जाति से ऊपर नहीं उठ पाई देशभक्ति, गांव में शहीद रवि पाल की प्रतिमा नहीं लगने दे रहे सवर्ण

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो

देशभक्ति का चोला ओढ़े लोगों की छद्म देशभक्ति की जाति के नाम पर हवा निकल जाति है.आज भी सैनिक के शहीद होने के बाद उसका शव गांव में आने तक तो पूरे राजकीय सम्मान का ख्याल रखा जाता है. पूरा गांव शहादत को गर्व का विषय बताते हुए मीडिया के सामने पाकिस्ताान को सबक सिखाने की बात करता है. इसी बीच में राजनीतिक लाभ लेने के लिए देशभक्ति को कैश कराने नेता और उनके साथ स्थानीय प्रशासन बड़ी-बड़ी घोषणाएं करने पहुंचते हैं.

लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता है गांव के मठाधीशों और तथाकथित उच्च वर्ग के लिए उस शहीद की शहादत से ज्यादा उसकी जाति प्रबल होती जाति है. सैकड़ों ऐसे मामलों के बीच हालिया मामला उरी में शहीद हुए हवलदार रवि पाल के घर का है. 19 सितंबर को उरी में हुए आतंकी हमले में सेना के 20 जवान शहीद हुए थे. इन्हीं में से एक थे जम्मू के सांबा रामगढ़ सेक्टर के सारवा गांव में रहने वाले हवलदार रवि पाल।

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गांव के मुख्य द्वार पर नहीं लगने दे रहे प्रतिमा-

रवि के परिवार ही नहीं बल्कि गांव के जो सवर्ण उस समय रवि की शहादत पर गर्व बताते हुए पाकिस्तान को तगड़ा जवाब देने की बात कर रहे थे वही तथाकथित ऊंची जाति के लोग अब गांव के प्रवेश द्वार पर शहीद रवि की प्रतिमा लगाने का विरोध कर रहे हैं.

शहीद रवि पाल मार्ग के लिए जमीन देने को तैयार नहीं-

रवि पाल के शव के साथ गांव पहुंचे प्रशासन ने लिंक रोड से रवि के घर तक एक मार्ग बनवाकर उसका नाम शहीद रवि पाल मार्ग रखने की बात कही थी. लेकिन अब गांव के उच्चवर्गीय लोग इस रोड के लिए जमीन देने को तैयार नहीं.

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सवर्णों का प्रभुत्व है गांव में-

उच्च वर्ग के प्रभुत्व वाले सारवा गांव में 120 परिवार रहते हैं जिसमें से तकरीबन 24 परिवार पिछड़े और एससी समुदाय के हैं. रवि का परिवार भी पिछड़ी जाति से आता है. इसलिए रवि को सम्मान देने में गांव के लोगों की जाति आड़े आ रही है.

रवि की पत्नी गीता देवी अपने बच्चे वंश और सुधांश के साथ इस बात को लेकर कई बार अधिकारियों के चक्कर भी काट चुकी हैं लेकिन कोई नतीजा नहीं. रवि के भाई राजकुमार पाल कहते हैं कि इस सच को स्वीकार करने में कोई दिक्कत नहीं कि हमारी जाति की बजह से गांव के लोग ऐसा कर रहे हैं हम हैरत में हैं कि शहादत के दिन गर्मजोशी से बड़ी-बड़ी बातें करनेे वाला प्रशासन आज हमारी कोई मदद नहीं कर पा रहा.

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बीजेपी के मंत्री चंद्रप्रकाश गंगा ने दिया था आश्वासन-

बीजेपी के स्थानीय विधायक और सरकार में मंत्री चंद्रप्रकाश गंगा ने भी शहादत के बाद आश्वासन दिया था. बड़ी-बड़ी बाते की थीं लेकिन छह महीने बीतने के बाद अब इस परिवार का कोई पुरसाहाल नहीं.

घर तक नहीं गए बीजेपी के संगठन महामंत्री रामलाल-

बीजेपी के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री और जम्मू के प्रभारी रामलाल जम्मू में डोर टू डोर अभियान चला रहे थे. उसी दौरान शहीद के घर के पास से होकर चले गए लेकिन शहीद के घर जाना तक उन्होंने जरूरी नहीं समझा. और राष्ट्रीयता की बात करनेवाले बीजेपी के स्थानीय नेताओं ने भी उन्हे याद दिलाना जरूरी नहीं समझा.

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