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लखनऊ वि.वि. बवाल: गिरफ्तार छात्र बोले, इससे अच्छे तो अंग्रेज थे, सत्याग्रह और अनशन तो करने देते थे

लखनऊ, नेशनल जनमत ब्यूरो। 

लखनऊ विश्वविद्यालय में 14 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे छात्र-छात्राओं से विश्वविद्यालय प्रशासन ने बात तक करना जरूरी नहीं समझा। कुलपति एसपी सिंह की हठधर्मिता से बात इतनी बिगड़ी की विश्वविद्यालय के हालात बेकाबू हो गए।

छात्र-छात्राओं का दोष था तो बस इतना कि उन्होंने बीते साल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के काफिले के सामने आकर काले झंडे दिखाए थे।इसके बाद उन्हे गिरफ्तार भी किया गया था और कॉलेज से निष्कासित भी किया गया था।

यही सब छात्र-छात्राएं अपने दाखिले की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे थे, बुधवार को हुए बवाल के बाद पुलिस ने सबको गिरफ़्तार कर लिया है। हड़ताल पर बैठे छात्रों का आरोप है कि मुख्यमंत्री को काला झंडा दिखाने की वजह से कुलपति एसपी सिंह हमारा भविष्य चौपट करने पर तुले हैं।

वहीं यूनिवर्सिटी अधिकारियों का दावा है कि इन छात्रों को निष्काषित किया गया था, इसलिए इनका प्रवेश परीक्षा परिणाम रोक दिया गया है और कुछ छात्रों को इन शर्तों पर परीक्षा में बैठने दिया गया कि वे भविष्य में किसी भी पाठ्यक्रम में दाखिले के लिए आवेदन नहीं करेंगे.

समाजवादी पार्टी छात्र सभा की नेता पूजा शुक्ला और एनएसयूआई के नेता गौरव त्रिपाठी अपने-अपने संगठन के लोगों के साथ यूनिवर्सिटी प्रशासन के ख़िलाफ़ अनशन पर बैठे थे. पूजा शुक्ला को गिरफ़्तार कर लिया गया है और वे अभी अस्पताल में हैं.

छात्र बोले अंग्रेजों से भी ज्यादा जालिम सरकार- 

पुलिस ने लखनऊ यूनिवर्सिटी के छात्र नेता अंकित सिंह बाबू को भी गिरफ़्तार कर लिया है. अंकित ने बताया, ‘हम सभी लोग अनशन पर बैठे थे। शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग को लेकर सभी लोग बैठे हुए थे. तभी आशीष मिश्रा नाम के एक युवक ने प्रॉक्टर विनोद सिंह से हाथपाई की और घटनास्थल से फ़रार हो गया।

पुलिस उसकी जगह निर्दोष अनशनकारी छात्रों को पीटने लगी. पुलिस ने लाठीचार्ज किया और घसीट कर सबको हसनगंज पुलिस स्टेशन ले आई। पुलिस और कुलपति से नाराज आंदोलनकारी छात्र बोले क्या अब इस मुल्क में अपने अधिकारों के लिए लड़ने पर भी जेल में डाल दिया जाएगा ?

इससे अच्छे तो अंग्रेज़ थे, जो सत्याग्रह और अनशन तो करने देते थे। ज्यादातर छात्रों पर धारा 307 और धारा 07 के अलावा कई अन्य फ़र्ज़ी मामले दर्ज़ कर लिए गए हैं. सबको अब जेल भेजने की तैयारी हैं.’

वीसी बोले मैं कुछ भी कर सकता हूं- 

छात्र नेता पूजा शुक्ला ने नेशनल जनमत से बात करते हुए बताया कि, ‘एमए की प्रवेश परीक्षा चार जून, 2018 को हुई थी और 28 को परिणाम जारी होना था, जो हुआ नहीं। 29 को हम परीक्षा नियंत्रक से मिले, वो बोले प्रॉक्टर से मिलो। जब हम प्रॉक्टर से मिले तो वो बोले की ऊपर से बहुत दबाव है।

उसके बाद हम वीसी सुरेंद्र प्रताप सिंह से मिले तो उनकी भाषा किसी सड़क के गुंडे वाली थी. उन्होंने कहा जो करना है कर लो जिसको बोलना है बोलो ये मेरी यूनिवर्सिटी है, मेरी मर्ज़ी मैं चाहूंगा उसे दाखिला दूंगा।

पूजा का कहना है कि अनशन पर बैठे किसी साथी ने कोई हाथापाई या उपद्रव नहीं किया. उन्होंने आरोप लगाया है कि इसमें एबीवीपी का हाथ है और यह सब वीसी के इशारे पर हुआ है।

पूजा ने आगे बताया, ‘बुधवार को हमने पानी तक छोड़ दिया था. अनशन से कुछ दूर पर किसी ने प्रॉक्टर पर हमला किया, जिसके बाद पुलिस हमें घसीटते हुए ले गयी. हम जानते है कि एबीवीपी से जुड़े लोगों ने प्रोफेसर और प्रॉक्टर पर हमला किया था.

मैंने पुलिस से कहा था कि यहां विवाद हो सकता है, अनशन चल रहा था, इसी वजह से सारी पुलिस अनशन स्थल पर पहुंची. पुलिस ने मुझे घसीटकर बस में बिठाया और बस के अंदर पीटा. प्रॉक्टर पर हमला करने वाला आशीष मिश्रा एबीवीपी से जुड़ा हुआ था.

हमला करने वाला वीसी के साथ बैठकर शराब पीता है. ये सब कुछ वीसी ने करवाया है. हम तो शांति से बैठे थे हमें किस बात के लिए गिरफ़्तार किया. अपने बेटे को यूनिवर्सिटी का क़ानूनी सलाहकार बना दिया और बाकी के बच्चों की ज़िंदगी बर्बाद करने पर उतारू हैं.

मुख्यमंत्री और मौजूदा सरकार छात्रों से इतना डरती क्यों है? अनपढ़ों की जमात जब देश पर हुकूमत करने लगे तो वे छात्रों से खौफ खाते हैं. मैं अस्पताल में में हूं और अब भी मुझे हिरासत में रखा हुआ है.’

कोर्ट ने कुलपति, रजिस्ट्रार, एसएसपी को किया तलब- 

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस राजेश सिंह चौहान की पीठ ने समाचार पत्रों में विश्वविद्यालय परिसर में हुई हिंसा की खबरों पर स्वत: संज्ञान लेते हुए कुलपति और अन्य को नोटिस जारी किया है. अदालत ने कुलपति, रजिस्ट्रार और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को 6 जुलाई को सुबह सवा दस बजे खंडपीठ के समक्ष पेश होने को कहा है.

डीजीपी ने आईजीपी को सौंपी जांच, चौकी प्रभारी निलंबित-

प्रदेश के डीजीपी ओपी सिंह ने प्रकरण की जांच आईजी (लखनऊ रेंज) सुजीत पाण्डेय को सौंप दी है. सिंह ने त्वरित कार्रवाई करते हुए क्षेत्राधिकारी अनुराग सिंह का तबादला कर दिया है जबकि एलयू चौकी प्रभारी पंकज मिश्र को निलंबित कर दिया गया है।

कुलपति एसपी सिंह के नेतृत्व में एलयू शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार दोपहर पुलिस महानिदेशक सिंह से मुलाकात की थी. मामले को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए डीजीपी ने कुलपति को आश्वासन दिया कि हिंसा में शामिल लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने शिक्षकों से कार्य पर वापस लौटने की अपील की.

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