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लखनऊ में संविधान विरोधियोंं के खिलाफ ‘लक्ष्य’ ने साधा निशाना, देशद्रोह के तहत कार्रवाई की मांग

लखनऊ, नेशनल जनमत ब्यूरो। 

9 अगस्त को दिल्ली के जंतर मंतर पर कुछ आरक्षण विरोधी जातिवादी संगठनों द्वारा देश का संविधान जलाने का प्रकरण थमने का नाम नहीं ले रहा। वजह सिर्फ इतनी है कि पूरे प्रकरण में दिल्ली पुलिस और केन्द्र सरकार का रवैया निराशाजनक रहा है।

केन्द्र सरकार के अधीन आने वाली पुलिस पहले तो अपनी आंखों के सामने संविधान जलता देखती रही इसके बाद सामान्य धाराओं में मामला दर्ज करके केवल 1 आरोपी की गिरफ्तारी करके शांत बैठ गई।

मौजूदा स्थिति ये है कि अगर संविधान समर्थक संगठन प्रदर्शन ना करें तो दिल्ली पुलिस संविधान विरोधी अन्य आरोपियों को पकड़ने की जहमत भी नहीं उठाएगी। नेशनल जनमत अपने वीडियो में सारे आरोपियों के नाम बता भी चुका है लेकिन पुलिस सिर्फ आरक्षण विरोधी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव दीपक गौड़ को गिरफ्तार करके शांत बैठ गई।

रविवार को लखनऊ के हजरतगंज के पास स्थित बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर भारतीय समन्वय संगठन (लक्ष्य) की ओर से विरोध प्रदर्शन किया गया। जिसमें भारतीय संगम पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुधा पटेल, छत्रपति शाहूजी महाराज स्मृति मंच के अध्यक्ष रामचंद्र पटेल व एससी-एसटी चिकित्सा शिक्षक एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. सुरेश बाबू भी अपने सहयोगियों के साथ शामिल हुए।

इस दौरान देश की राजधानी दिल्ली में संसद के नजदीक संविधान निर्माता बाबा साहेब भीम राव आंबेडकर के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल करते हुये संविधान को आग के हवाले करने वाले सभी आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की गई।

इस मौके पर लक्ष्य की कमांडर चेतना राव ने कहा कि “द प्रीवेंशन ऑफ़ इन्सल्ट टू नेशनल ऑनर एक्ट, 1971” के मुताबिक संविधान को जलाने पर तीन साल से अधिक की सज़ा हो सकती है और “द सिटीज़नशिप एक्ट, 1955” के सेक्शन 10 (2) (ब) के तहत संविधान का अपमान करने वाले व्यक्ति की नागरिकता केंद्र सरकार छीन सकती है।

अगर कानून में प्रावधान है तो इन देश के गद्दारों को केन्द्र सरकार बचाने की कोशिश क्यों कर रही है? सुधा पटेल ने कहा कि संविधान जलाने से बड़ा इस देश में कोई अपराध नहीं हो सकता, सरकार ऐसे तत्वों को फ़ौरन गिरफ्तार करे और उन पर एससी-एसटी एक्ट के तहत कार्रवाई करे।

 

 

 

 

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