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संवाद के बजाए गोली से बात करने से भड़के म.प्र. के किसान-जेडीयू महासचिव अखिलेश कटियार

नई दिल्ली। नेशनल जनमत

जनता दल यू के राष्ट्रीय महासचिव और हार्दिक पटेल के सहयोगी अखिलेश कटियार ने मध्यप्रदेश दौरे से लौटकर नई दिल्ली में शिवराज सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं. अखिलेश कटियार ने नेशनल जनमत से बातचीत में कहा कि बहुत विषम परिस्थिति में किसानों पर
रबड़ की गोली चलाई जा सकती थी, आंसू गैस के गोले छोड़ सकते थे लेकिन सरकार ने संवाद के बजाए गोली से बात  करना बेहतर समझा इसी का परिणाम है मध्य प्रदेश में किसान उग्र हो गए हैं.

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जहां आंदोलन होता है वहीं गोली चलवा देती है बीजेपी- 

अखिलेश कटियार ने बताया कि जेडीयू अध्यक्ष नीतीश कुमार ने मुझे मध्य प्रदेश भेजा था. वहां की परिस्थित देखकर ये स्पष्ट हुआ कि बीजेपी लोकतंत्र को खत्म करना चाहती है. गुजरात में पाटीदार आंदोलन करते हैं तो गोली. मध्यप्रदेश-महाराष्ट्र में किसान आंदोलन करें तो गोली. हरियाणा में आंदोलन हो तो गोली. ये घमंडी तानाशाह की बीजेपी है जो संवाद करने के बजाए गोली से जवाब देना चाहती है.

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चुनाव के पहले किए झूठे वादों से पनपा है आक्रोश- 

चुनाव से पहले बीजेपी ने जो सब्जबाग लोगों को दिखाए थे अब उनमें टकनीकि बहाने ढूंढ़कर बचने का प्रयास हो रहा है. सरकार द्वारा किए वायदों का जनता अब हिसाब मांगने सड़कों पर उतर आई है. कर्ज माफी का झूठ बोलकर मांगने पर गोली का इस्तेमाल करते हो क्या इसलिए सरदार पटेल ने किसानों बारडोली आंदोलन लड़ा था.

किसानों पर बात क्यों नहीं करना चाहती केन्द्र सरकार- 

70 साल के बाद भी बीजेपी किसानों के मुद्दे पर बात करने को तैयार नहीं है. जब तक मिल उत्पाद और कृषि उत्पाद में समानुपात कायम नहीं होगा किसानों की समस्या का समाधान नहीं निकल सकता. आजादी के बाद जानकारी चौंकाने वाली है कि साल 1967 में एक क्विंटल गेंहू के बदले 121 लीटर डीजल आ जाता था लेकिन वर्तमान में यह सिर्फ 24 से 28 लीटर ही मिल पाता है.

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उस वक्त ढाई क्विंटल गेंहू में एक तोला सोना खरीदा जा सकता था लेकिन आज देश का 80 प्रतिशत किसान ऐसा है जो अपना सारा गेंहू बेचकर भी एक तोला सोना खरीदने के बारे में नहीं सोच सकता. यह हाल तब है जब शुरु से ही उपज का दाम लगाने की जिम्मेदारी सरकार ने ले रखी है.  सरकार कृषि अनुसंधान केन्द्रों में जो गेहूं उगाती है उसका लागत मूल्य ही तकरीबन 6 हजार रुपये प्रति क्विटंल आता है लेकिन सरकार गेहूं का समर्थन मूल्य तय करते हुए 1500-1600 से आगे नहीं बढती.

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