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क्या किसानों की मांगे इतनी जटिल हैं जिनको नहीं मान सकते शिवराज, बढ़ता जा रहा है बवाल

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो

मध्य प्रदेश में जारी किसान आंदोलन में बीजेपी के किसान संगठनों को तोड़कर लोगो को तोड़कर शिवराज सरकार ने आंदोलन खत्म करने की घोषणा कर दी थी. लेकिन हकीकत में किसानों की मांग सुनी ही नहीं गई थी. मंगलवार को अपनी फसल का उचित मूल्य मांग रहे किसानों पर शिवराज सरकार ने गोलियां चलवा दीं. जिससे 6 किसानों की मौत हो गई, दर्जनों घायल हो गए.

मंगलवार को मंदसौर में हुए बवाल के बाद शहर में कर्फ्यू लगा दिया गया. अब सोचने वाली बात ये है कि किसानों की मांगे क्या ऐसी है कि उनको पूरी ही नहीं किया जा सकता. आखिर किसानों की मांग क्या है.

किसानों की सरकार से क्या मांगें?

– किसान सेना के संयोजक केदार पटेल के मुताबिक- किसानों ने म.प्र. सरकार को 32 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा था. इन पर सोमवार को सीएम से चर्चा भी हुई थी. पटेल के अनुसार की मुख्य मांगे ये हैं.

1) मप्र सरकार ने एक कानून बनाकर किसानों की जमीन लेने के बदले मुआवजे की धारा 34 को हटा दिया था और किसानों के कोर्ट जाने का अधिकार वापस ले लिया था। इस कानून को हटाना किसानों की पहली मांग है.

2) स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू की जाएं जिनमें कहा गया है कि किसी फसल पर जितना खर्च आता है, सरकार उसका डेढ़ गुना दाम दिलाए.

3) एक जून से शुरू हुए आंदोलन में जिन किसानों के खिलाफ केस दर्ज किए गए हैं, उन्हें वापस लिया जाए।

4) मप्र के किसानों की कर्जमाफी।

5) सरकारी डेयरी द्वारा दूध खरीदी के दाम बढ़ाए जाएं.

कहां और कैसे भड़कता गया किसानों का गुस्सा-

– मंगलवार को मंदसौर-नीमच रोड पर करीब एक हजार किसानों ने चक्काजाम कर दिया। यहीं से हिंसा भड़की। इसके बाद 8 ट्रकों और 2 बाइकों में आग लगा दी। पुलिस और सीआरपीएफ ने हालात संभालने की कोशिश की। लेकिन, भीड़ ने पथराव शुरू कर दिया। इसके बाद फायरिंग हुई।

– मारे गए लोगों के नाम कन्हैयालाल पाटीदार निवासी चिलोद पिपलिया, बंटी पाटीदार निवासी टकरावद, चैनाराम पाटीदार निवासी नयाखेडा, अभिषेक पाटीदार बरखेडापंथ और सत्यनारायण पाटीदार बरखेडापंथ हैं। मंदसौर में ही घायल आरिफ नाम के शख्स को इंदौर ले जाया जा रहा था। रास्ते में नागदा के पास उसकी मौत हो गई।

– इसके बाद भीड़ ने मंदसौर में गराेठ रोड पर सीतामऊ टोल बूथ पर आग लगा दी। कुल 28 गाड़ियां जलाई जा चुकी हैं।

– मंदसौर में सोमवार से ही इंटरनेट पर रोक लगा दी गई है। फायरिंग के बाद जिला कलेक्टर ने पहले धारा 144 लगाई और इसके बाद कर्फ्यू लगा दिया।

सरकार की भाषा देखिए- 

होम मिनिस्टर भूपेंद्र सिंह ने कहा- छह दिन से आंदोलन को उग्र करने की साजिश हो रही है। पुलिस धैर्य से काम ले रही थी। असामाजिक तत्वों से सख्ती से निपटने के ऑर्डर दिए गए हैं.

 

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2 Thoughts to “क्या किसानों की मांगे इतनी जटिल हैं जिनको नहीं मान सकते शिवराज, बढ़ता जा रहा है बवाल”

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