़ियां पकड़ में आती गईं। पदाधिकारियों को फटकार लगनी तय थी।

शैलजा शर्मा से काम के लिए कहना भारी पड़ गया ?

अपने काम को बोझ समझनेवाली एसडीएम शैलजा अपनी निजी समस्याओं, आवास की बदहाली व अन्य कारणों को लेकर डीएम के पास रोती-गाती रहीं। लेकिन काम में कोताही बर्दाश्त नहीं करनेवाले डीएम ने मैडम को भी फटकार लगा डाली।

आईएएस अवनीश कुमार और एसडीएम शैलजा शर्मा किसी कार्यक्रम में

अपने कार्यकाल में मैडम को अंगुली पर गिनाने लायक एक काम नहीं था। इस बीच मैडम ने स्वास्थ्य कारणों से छुट्टी का आवेदन डाला कि मुख्यालय में ही रहूंगी, पर ऑफिस नहीं जाउंगी। लेकिन मैडम पटना निकल गई और अगले दिन डीएम के तबादले का पत्र जारी हो गया। लखीसराय छोड़ने को आतुर मैडम को प्रोमोशन मिल गया और वह मुजफ्फरपुर की डीडीसी यानि उप विकास आयुक्त बना दी गईं।

साजिश का शिकार हुए आईएएस अवनीश- 

चर्चाओं पर गौर करें, तो मैडम ने डीएम पर काम ज्यादा देने और मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाया है। एक हवा यह भी उड़ाई गई कि डीएम उनके आवास भी चले गए थे। अब सवाल यह है कि बीमारी और बेडरेस्ट की सूचना पर कोई अधिकारी अपने मातहत अधिकारी का हाल पूछने नहीं जा सकता क्या?

डीएम शाम पांच बजे प्रशासनिक गाड़ी से क्यों जाते? और जाते भी तो आवास के अंदर क्यों नहीं घुसते? परिसर से ही क्यों लौटते? अवनीश के भागलपुर कार्यकाल के दौरान कभी भी उनके दामन पर किसी भी तरह की छींट तक नहीं पड़ी, तो आखिर एेसा क्या हुआ कि ज्वाइनिंग के 15 दिन के भीतर उन पर मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगा साजिशन तबादला कर दिया गया।

सच्चाई यह है कि एसडीएम शैलजा शर्मा काफी दिनों से लखीसराय छोड़ने के प्रयास में थीं और उन्होंने अवनीश कुमार के सामने भी यही रोना रोया था। जिले के भ्रष्ट सिस्टम के लिए ईमानदार अफसर पचा पाना भी मुश्किल हो रहा था। ऐसे में संदेह इस ओर भी जा रहा है कि मैडम को इस्तेमाल कर लिया गया है और लखीसराय से मुक्ति के एवज में उनसे आरोप लगवाया गया हो।

आरोप लगाने वाली मैडम के बारे में भी थोड़ा जान लीजिए- 

लखीसराय नामक इस छोटे से जिले में आठ-नौ महीने पहले एक एसडीएम आईं शैलजा शर्मा। अपने पूरे कार्यकाल के दौरान इन्होंने न तो अपनी पृष्ठभूमि जाहिर होने दी और न ही घर-परिवार के बारे में सही जानकारी दी। मैडम हैं तो आईएएस, लेकिन इनकी नौकरी पर भी तलवार ही लटकी हुई है।

मैडम के विरुद्ध सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल में केस चल रहा है। जनरल कैटगरी की कैंडिडेट शैलजा चार प्रयास में जब यूपीएससी निकालने में विफल रहीं, तो इन्होंने विकलांग कार्ड खेला। चार प्रयासों तक दुरुस्त रहीं शैलजा अब आंख से विकलांग हो गईं और पांचवे प्रयास में एग्जाम निकाला।

अब, जब मेडिकल बोर्ड बैठा, तो तीन बार तक मैडम संदेह के घेरे में ही रहीं। रोते-गाते हुए मैडम ने नौकरी तो ले ली, लेकिन इनके विरुद्ध कार्रवाई चल ही रही है। मैडम की नौकरी बचेगी या रहेगी, फिलहाल जांच का विषय है।

लखीसराय के बुद्धिजीवी अवनीश कुमार के साथ- 

इस नाटकीय प्रकरण पर मैंने फेसबुक पर बात रखते हुए लोगों से तर्कशीलता की अपील की तो बुद्धिजीवियों ने भी अवनीश कुमार के बारे में उड़ाई गई अफवाहों की निंदा की। वरिष्ठ पत्रकार कृष्णमोहन सिंह ने लिखा कि कार्य-संस्कृति की धार ही महंगी पड़ गई। तथ्यपरक चर्चा होनी चाहिए।

जागरूक नागरिकों ने भी तबादले की निंदा की और एसडीएम द्वारा लगाए गए आरोप को मनगढंत बताया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अधिवक्ता रजनीश कुमार लिखते हैं कि पुराने डीएम के काले कारनामों पर पर्दा डालने के लिए अवनीश कुमार का तबादला साजिश के तहत करा दिया गया।

आपको बता दें कि इससे पहले लखीसराय में जो प्रमोटी डीएम सुनील कुमार हुए वो अधिकारी कम नेता ज्यादा थे। बोल बच्चन टाइप खाली भाषणबाजी में उनको ज्यादा मजा आता था। बाइपास निर्माण अगस्त तक पूरा करा देने के बारे में खूब वादे किए, लेकिन जो स्थिति है, बाइपास जून 2018 से पहले पूरा नहीं होगा। हां ! आदिवासी के हित के लिए बड़ा फंड लाए, लेकिन चोर-चुहाड़ों के हाथ योजना की मॉनिटरिंग होने लगी। अवनीश यदि डीएम रहते तो इन चोरों की दाल नहीं गलनेवाली थी।

(लेखक निलेश कुमार बिहार में एक एक प्रतिष्ठित समाचार पत्र में सीनियर रिपोर्टर और सामाजिक कार्यकर्ता हैं) 

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