जाने क्या है पीएम का प्रोटोकॉल और कैसे तय होता है पीएम का रूट? पढ़ें पूरी खबर

नूपेन्द्र सिंह

भारत के प्रधानमंत्री की सुरक्षा किसी भी अन्य प्रमुख देशों के प्रधानमंत्री की तरह कड़ी होती है. ऐसे में प्रधानमंत्री को 24 घंटे सुरक्षा मुहैया कराने की जिम्मेदारी SPG यानी स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप की होती है. प्रधानमंत्री जहां भी जाते हैं उनकी सुरक्षा के लिए लगभग 100 लोगों का एक दल साथ होता है।

बीते बुधवार को पंजाब के फ़िरोज़पुर दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में हुई चूक मामले में राजनीति तेज होती नजर आरही है। जहां भाजपा इस मामले में पंजाब की कांग्रेस सरकार की लापरवाही का दावा कर रही है वहीं कांग्रेस इसे भाजपा का ड्रामा बता रही है। बता दें कि 05 जनवरी को पीएम मोदी फिरोजपुर में विकास परियोजनाओं के शिलान्यास के लिए पंजाब गए हुए थे. विरोध प्रदर्शनों के चलते पीएम मोदी का काफिला हुसैनीवाला फ्लाइओवर पर 15 से 20 मिनट तक फंसा रहा. जिसके चलते, प्रधानमंत्री के काफिले को वापस लौटना पड़ा. इसके बाद बठिंडा में उन्होंने एयरपोर्ट सिक्योरिटी से कहा, ‘अपने सीएम को थैंक्स कहना कि मैं जिंदा लौट पाया’. 

पंजाब में पीएम नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में हुई बड़ी चूक के बाद कई सवाल खड़े होने लगे हैं. ऐसे में आम लोगों के मन में पीएम प्रोटोकॉल को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि प्रधानमंत्री की सुरक्षा का क्‍या प्रोटोकॉल होता है.

पीएम की सुरक्षा, SPG की जिम्‍मेदारी

  • देश के प्रधानमंत्री की सुरक्षा की जिम्‍मेदारी स्‍पेशल प्रोटेक्‍शन ग्रुप (SPG) की होती है
  • पीएम की सुरक्षा के लिए उनके साथ लगभग 100 लोगों का एक दल होता है.
  • जब प्रधानमंत्री चलते हैं, तब वे वर्दी के साथ-साथ सिविल ड्रेस वाले एनएसजी के कमांडो से घिरे होते हैं.
  • पीएम के दौरे वाले स्‍थानों पर एसपीजी के विशेष प्रशिक्षित निशानेबाज कमांडों को तैनात किया जाता है.
  • पीएम के काफिले के ठीक आगे और पीछे पुलिस के सुरक्षाकर्मियों की गाड़ियां होती हैं.
  • बाईं और दाईं ओर दो और वाहन होते हैं और बीच में प्रधानमंत्री का बुलेटप्रूफ वाहन होता है
  • पीएम के काफिले में 2 बख्तरबंद BMW 7 सीरीज सेडान, 6 BMW X5 और एक मर्सिडीज बेंज एंबुलेंस के साथ एक दर्जन से अधिक वाहन रहते हैं
  • हमलावरों को गुमराह करने के लिए काफिले में प्रधानमंत्री के वाहन के समान दो डमी कारें शामिल होती हैं
  • जैमर के साथ एक एक टाटा सफारी भी पीएम के काफिले के साथ चलती है.
  • जैमर वाहन के ऊपर कई एंटेना होते हैं.
  • जैमर सड़क के दोनों ओर रखे गए बमों को 100 मीटर की दूरी पर डिफ्यूज करने में सक्षम हैं.
  • इन सभी कारों पर NSG के सटीक निशानेबाज तैनात रहते हैं 
  • एसपीजी शूटर एक सेकेंड के अंदर आतंकियों को ढेर में सक्षम होते हैं
  • इन जवानों को अमेरिका की सीक्रेट सर्विस की गाइडलाइंस के तय मानदंडों के अनुसार ट्रेनिंग दी जाती है
  • एसपीजी के पास MNF-2000 असॉल्ट राइफल, ऑटोमेटिक गन और 17 एम रिवॉल्वर जैसे अत्‍याधुनिक हथियार होते हैं.

पुलिस की भी होती है भूमिका

SPG के अलावा पुलिस भी प्रधानमंत्री की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाती है. प्रधानमंत्री के स्थानीय कार्यक्रमों में एसपीजी के मुखिया खुद मौजूद रहते हैं. यदि किसी कारण से मुखिया अनुपस्थित रहता है, तो सुरक्षा व्यवस्था का प्रबंधन उच्च पद के किसी अधिकारी द्वारा किया जाता है. जब प्रधानमंत्री अपने आवास से किसी सभा में शामिल होने के लिए बाहर निकलते हैं तो पूरे मार्ग का एक तरफ का यातायात 10 मिनट के लिए बंद कर दिया जाता है. इस बीच, राज्य की पुलिस के दो वाहन सायरन बजाकर मार्ग पर गश्त करते हैं. गश्त यह सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है कि जिस मार्ग से प्रधानमंत्री गुजरेंगे वह पूरी तरह से क्लियर हो. 

पीएम काफिले के आगे चलती है राज्य की पुलिस 

पीएम के काफिले के आगे दिल्ली या संबंधित राज्य की पुलिस की गाड़ियां चलती हैं. जो रूट क्लीयर करती हैं. स्थानीय पुलिस ही SPG को रास्ते पर आगे बढ़ने की सूचना देती है. इसके बाद काफिला आगे चलता है. 

ये है VIP रूट का प्रोटोकॉल

VIP की यात्रा के दौरान हमेशा कम से कम दो रास्‍ते तय किए जाते हैं

तय किए गए इन रास्‍तों की जानकारी पहले से किसी को नहीं होती है

वीआईपी मूवमेंट में अंतिम समय में एसपीजी ही रूट तय करती है

एसपीजी किसी भी समय रूट बदल सकती है

एसपीजी और संबंधित राज्‍य की पुलिस के बीच समन्‍वय होता

वीआईपी के मूवमेंट से पहले राज्‍य की पुलिस से रूट क्लियरेंस मांगा जाता है

पुलिस रूट क्लियर करती है, इसके बाद वीआईपी का काफिला बढ़ता है


1 Comment

  • zoritoler imol , 14 August, 2022 @ 8:17 pm

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