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अपना दल (S) में बड़ी दरार के संकेत, अनुप्रिया पटेल के शक्ति प्रदर्शन में नहीं पहुंचे विधायक आर के वर्मा

लखनऊ, नेशनल जनमत ब्यूरो। 

अपना दल के संस्थापक बोधिसत्व डॉ. सोनेलाल पटेल के 69 वें जन्मदिन के अवसर पर अपना दल(एस) के द्वारा लखनऊ में इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया।

दरकते एनडीए को उत्तर प्रदेश में मजबूत दिखाने के लिए मंच पर बकायदा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और लोजपा से केन्द्रीय मंत्री रामविलास पासवान तो मौजूद थे लेकिन पार्टी के सबसे वरिष्ठ विधायक व व पूर्व प्रदेश अध्यक्ष समेत दर्जनों पुराने साथी नदारद थे।

अपना दल (एस) ने भले ही कार्यक्रम यशकायी डॉ. सोनेलाल पटेल जयंती के  नाम पर आयोजित किया था लेकिन कार्यक्रम की रूपरेखा और वहां दिए गए भाषणों से स्पष्ट था कि इसकी पटकथा 2019 चुनाव को लेकर बड़े मंथन के बाद तैयार की गई है।

एनडीए में भले ही लगातार सहयोगियों की संख्या कम हो रही हो लेकिन उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी-बहुजन समाज पार्टी के संभावित गठबंधन और तीन लोकसभा व एक विधानसभा चुनाव की हार से खराब हो रहे माहौल में इस सम्मेलन के जरिए गठबंधन में मजबूती के संदेश दिए गए.

लोजपा प्रमुख रामविलास पासवान का मायावती पर हमला बोलना, गौतम बुद्ध को क्षत्रिय बताकर योगी आदित्यनाथ की मौजदूगी मेें क्षत्रियों की तारीफ करना सोची समझी रणनीति का हिस्सा लग रहा था।

इतना ही नहीं अपना दल एस की नेता व केन्द्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल द्वारा मंच से इस बात का अहसास कराना कि योगी आदित्यनाथ सहयोगी दलों का ध्यान रखते हैं, इस बात को कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर के विरोध की काट के रूप में देखा जा रहा है।

अन्य को समेटने में अपने ही छूट गए- 

खैर एक तरह अपना दल एस की नेता व केन्द्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल व पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष उनके पति अाशीष पटेल लखनऊ में सत्ता प्रदर्शन के साथ ही एनडीए की मजबूती के लिए पसीना बहा रहे थे।

वहीं दूसरी तरफ पार्टी के सबसे वरिष्ठ विधायक व प्रदेश अध्यक्ष रहे डॉ. आर के वर्मा दर्जनों नेता व समर्थकों के साथ सादगी से प्रतापगढ़ में अपने कार्यालय में पार्टी के संस्थापक की जयंती मना रहे थे। उन्होंने व उनके समर्थकों ने कार्यक्रम में आना उचित नहीं समझा।

पार्टी के संघर्ष के दिनों के कार्यकर्ता हैं डॉ. वर्मा- 

मालूम रहे कि अपना दल (एस) तो छोड़िए डॉ. सोनेलाल पटेल द्वारा संस्थापित मूल अपना दल से भी मात्र डॉ. आर के वर्मा ऐसे व्यक्ति हैं जो लगातार दूसरी बार विधायक हुए हैं। अपना दल (एस) में उनके अलावा सारे विधायक पहली बार बने हैं या सत्ता आने के साथ पार्टी से जुड़े हैं।

इतना ही नहीं पिछली विधानसभा में अनुप्रिया पटेल के सांसद बनने के बाद विधानसभा में विश्वानथगंज से अपना दल के एकमात्र विधायक व पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. आर के वर्मा ही सब कुछ थे।

मां कृष्णा पटेल व बेटी अनुप्रिया पटेल के बीच जब पार्टी को लेकर खींचतान हुई तब भी युवा नेतृत्व में भरोसा करते हुए डॉ. आरके वर्मा वे अनुप्रिया पटेल गुट का साथ दिया और प्रदेश अध्यक्ष के रूप में विभिन्न जिलों में कार्यक्रम आयोजित कराए।

इस बार 9 विधायक बनने के बाद जब मंत्री बनने की बारी आई तो सभी को यकीन था अनुप्रिया-आशीष अपने सबसे पुराने साथी व प्रदेश अध्यक्ष पर भरोसा जताएंगी लेकिन आखिरी समय में पार्टी में शामिल हुए जय कुमार सिंह जैकी को पार्टी की तरफ से मंत्री बना दिया गया। पार्टी में अन्तर्कलह तो तभी से शुरू हो गई थी.

ये डॉ. सोनेलाल के सपनों की पार्टी नहीं- 

इस बारे में नेशनल जनमत ने जब विधायक डॉ. आर के वर्मा से कार्यक्रम में ना आने का कारण जानना चाहा तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि इस समय अपना दल का शीर्ष नेतृत्व पार्टी संस्थापक डॉ. सोनेलाल पटेल के सपनों को रौंदने का काम कर रहा है।

जिस व्यक्ति की जयंती आज पार्टी मना रही है उस महान व्यक्ति ने अपने खून पसीने से पार्टी को सींचा आज उसी के विचारों को दरकिनार करते हुए नेतृत्व स्वार्थी होकर सिर्फ सत्ता सुख देख रहा है।

समाज के लोगों का उत्पीड़न हो रहा है, हत्याएं हो रही हैंं, दलित-पिछड़ों का शोषण हो रहा है। प्रतापगढ़ में ब्लॉक प्रमुख सड़क पर दौड़ा-दौड़ाकर पीटा जा रहा है, समाज के लोगों का उत्पीड़न हो रहा है यहां तक कि इलाहाबाद-प्रतापगढ़ में कई हत्याएं हुईं इसके बाद भी शीर्ष नेतृत्व मुंह खोलने को तैयार नहीं तो क्या फायदा कार्यक्रम में सत्ता की ताकत दिखाने का।

राष्ट्रीय अध्यक्ष आशीष पटेल का पक्ष- 

इस बारे में नेशनल जनमत ने जब पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष आशीष सिंह से उनका पक्ष जानना चाहा तो उनका जवाब पढ़कर आप खुद अंदाजा लगा लीजिए कि दाल में कुछ काला नहीं पूरी दाल ही काली हो चुकी है।

नेशनल जनमत का सवाल- आपकी पार्टी के विधायक आर के वर्मा के कार्यक्रम में ना पहुंचने की कोई खास वजह ?

आशीष पटेल का जवाब-  “तुम्हे तो पता ही है कि क्यों नहीं आया

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