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अब OBC मंत्री के परिवहन विभाग की वैकेंसी में ही OBC का आरक्षण खत्म, पद-127, सामान्य-100, OBC-0

लखनऊ, नेशनल जनमत ब्यूरो। 

केन्द्र में नरेन्द्र मोदी और उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार में निकलने वाली नियुक्तियों में धीरे-धारे आरक्षण खत्म होता जा रहा है।  वंचित वर्ग से जुड़े बुद्धिजीवियों का आरोप है कि एक ओबीसी/एससी/एसटी के आरक्षण को महत्वहीन करके उनकी संख्या को सरकारी नौकरियों में सीमित करने की साजिश हो रही है।

बुद्धिजीवी इस आरोप के पीछे कुछ उदाहरण भी प्रस्तुत करते हैं जिसमें स्पष्ट तौर पर दिखता है कि बीजेपी सरकार आने के बाद कैसे धर्म की चासनी में लिपटे और राममंदिर का राग अलाप रहे पिछड़ों के आरक्षण को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया गया।

लोक सेवा आयोग उ.प्र. द्वारा कराई गई सहायक अभियोजन अधिकारी (एपीओ) की परीक्षा में ओबीसी को मिला 23 प्रतिशत आरक्षण, रेलवे मंत्रालय की वैकेंसी में मिला 21 प्रतिशत आरक्षण, गृह मंत्रालय के आईबी की परीक्षा में ओबीसी को 14 प्रतिशत और एससी को 8 प्रतिशत आरक्षण, अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के माध्यम से ग्राम पंचायत अधिकारी की परीक्षा में 42 पद कम दिए गए।

ये तो कुछ चंद उदाहरण हैं इसके अलावा सरकारी वकीलों की नियुक्ति से लेकर न्यायिक सेवाओं और दर्जनों विश्वविद्यालयों की वैकेंसी में भी संविधान प्रदत्त आरक्षण को खत्म करके पूरी तरह से सवर्णों को तरजीह दी गई।

ओबीसी मंत्री के विभाग में ही ओबीसी की नो एंट्री- 

अब उत्तर प्रदेश सरकार के परिवहन विभाग में निकली नियुक्तियों में ओबीसी आरक्षण पूरी तरह से दरकिनार कर दिया गया है। इस नियुक्ति में सवाल इसलिए उठ रहे हैं कि क्योंकि परिवहन विभाग के मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह खुद पिछड़ी जाति यानि कुर्मी से आते हैं।

भले ही स्वतंत्र देव सिंह आज खुद को कुर्मी और पिछड़ी जाति की पहचान से ना जोड़ते हों लेकिन 2012 में जब उनको पार्टी ने प्रदेश उपाध्यक्ष से प्रदेश महामंत्री बनाया था तब पार्टी द्वारा जारी की गई पदाधिकारियों की सूची में उनके नाम के आगे स्पष्ट तौर पर स्वतंत्र देव सिंह ‘पटेल’ लिखा था।

भारतीय जनता पार्टी उत्तर प्रदेश की वेबसाइट पर भी उनका नाम स्वतंत्रदेव सिंह पटेल ही लिखा गया था। इतना ही नहीं इस बार जब उनको राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया तब भी संदेश दिया गया कि कुर्मी समाज से मुकुट बिहारी वर्मा के रूप में एक कैबिनेट मंत्री और स्वतंत्र देव सिंह के रूप में दूसरे मंत्री समाज को प्रतिनिधित्व देने के नाम पर बनाए गए हैं।

मतलब साफ था कि बीजेपी नेतृत्व पार्टी के प्रति समर्पण के साथ ही कुर्मी समाज को हिस्सेदारी देने के लिए उनको बार-बार मौका दे रही है। लेकिन कुर्मी समाज के विभिन्न संगठनों और उनके करीबी रहे लोगों का आरोप है कि मंत्री बनने के बाद स्वतंत्र देव सिंह ओबीसी तो छोड़िए कुर्मी समाज के ही प्रबुद्ध लोगों से दूरी बनाकर रहते हैं।

शायद यही वजह है कि उनके अपने परिवहन विभाग की निकली नियुक्तियों में ओबीसी के लिए एक भी पद आरक्षित नहीं किया गया है।

परिचालक की हैं वैकेंसी- 

लखनऊ शहर की सिटी बस में परिचालक के 127 पदों पर नियुक्ति होने का विज्ञापन जारी किया गया है। जिसमें आवेदन की अंतिम तिथि 14 जुलाई रखी गई है। 127 पदों में सामान्य वर्ग के लिए 100 पद हैं जबकि एससी/एसटी वर्ग के लिए आरक्षित किए गए हैं 27 पद लेकिन ओबीसी को इसमें कोई आरक्षण नहीं दिया गया है।

इस वैकेंसी का विज्ञापन सोशल मीडिया पर जबरदस्त वायरल हो रहा है, और ओबीसी मंत्री होने के नाते लोग स्वतंत्र देव सिंह की सोच पर भी सवाल भी उठा रहे हैं।

एमडी का अजीब तर्क सुनिए- 

इस बारे में नेशनल जनमत ने जब लखनऊ सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विस लि. ( LCTSL) के प्रबंध निदेशक अारिफ सकलेन से फोन पर वार्ता की तो उन्होंने इन वैकेंसी की पुष्टि करते हुए माना कि 127 पोस्ट में ओबीसी के लिए कोई अलग से आरक्षण नहीं दिया गया है।

इसके बाद उनका कहना था कि ओबीसी के लिए मनाही नहीं है वो सामान्य वाले पदों में आवेदन कर सकते हैं। इसमें एमडी साहब ने कौन सी नई बात कही दी ये तो उनका अधिकार है कि वो ओबीसी का प्रमाणपत्र लगाए सामान्य सीट पर तो आवेदन कर ही सकते हैं।

दूसरी बात एमडी साहब ने नेशनल जनमत से कही कि दरअसल सिटी बस में चालक/परिचालक के पदों पर पिछड़ों की संख्या ज्यादा है इसलिए इस नियुक्ति में उनको आरक्षण नहीं दिया गया है।

जब उनसे पूछा गया कि ऐसा कौन से शासनादेश या किसके आदेश पर हो रहा है तो उन्होंने इस बात का कोई उत्तर नहीं दिया।

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