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हत्यारे शेर सिंह राणा जैसे जातिवादी होते अर्जुन सिंह तो आत्मसमर्पण से पहले ही मरवा देते फूलन देवी को !

नई दिल्ली, नेशनल जनमत ब्यूरो।

समाज में नफरत के बीज बोकर अपनी राजनीति चमकाने वाले कुछ जातिवादी लोग वीरांगना फूलन देवी द्वारा 20 बलात्कारियों की हत्या को ठाकुर आत्मसम्मान से जोड़ते हैं। ऐसे लोगों को जातिगत नफरत से भरे फूलन देवी के हत्यारे कायर शेर सिंह राणा को हिन्दु हृदय सम्राट, क्षत्रिय कुल भूषण और ना जाने क्या-क्या बनाने में जरा भी शर्म नही आती।

लेकिन हकीकत ये है कि पूरा ठाकुर समाज फूलन देवी को इसी जातिवादी नजरिए से नहीं देखता। अगर ऐसा होता तो मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह फूलनदेवी को आत्मसमर्पण से पहले ही मरवा सकते थे और पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह फूलन देवी के राजनीतिक सहयोगी ना होते।

लेकिन ऐसा कतई नहीं हुआ। पढ़िए अर्जुन सिंह ने अपनी आत्मकथा ‘ए ग्रेन ऑफ सेंड इन ऑवरग्लास ऑफ़ टाइम’ में उस आत्मसमर्पण के बारे में क्या कहा था-

“खूंखार डकैत फूलनदेवी को जब मैंने पहली बार देखा तब चौंक गया था। क्योंकि, मेरे सामने एक पांच फीट की लड़की ऑटोमेटिक राइफल लिए मंच पर चढ़ रही थी। वो लड़की मेरे पास आई और हथियार मेरे पैरों में डालकर हाथ जोड़ा।

मेरी सहानुभूति उसके साथ थी, क्योंकि, उसको कानून हाथ में लेने के लिए कुछ लोगों ने मजबूर किया था। जिस कारण वह साधारण लड़की से खूंखार दस्यू बनी और कइयों को मौत के घाट उतारा”

जब फूलनदेवी ने भेजा अर्जुन सिंह को संदेश- 

दिवंगत नेता अर्जुन सिंह ने अपनी आत्मकथा में एक बात का और जिक्र किया है। बात दिसंबर 1990 की है, जब अर्जुन सिंह नई दिल्ली के एस्कॉर्ट अस्पताल में हार्ट की बायपास सर्जरी के लिए भर्ती थे। इस दौरान उनको फूलन देवी का एक संदेश प्राप्त हुआ।

संदेश में फूलन देवी ने लिखा था, कि मैं जेल में थी तो आपके लिए कुछ नहीं कर पाई, लेकिन मेरा बचा हुुआ जीवन सम्मान से गुजरे, इसके लिए मैं आपको धन्यवाद देना चाहती हूं। पूर्व दस्यु से इस प्रकार के भाव सुनकर वे चकित हो गए थे।

वरिष्ठ पत्रकार दिलीप मंडल ऐसे जाति मठाधीशों से अपील कर रहे हैं कि ठाकुरों को पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह और पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह जैसे नेताओं से सबक लेना चाहिए ना कि शेर सिंह राणा जैसे समाज तोड़ने वालों से

फूलन देवी और अर्जुन सिंह-

यह सच है कि फूलन देवी ने अपने ऊपर हुए जुल्म का बदला बेहमई में ठाकुरों को मारकर लिया था. बेहमई यूपी में है. उन पर केस भी वहीं हुआ. लेकिन जब आत्मसमर्पण की बारी आई, तो उन्होंने एक शर्त रख दी. हथियार तो दद्दा को ही दूंगी. दद्दा यानी मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह. फूलन को यह आत्मविश्वास था कि अर्जुन सिंह उनके साथ न्याय करेंगे.

फूलन उस वक्त यह नहीं सोचती हैं कि अर्जुन सिंह तो ठाकुर हैं. उनका आत्मसमर्पण मध्य प्रदेश के ग्वालियर में अर्जुन सिंह की उपस्थिति में होता है. अर्जुन सिंह फूलन देवी के उस भरोसे को नहीं तोड़ते. पुलिस उसका फेक एनकाउंटर नहीं करती. वे न्यायिक प्रक्रिया से गुजरती हैं.

फूलन देवी और  वीपी सिंह- 

अपनी सजा काटकर जब फूलन देवी बाहर आईं, तो जिस एक राजनेता ने उनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत में मदद की वे थे, विश्वनाथ प्रताप सिंह. विश्वनाथ प्रताप सिंह के उस समय बेहद करीबी रहे रामविलास पासवान को फूलन देवी ने घर जाकर राखी बांधी थी.

उन दिनों मैं इंडिया टुडे में था, और इस दौर में हो रही अनेक घटनाओं का प्रत्यक्षदर्शी था. यही वह दौर था जब फूलन देवी ने एकलव्य सेना बनाई और उनकी पटना रैली में खुद मुख्यमंत्री लालू प्रसाद पहूंचे.

ठाकुर उस समय जनता दल के साथ थे, जिसके नेता बिहार में लालू प्रसाद थे. बिहार के ठाकुरों का बहुुसंख्य हिस्सा और लगभग सभी नामी नेता आज भी लालू प्रसाद के साथ हैं।

सपा के ठाकुर नेताओं ने स्वागत किया फूलन देवी का- 

आगे चलकर फूलन देवी समाजवादी पार्टी में शामिल होती हैं. मुलायम सिंह की पार्टी के ठाकुर उनका स्वागत करते हैं. ठाकुरों के न्यायप्रिय हिस्से ने फूलन की उस तकलीफ को समझा, जिसकी वजह से फूलन ने बेहमई कांड किया.

वह एक औरत की पीड़ा है. उसका प्रतिशोध है. कोई ठाकुर औरत भी शायद यही करती. फूलन देवी को ठाकुरों के मुकाबले खड़ा करने वाले दुष्ट लोग हैं. यहां जाति का कोई मामला ही नहीं है.

ठाकुरों के नायक वीपी सिंह और अर्जुन सिंह जैसे न्यायप्रिय राजनेता हैं. कायर अपराधी शेर सिंह राणा नहीं. शेर सिंह राणा ने तो फूलन देवी को तब मारा, जब वे हथियार डालकर सार्वजनिक जीवन में आ चुकी थीं. ये कौन सी बहादुरी है, हिम्मत थी तो जब वो बीहड़ की सरदार थीं तब वहां जाकर मोर्चा लेते?

एक थी वीरांगना फूलन : जिसके नाम मात्र से सामंती मर्दवाद और मनुवाद की रूहे कांप उठती हैं !

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