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देश में आरएसएस का एजेंडा थोपने के लिए संवैधानिक पदों पर बैठाए जा रहे हैं संघी !

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो

आज हर कहीं गाय का शोर है. गाय को बीजेपी और उसे जुड़े लोगों ने राजनीतिक पशु बना दिया है. गाय इस समय देश के लिए मुद्दा है. इसी मुद्दे को सामाजिक कार्यकर्ता काव्या यादव आएसएसकी साजिश बता रही हैं. काव्या कहती हैं कि आरएसएस चाहता है कि हम फिर से उसी युग में लौट आए जहां दलित-पिछड़े गुलाामी की जिंदगी जी रहे थे.

काल्पनिक कर्मकांड और पाखंड थोपना चाहता है आरएसएस-

आरएसएस, भारत को उस बीते युग में ले जाना चाहती है. जहां मानव को गाय माना जाता और गाय को मानव माना जाता था. वे मानव को गाय कहने वाले उस हीन युग से भारत का उज्जवल भविष्य निर्माण करना चहाते है. आधुनिक वैज्ञानिक तरीकों को नकारकर तथा वैज्ञानिक चेतना उत्पन्न करने के स्थान पर वे यह चाहते हैं कि काल्पनिक कर्मकांड और पाखंड सभी प्रकार के ज्ञान का भंडार हैं.

शैक्षणिक संस्थानों में भी एजेंडा लागू करना चाहता है आरएसएस- 

भारत के शैक्षिक संस्थानों को खोखला बनाने का काम भाजपा सरकार आरएसएस के एजेंडा के तहत करने में लगी है. वो विश्व ज्ञान को भारत तक पहुंचने के रास्तो को बंद करना चाहती है और बलपूर्वक प्रयास करके हमारी सूचना प्रौद्योगिकी की महत्वपूर्ण भूमिका को भी समाप्त कर देना चाहती है. आरएसएस केवल संस्कृत भाषा को राष्ट्रीय भाषा के रुप में आगे बढ़ाना चाहती है. जो ऐसी भाषा है जिसका विज्ञान और मानव जीवन मूल्य विकास से कोई संबंध नही है.

आज उनका मूल उद्देश्य अंधविश्ववास के पाखंडी रीति-रिवाजो को बढा़वा देना और वेद, पुराण, रामायण, महाभारत, स्मृतियों को इतिहास के तथ्यों में बदल देने में है.

पाठ्य पुस्तकों में भी अपने ढ़ंग से बदलाव चाहता है आरएसएस- 

इसका ताजा उदाहरण: पीएम नरेन्द्र मोदी के शपथ ग्रहण से पहले राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से संबंधित दीनानाथ बत्रा ने शिक्षा प्रणाली में आमूल-चूल परिवर्तन करने और पाठय पुस्तकें फिर से लिखने की मांग की थी. उनका एक मात्र लक्ष्य है  भारतीय संविधान की प्राचीन श्रमण लोकतांत्रिक और वैज्ञानिक परंपराओं को नष्ट कर देना.

वे अटलबिहारी बाजपेयी की 1996 की अल्पमत की सरकार के समय से मनमाने ढंग विख्यात लेखक और बुद्धिजीवियों के स्थानांतरण कर रहे हैं और उनके स्थान पर ऐसे लोगो को नियुक्त कर रहे जिनकी योग्यता यही है कि वे  आरएसएस के सदस्य हैं.

संघी लोगों को बैठाया जा रहा है प्रमुख पदों पर- 

राष्ट्रीय संग्रहालय के प्रधान वेणु  वासुदेवन और ललित कला अकादमी के प्रमुख  कल्याण कुमार चक्रवर्ती के अचानक स्थानान्तरण से संस्कृति मंत्रालय भी आंख की किरकिरी बना हुआ है.

इसी प्रकार, विख्यात नर्तकी लीला सैमसन ने हस्तक्षेप करने के मामले में सेंसर बोर्ड से इस्तीफा दे दिया. भाजपा के बुद्धिजीवी लोगों के बीच सुब्रमण्यम स्वामी जैसे लोग हैं. जिन्होंने प्राचीन इतिहासकार की किताबें जला देने और प्राचीन बौद्ध पुरातन अवशेषों को हाशिये पर पड़े रहने कि वकालत की है.

वाई सुदर्षन राव, जो कि एक पाखडी गुरु हैं जिन्हे भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया है. वे महाभारत और रामायण की ऐतिहासिकता को सिद्ध करना चाहते हैं.  वे पुराणों की प्रासंगिकता पर बल देते हैं. महाकाव्यों के माध्यम से भारतीय इतिहास परिषद के लोगों को अपने इतिहास में ले जाने में भूमिका निभाकर प्राचीन बौद्ध धरोहर का ब्राह्मणीकरण करने में लगे हैं.

साम्प्रदायिक मतांध एजेंडे को आगे बढ़ाना और क्रिसमस दिवस को सुशासन दिवस के रुप में घोषित करना मोदी सरकार द्वारा किया गया यह प्रयास वास्तविक जानबूझकर किया गया साम्प्रदायिक मतांध है।

मुस्लिम और हिन्दू वंचितों को आर्थिक क्षति पहुंचाकर कमजोर करने का एजेंडा है- 

मांस पर लगाये गए प्रतिबंध का उद्देश्य केवल मुसलमानों का उत्पीड़न नहीं है बल्कि उन्हें आर्थिक दृष्टि से भी नुकसान पहुंचाना है . इससे हिन्दू वंचित जैसे खटिक, पासी, चमार जैसी जातियों को भी बहुत नुकसान है. आरएसएस के सांप्रदायिक स्वरुप के ऐसे हथकंडे हैं, जो बहुत ही घृणित हैं और इनकी निंदा की जानी चाहिए क्योंकि इससे सौहार्द की दीर्घ लोकतांत्रिक परंपरा जो कि हमारे सभी समुदायों के बीच विद्यमान है उसे क्षति पहुंची है.  यहां तक कि विदेश मंत्रालय पर दबाव डाला गया है कि वह मोदी के विदेश दौरों में मोदी के आक्रामक स्वरुप में हिंदू एजेंडे का पालन करें.

भारत के  लोकतांत्रिक ढाचें कि संस्कृति को साम्प्रदायिक रंग देकर बहुसंख्यक के बढ़ते उत्पीड़न के खिलाफ एकजुट होने की जरुरत है. हमारे इतिहास को बदलने के उनके प्रयासों को विफल बनाने के लिए हमें कमर कस लेनी चाहिए. इन सबसे बढ़ कर जरुरत इस बात की है कि हमें यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि भारतीय संविधान द्वारा आधुनिक भारत के निर्माण के लिए निभाई गई ऐतिहासिक भूमिका को कभी भूला न दिया जाए. हमें किसी स्थिति  में प्रणीत भाजपा सरकार के हर एक झूठ को सामने लाना ही होगा.

 

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4 Thoughts to “देश में आरएसएस का एजेंडा थोपने के लिए संवैधानिक पदों पर बैठाए जा रहे हैं संघी !”

  1. बहुत बढ़िया आलेख।

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