मीडिया झूठ फैला रहा है ना जस्टिस कर्णन कहीं भागे हैं ,ना ही माफी मांगेगे- वकील

नई दिल्ली। नेशनल जनमत डेस्क

जस्टिस कर्णन के वकील मैथ्यू नेदुम्पारा ने लिखित बयान जारी कर मीडिया पर गलत खबर दिखाने का आरोप लगाया है। जस्टिस कर्णन के वकील ने स्पष्ट लिखा है कि माफी का सवाल ही नहीं उठता। मीडिया अपने मन से झूठी खबरें चला रहा है. मैथ्यू का दावा है कि जस्टिस सीएस कर्णन तमिलनाडु के कडलूर स्थित अपने आवास पर ही हैं लेकिन मीडिया अफवाह फैला रहा है कि वो गिरफ्तारी से बचने के लिए विदेश भाग गए हैं. पुलिस भी उनकी गिरफ्तारी के लिए जगह जगह छापे मारने का नाटक कर रही है.

तो क्या मीडिया गलत खबर चला रहा है-

गौरतलब है कि शनिवार को बड़े-बड़े मीडिया संस्थानों ने खबर चलाकर लिखा-कहा कि जस्टिस कर्णन के वकील मैथ्यू नेदुम्पारा ने सुप्रीम कोर्ट से उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग की है। इतना ही नहीं जस्टिस कर्णन के वकील के हवाले से यही भी कहा गया कि हम माफी मांगना चाह रहे हैं लेकिन कोर्ट का रजिस्ट्रार हमारी याचिका को स्वीकार नहीं कर रहा है.

न्यायिक भष्टाचार के खिलाफ मुहिम छेड़ना ही जस्टिस कर्णन का अपराध-

जस्टिस कर्णन ने पीएम नरेन्द्र मोदी को चिट्ठी लिखकर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस समेत 20 जजों के भ्रष्टाचार की जांच की मांग की थी. भ्रष्टाचार की शिकायत करने को सुप्रीम कोर्ट के 7 जजों की पीठ ने कोर्ट की अवमानना मानकर जस्टिस कर्णन के सारे न्यायिक अधिकार छीनते हुए उन्हें कोर्ट में पेश होने का आदेश सुना दिया था. इतना ही नही पश्चिम बंगाल के डीजीपी को उनकी मानसिक जांच कराने का आदेश भी दे दिया था. इस तरह परेशान किए जाने पर जस्टिस कर्णन ने सुप्रीम कोर्ट के सातों जजों पर एससी/एसटी एक्ट के तहत दलित जज को जातिगत रूप से प्रताड़ित करने का दोषी मानते हुए उन्हें पांच- पांच साल की सजा सुना दी. इसका बदला लेते हुए जस्टिस कर्णन को नौ मई को सात सदस्यीय जजों की पीठ ने अवमानना का दोषी ठहराते हुए छह महीने कैद की सजा सुना दी. इसके खिलाफ जस्टिस कर्णन ने न्यायालय की अवमानना अधिनियम की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी थी। उन्होंने कहा था उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही नहीं चलाई जा सकती। संविधान के तहत हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट के अधीन नहीं है, बल्कि सुप्रीम कोर्ट की तरह हाईकोर्ट भी अपने आप में स्वतंत्र है.

6 Comments

  • N.P.SINGH , 15 May, 2017 @ 9:20 pm

    संविधान का पालन सर्वोच्च न्यायालय को भी करना चाहिए मामले को सरकार के पास भेजना चाहिए ,

  • ram prakash chowdhary , 16 May, 2017 @ 2:13 pm

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