गोरखपुर: “मंत्री जी का निरीक्षण है बच्चे को कंबल में ऐसे लिपेटकर रखो लगे कि जिंदा है”

नई दिल्ली/गोरखपुर। नेशनल जनमत ब्यूरो 

बच्चों की मौत के दो दिन बाद गोरखपुर पहुंचे सीएम आदित्यनाथ ने अपनी पीठ ठोकते हुए खुद को सबसे ज्यादा संवेदनशील नेता बता दिया। सीएम की संवेदनशाीलता तो आपने देख ली हो तो अब बीआरडी अस्पताल के चिकित्सकों की संवेदनशीलता भी देख लीजिए।

गोरखपुर के बीआरडी अस्पताल में जो हुआ वो डॉक्टरों के हैवानी रूप को उजागर करता है। गांव कनेक्शन की ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, अस्पताल में लगातार नन्हें बच्चे दम तोड़ते रहें हैवान डॉक्टर अपने जुर्म पर पर्दा डालते रहे।

सिद्धार्थनगर के रहने वाले राम सकल ने पत्रकारों को जो व्यथा सुनाई वो जानकर आप भी रो पड़ेंगे। “मेरे पोते की मौत हो गई थी, लेकिन अस्पताल के डॉक्टरों ने कहा कि आज मंत्री का दौरा है और बाहर मीडिया कर्मी हैं इसलिए बच्चे को कंबल से ढककर रखो जिससे लगे बच्चा जिंदा है।” इतना बताकर राम सकल फफक-फफक कर रोने लगें।

8 अगस्त की सुबह गोरखपुर के बीआरडी अस्पताल में रामसकल तेज बुखार से तप रहे अपने पोते को लेकर पहुंचे। 10 तारीख की रात जब गैस खत्म हो गई तो पूरे इंसेफ्लाइटिस वार्ड में लोग घबरा गए बाद में चिकित्सकों ने बताया कि ऑक्सीजन आ रही है। इन दौरान बच्चों का इलाज होता रहा और मेरे बच्चे की हालत बिगड़ गई। शनिवार सुबह उसके बच्चे को जब झटके आने लगे और दोपहर तक बच्चे की मौत हो गई।

रामसकल का आरोप है जब वो बच्चे (शव) को घर ले जाने के लिए मृत्यु प्रमाण पत्र मांगने गया तो डॉक्टर उसे टरकाने लगे और बोले अभी मंत्री का दौरा है और मीडिया कर्मी हैं। इसलिए इसीतरह (कंबल ओढे) दिखाते रहो कि तुम्हारा बच्चा जिंदा है।

मंत्रियों के दौरे के दौरान भी यहा हाल रहा।” वो बताते हैं कि शाम तकरीबन 5:30 बजे वो डेथ सर्टिफिकेट मिलने पर अस्पताल से निकले। रामसकल ने मुख्यमंत्री से ऐसे डॉक्टरों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की बात कही।

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