आत्मदाह कांड- डॉ.अनूप पटेल का पलटवार, योगी सरकार ने नाकामी छिपाने के लिए दर्ज कराया फर्जी मुकदमा

लखनऊ, नेशनल जनमत ब्यूरो

प्रदेश की राजधानी लखनऊ में विधानसभा और लोक भवन (मुख्यमंत्री कार्यालय) के ठीक सामने अमेठी की पीड़ित माँ-बेटी द्वारा आत्मदाह के प्रयास के अगले दिन लखनऊ पुलिस द्वारा कांग्रेस व AIMIM नेताओं पर इस साजिश की ठीकरा फोड़ते हुए मुकदमा दर्ज कर लिया गया। इसके बाद विपक्ष ने भी हमला बोलते हुए यूपी में जंगलराज कायम करने का आरोप लगाया।

एक तरफ अमेठी में एसओ सहित 4 पुलिसकर्मियों और लखनऊ में भी सचिवालय सुरक्षा में तैनात 4 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर मामले को दबाने की कोशिश की गई तो वहीं दूसरी तरफ डैमेज कंट्रोल करने के लिए सरकार ने मामले के पीछे साजिश और षडयंत्र होना बताया। इस मामले में AIMIM नेता और कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता अनूप पटेल सहित 4 के खिलाफ आपराधिक साजिश में एफआईआर दर्ज करके तीन लोगों की गिरफ्तारी भी करवा दी।

अब अपने ऊपर दर्ज कराए गए मुकदमे के मामले में डॉ. अनूप पटेल ने एक लिखित बयान जारी किया है जिसमें उन्होंने पुलिस के आरोपों का खंडन करते हुए उन्हे बेबुनियाद बताया है। नेशनल जनमत को अनूप पटेल द्वारा भेजा गया बयान आप पूरा पढ़िए-

अनूप पटेल का पूरे मामले पर बयान-

अमेठी की दो पीड़िताओं द्वारा न्याय न मिलने पर विधानसभा के समक्ष आत्मदाह करना योगी सरकार के भयानक जंगलराज का सबूत है। मैं पीड़िताओं के बेहतर स्वास्थ्य के लिये प्रार्थना करता हूँ।

पीड़िताओं को अमेठी प्रशासन से न्याय न मिलने की वजह से वे दर दर भटक रही थी। कुछ दिन पहले पीड़िता ने कांग्रेस कार्यालय आकर न्याय की फरियाद किया था। मैंने उस दिन पीड़िता का पक्ष मीडिया के समक्ष रखने में सहयोग किया था। उसके बाद पीड़िता से किसी भी तरह का संपर्क नही हुआ है।

लखनऊ पुलिस द्वारा मेरे ऊपर जो आरोप लगाये गये वे पूरी तरह से बेबुनियाद और मनगढंत है। मैंने कल किसी भी मीडियाकर्मी को फोन नही किया। सरकार और प्रशासन अपनी असफलता को विपक्ष पर मढ़ रही हैं।

पिछले 1 साल से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सहित कांग्रेस के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं के ऊपर फ़र्ज़ी मुकदमे किये गए। भाजपा सरकार ने कानून व्यवस्था को ध्वस्त कर दिया है पूरे उत्तर प्रदेश में जंगलराज कायम कर दिया है।

कांग्रेस द्वारा सवाल उठाने पर उसके नेताओं को लगातार प्रताड़ित किया जा रहा है, फ़र्ज़ी मुकदमे में जेल भेज जा रहा है।

मैं प्रियंका गांधी जी और प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू जी का सिपाही हूँ। सत्य और ईमानदारी मेरी बुनियाद है। मेरी खिलाफ सभी आरोप फर्जी है।

अनूप पटेल के इस बयान के अलावा मेरे पास इसी घटना से जुड़ा हुआ एक बयान और आया जो लखनऊ पुलिस के साजिश वाले बयान पर संदेह पैदा करता है।

सामाजिक चेतना फाउंडेशन के अध्यक्ष व अधिवक्ता महेन्द्र कुमार यादव लिखते हैं कि वो मां-बेटी न्याय की गुहार लगाते हुए उनसे भी टकरा गए थे। अगर उनका ये बयान सही तो पुलिस की थ्योरी पर सवाल उठते हैं वो मां-बेटी इंसाफ की गुहार लगाते हुए सड़कों पर भटक रहे थे तो ये पूरी साजिश और षडयंत्र का हिस्सा कैसे हो सकता है ?

मां-बेटी ने महेन्द्र यादव से क्या कहा था ?

साथियों कल शाम से मन बहुत ही व्यथित है, बार-बार वही दृश्य सामने घूम जाते हैं और आंखें भर आती हैं समझ नहीं पाते कि लोग इतना खतरनाक कदम कैसे उठा लेते हैं….

हाँ साथियों बात कर रहे हैं उस मां और बेटी की जिन्होंने कल लखनऊ में माननीय मुख्यमंत्री कार्यालय लोक भवन के गेट के सामने खुद को आग के हवाले कर दिया, यह घटना मेरे लिए इतनी ज्यादा पीड़ादायक है कि मैं आपसे कह पाने की स्थिति में नहीं हूँ।

साथियों कल विक्रमादित्य मार्ग पर मैं अपने कुछ पत्रकार साथियों तथा रामपाल यादव जी पूर्व विधायक बिसवां के साथ विक्रमादित्य मार्ग के निकट एक स्थान पर बैठकर चर्चा कर रहे थे।

इसी दौरान वह मां बेटी काफी देर से हम लोगों को भी घेरे हुए थीं और बार-बार कुछ कहने की चेष्टा कर रही थीं, मैंने अपनी कुर्सी से उठते हुए उस मां से पूछा क्या हुआ पैसे चाहिए भूख लगी है क्या, मेरा इतना पूछते ही वह माँ फफक कर रोने लगी, साथियों मुझे कुछ ऐसा ही लग रहा था कि वह कुछ मांग रही है लेकिन शायद उन्हें पैसों की नहीं न्याय की जरूरत थी

वह न्याय की तलाश में अमेठी से दरबदर भटकते हुए राजधानी तक आ गईं लेकिन फिर भी माँ और बेटी को न्याय नसीब नहीं हुआ और उन्होंने खुद को आग के हवाले कर लिया।

मैं कुछ भी समझने और सोचने की स्थिति में तो बिल्कुल नहीं था, शायद कल इस घटना के बाद मैं खुद को गुनहगार महसूस कर रहा हूं क्योंकि मैंने सीरियस होकर उन्हें नहीं लिया, क्यों नहीं उन दोनों के साथ उच्च अधिकारियों के पास गया शायद वह इतना गंभीर खतरनाक कदम नहीं उठाती।

साथियों सोचिए क्या उस डिप्टी कलेक्टर पर जिससे उस माँ ने शिकायत की थी की दबंग लोग उसे प्रताड़ित कर रहे हैं। उसकी जमीन कब्जा कर ली है, उसके साथ छेड़छाड़ व बदतमीजी कर रहे हैं जिसकी कार्रवाई न करने, जिसके न्याय न करने की वजह से आज मां बेटी को आग के हवाले करना पड़ा कोई कार्रवाई होगी???

जिलाधिकारी पर, पुलिस कप्तान पर कोई कार्रवाई होगी ? नहीं होगी तो फिर उस बहन और माँ का बलिदान व्यर्थ जाएगा और इस तरह के अधिकारियों के हौसले बढ़ेंगे और वह जनता की कोई सुनवाई नहीं करेंगे।

मेरी सामाजिक चेतना फाउण्डेशन के माध्यम से यह मांग है कि जब तक निकम्मे, भ्रष्ट, मक्कार, प्रशासनिक अधिकारियों पर कठोरतम कार्रवाई नहीं सुनिश्चित होगी मुझे लगता है माँ और बेटी के साथ इंसाफ नहीं होगा।

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