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पिछड़ों के विरोध प्रदर्शन से डरी योगी सरकार, PM के आने से पहले ही घर से उठाए गए लौटनराम निषाद

लखनऊ, नेशनल जनमत ब्यूरो। 

इलाहाबाद में साहसी छात्राओं द्वारा बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को काले झंडे दिखाने व उनके काफिले के सामने अचानक कूद जाने से डरी योगी सरकार ने एहतिहातन राष्ट्रीय निषाद संघ के राष्ट्रीय सचिव चौधरी लौटन राम निषाद को उनके घर से शनिवार सुबह उठाकर थाने ले आई।

दरअसल सरकार को लगातार पिछड़े व दलित वर्ग के जागरूक लोग आरक्षण के मुद्दे पर घेर रहे हैं, प्रदर्शन कर रहे हैं, सोशल मीडिया में सवाल कर रहे हैं ऐसे में पिछड़ों के आंदोलन से डरी सरकार पीएम के आगमन में किसी तरह का विरोध प्रदर्शन नहीं चाहती।

क्यों डरी योगी सरकार- 

लौटनराम निषाद ने बताया कि राष्ट्रीय निषाद संघ ने निषाद/मछुआरों व पिछड़ी जातियों के आरक्षण व अधिकारों को लेकर प्रधानमंत्री के 29 जुलाई को लखनऊ आगमन पर शहीद पथ अर्जुनगंज व कामता पर उनके जत्थे को रोककर ज्ञापन देने की घोषणा की थी।

बस इसी आवाज को दबाने के लिए, ज्ञापन ना देने का दवाब बनाने के लिए पुलिस प्रशासन ने लौटनराम निषाद को उनके अर्जुनगंज स्थित घर से 28 जुलाई की सुबह गिरफ्तार कर लिया।

नेशनल जनमत को फोन पर जानकारी देते हुए लोटनराम निषाद ने कहा कि पिछ़ड़ों-दलितों की लड़ाई में हर कुर्बानी देने को तैयार हूं। अपराधियों की तरह घर से उठाकर योगी सरकार मेरी आवाज को नहीं दबा सकती।

राष्ट्रीय निषाद संघ ने निम्नांकित मांगों को लेकर पीएम के काफिले को रोककर ज्ञापन देने का निर्णय लिया था-

1- जाटवी, जटिवा, अहिरवार,जैसवार,दोहरे,दोहरा, रमदसिया, रैदासी, शिवदसिया, कबीरपंथी, रविदास, कुरील, नीम, कर्दम, पीपैल,                   चौंधियार, धुसिया, झुसिया, अदिधर्मी, भगत, उत्तरहा, दखिनहा, मोची, दबकर आदि को जाटव या चमार का व भंगी, मेहतर, हलखोर,             लालबेगी, चूरा, तूरा आदि को वाल्मीकि के नाम से जाति प्रमाण पत्र निर्बाध रूप से जारी किया जाता है।

उसी तरह मल्लाह, केवट, मांझी, राजगौड़, बिंद, धीवर आदि को मझवार व गोड़िया, धुरिया, राजगौड़, कहार, रैकवार, बाथम आदि को           गोंड़ नाम से जाति प्रमाण पत्र जारी किया जाय।

2. फिशरमैन विज़न डॉक्यूमेंटस के संकल्पों को पूरा कर भाजपा अपना वादा पूरा कर नीली क्रांति को विकसित कर मछुआरों का आर्थिक        उन्नयन किया जाय एवं आरक्षण की विसंगति को दूर कर सभी मछुआरा जातियों को एससी/एसटी में सूचीबद्ध किया जाय।

3. राष्ट्रीय मछुआरा आयोग का व फिशरमैन कोऑपरेटिव बैंक, फिशरमैन डेवलपमेंट बोर्ड का गठन किया जाय।

4. एकलव्य पुरस्कार घोषित किया जाय अन्यथा द्रोणाचार्य व अर्जुन पुरस्कार बन्द किया जाय।

5. उत्तर प्रदेश,मध्यप्रदेश,बिहार,छत्तीसगढ़ सरकारों द्वारा भेजे गए प्रस्तावों/संस्तुतियों/सिफारिशों को स्वीकृति प्रदान की जाय।

6. सेन्सस-2011 के अनुसार एससी,एसटी,धार्मिक अल्पसंख्यक,ट्रांसजेंडर्स,दिव्यांग आदि की जनगणना उजागर कर दी गयी तो ओबीसी की     सामाजिक-जातिगत जनगणना को उजागर क्यों नहीं किया गया।ओबीसी की भी जनगणना को घोषित किया जाय।

7. एससी,एसटी की ही भांति अनुच्छेद-15(4),16(4),16(4-ए)के अनुसार कार्यपालिका,विधायिका में समानुपाती आरक्षण दिया जाय।

8. कोलेजियम सिस्टम से उच्च न्यायपालिका में जजों के चयन न कर यूपीएससी,पीएससी की प्रतियोगी परीक्षा पैटर्न पर विधि सेवा आयोग या      यूपीएससी/पीएससी की त्रिस्तरीय प्रतियोगी परीक्षा के माध्यम से ओबीसी,एससी,एसटी को आरक्षण कोटा दे कर किया जाय।

9. पदोन्नति में ओबीसी,एससी,एसटी को आरक्षण दिया जाय।

10. ओबीसी,एससी,एसटी के जिन प्रतियोगियों की कट ऑफ मेरिट या कट ऑफ मार्क्स सामान्य वर्ग के बराबर या अधिक हो,उनका चयन          सामान्य वर्ग में ही किया जाए।

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