दलितों को गुलाम बनाने का नया पैंतरा, शंकराचार्य ब्राह्मण ही बनेगा लेकिन दलितों को बनाएंगे नागा साधु

नई दिल्ली/इलाहाबाद। नेशनल जनमत ब्यूरो

कट्टरवादी जाति मानसिकता से ग्रसित लोग हर रोज प्रयास करते रहते हैं कि दलितों-पिछड़ो को किसी तरह अपने मोहपाश में बांधकर रखें वर्ना उनका हिन्दू को बहुसंख्यक बताने का का चोला निकलते देर नहीं लगेगी। मठाधीशों को जब भी जरूरत पड़ी उस समय दलितों-पिछड़ो को हिन्दू बना लेते हैं, जब जाति की बात आती है तिरस्कृत कर देते हैं।

अब बढ़ती जागरूकता के साथ ही मनुवादियों को अपनी सत्ता खतरे में नजर आ रही है। ऐसे में वो नये नये प्रयोग करके दलितों को झुनझुना पकड़ाकर किसी तरह से अपने मनुवादी सिस्टम को मजबूत बनाए रखना चाहते हैं।

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दलितों को बनाएंगे नागा सन्यासी- 

कुछ महीने पहले खबर आई थी कि दलित समुदाय के लोगों के धर्म बदलने से डरकर दसनामी अखाड़े ने दलितों को नागा संयासी बनाने का ऐलान किया है। टूट रहे सामाजिक ताने-बाने और धर्मांतरण पर नकेल कसने के मद्देनजर अखाड़ों ने तय किया है कि अर्धकुंभ प्रयाग में अबकी सभी दसनामी अखाड़ों में दलित भी नागा सन्यासी बन सकेंगे।

अब खबर है कि संत और साधुओं की सबसे ऊंची संस्था अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद (ABAP) ने भी दलितों को साधु बनाने का फैसला किया है। एबीएपी के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी ने इसका ऐलान किया है। महंत नरेंद्र गिरी निरंजनी अखाड़े के प्रमुख भी हैं। उन्होंने बताया कि 2019 अर्ध कुंभ में दलितों को संत-साधु बनाने का काम किया जाएगा। नरेंद्र गिरी ने कहा कि सभी बड़े 13 अखाड़े इस बात के लिए मान गए हैं और वह पल बड़ा ही एतिहासिक होगा।

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सोशल मीडिया पर सवाल शंकराचार्य कब बनाओगे- 

अखाड़ों के इस कदम को बीजेपी के वोट बैंक से जोड़ कर देखा जा रहा है। इस कदम से भाजपा अखाड़ों के माध्यम से दलितों में ये भावना जगाना चाहती है कि भाजपा राज में उन्हें भी बराबरी के अधिकार दिए जा रहे हैं। लेकिन सोशल मीडिया पर लोग सवाल कर रहे हैं कि दलितों को नागा-साधु ही बनाओगे या महामंडलेश्वर और शंकराचार्य भी फिलहाल तो ब्राह्मणों के लिए ये पद आरक्षित हैं।

2019 में लोकसभा चुनाव है और दलितों को नागा साधु बनाने के फैसले के बाद बीजेपी उनमें अपना वोटबैंक मजबूत करना चाहती है। अब तक सिर्फ पंचदशनाम जूना अखाड़े में ही दलितों सहित सभी जातियों को नागा दीक्षा दी जाती रही है। अखाड़ा परिषद ने सफाई देते हुए कहा कि नागा संयासियों की संख्या में बढ़ोत्तरी करने के लिए यह निर्णय लिया गया है।

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नरेंद्र गिरी का तर्क भेदभाव कम होगा- 

फिलहाल ऊंची जाति के लोगों को ही नागा संत-साधु बनने की अनुमति होती है। जिसमें ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य समाज के लोग शामिल होते हैं। इस पर नरेंद्र गिरी ने कहा कि अगर दलित जाति के लोग नागा साधु बनकर उनके कठोर जीवन का अनुभव लेना चाहते हैं तो इसमें परेशानी की कोई बात ही नहीं है। उन्होंने कहा इससे जाति के नाम पर होने वाला भेदभाव और कम होगा।

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