शब्दों से भेदभाव मिटाने की निकली केरल सरकार, ‘दलित-हरिजन’ शब्दों के इस्तेमाल पर रोक

नई दिल्ली. नेशनल जनमत ब्यूरो।

केरल सरकार ने भेदभाव खत्म करने का अनोखा फार्मूला ढूंढ निकाला है। सरकार ने भेदभाव खत्म करने का हवाला देकर दलित और हरिजन शब्दों के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। सरकार के पब्लिक रिलेशन विभाग ने दलित और हरिजन शब्दों के इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए सर्कुलर भी जारी किया है।

पीआर विभाग ने एसटी/एससी आयोग की एक सिफारिश का हवाला देते हुए नोटिस जारी किया है। पीआर विभाग ने सर्कुलर के जरिए सभी सरकारी पब्लिकेशन और सरकार की प्रचार-प्रसार सामग्री में ‘दलित’, ‘हरिजन’ शब्दों के इस्तेमाल पर रोक लगाने की अपील की है।

पीआर विभाग का यह सर्कुलर सरकार और अन्य विभागों के बीच इन शब्दों पर बैन लगाने को लेकर चल रही चर्चा के बीच आया है। सर्कुलर में दलित/हरिजन शब्दों की जगह एससी/एसटी शब्द इस्तेमाल करने का सुझाव दिया गया है।

इंडिया टुडे के मुताबिक एससी/एसटी कमीशन के सूत्रों का कहना है कि दलित और हरिजन शब्द के इस्तेमाल पर रोक लगाने की सिफारिश उन सामाजिक भेदभाव को खत्म करने के लिए की गई थी जो आज भी कई जगहों पर हो रहे हैं।

वहीं दलित आंदोलनकारियों को सरकार का यह फैसला पसंद नहीं आया। उनका कहना है कि सरकार का यह कदम वह स्वीकार नहीं कर सकते, क्योंकि दलित शब्द उन्हें एक सामाजिक-राजनीतिक पहचान देता है।

एक दलित आंदोलनकारी ने कहा, ‘सरकार इस तरह के मुद्दों में क्यों घुसना चाहती है।’ हालांकि इस मामले में अंतिम आदेश लोगों से बात करने के बाद ही आएगा।

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