43 केन्द्रीय वि.वि. में इकलौते दलित कुलपति बने प्रो.सुरेश कुमार, गर्व करें या सिस्टम पर शर्म करें

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो।

मोदी सरकार एक तरफ तो आरक्षण खत्म करके ओबीसी-एससी-एसटी के स्टूडेंट के लिए रोजगार के अवसर खत्म करने पर आमादा है. वहीं दूसरी तरफ एक-आध पदों पर दलितों को प्रतिनिधित्व देकर अपनी दलित विरोधी छवि तोड़ने के प्रयास में भी है.

इसी मुहिम के तहत रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति प्रत्याशी बनाने के बाद हैदराबाद विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ई सुरेश कुमार को हैदराबाद स्थित अंग्रेजी एवं विदेशी भाषा विश्वविद्यालय (EFLU) का कुलपति बनाया जा रहा है. हालांकि के गर्व का विषय है या शर्म का ये समझ से परे है क्योंकि देश की 43 सेंट्रल यूनिवर्सिटी में ई सुरेश कुमार पहले दलित कुलपति हैं.

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27 साल का लंबा अनुभव रखते हैं सुरेश कुमार- 

प्रोफेसर सुरेश कुमार आंध्रप्रदेश के वारंगल जिले के रहने वाले हैं और उन्होंने अपनी पीएचडी उस्मानिया विश्व विद्यालय से की. 27 साल का लंबा शैक्षणिक अनुभव रखने वाले प्रो. ई सुरेश कुमार के पास 20 साल का प्रशासनिक अनुभव भी है, जहां उन्होंने रजिस्ट्रा के रूप में बेहतर कार्य किया.

30 किताबें और 21 शोध पत्र लिख चुके हैं-

प्रो. ई सुरेश कुमार 30 किताबें  लिख चुके हैं और उनके 21 से ज्यादा शोध पत्र प्रकाशित हुए हैं. विश्वविद्यालय में उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं. निदेशक, जिला पीजी कॉलेज, विभागाध्यक्ष अंग्रेजी भाषा विभाग, निदेशक अंग्रेजी भाषा प्रशिक्षण केन्द्र जैसी तमाम महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं.

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दलितों पर बढ़ते अत्याचार से खराब हो रही छवि को ठीक करने के लिए उठाया कदम- 

जबसे मोदी सरकार केन्द्र की सत्ता में आई है तबसे दलितों के खिलाफ सामाजिक अन्याय और अत्याचार की घटनाओं में इजाफा हुआ है. मोदी सरकार के इसी अन्याय और भेदभावपूर्ण नीतियों के चलते हैदराबाद यूनिवर्सिटी के होनहार छात्र रोहित वेमुला ने अपना जीवन त्याग दिया था. अब उसी डॉ. रोहित वेमुला के समााज से आने वाले और उसी विश्वविद्यालय में अंग्रेजी भाषा विभाग में विभागाध्यक्ष ई सुरेश कुमार को कुलपति बनाकर इस गुस्से को मैनेज करने का प्रयास किया जा रहा है.

गुजरात के ऊना में दलित आंदोलन, सहारनपुर में दलितों के खिलाफ सरकार के संरक्षण में ऊंची जाति के लोगों द्वारा की गई जातीय हिंसा ने देश भर के दलितों में मोदी सरकार को लेकर नफरत का भाव पैदा कर दिया है. दलितों के बीच फैली इसी नफरत को कम करने के उद्देश्य से ही पहले रामनाथ कोविंद को मोदी सरकार ने राष्ट्रपति प्रत्याशी घोषित किया अब ई. सुरेश कुमार के रूप में 43 सेंट्रल यूनिवर्सिटी में से एक यूनिवर्सिटी का वाइस चांसलर बनाया गया है.

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संघ के करीबी रहे जेएनयू के वीसी जगदीश कुमार की खोज हैं ई. सुरेश कुमार- 

खबरों के मुताविक मानव संसाधन मंत्रालय पर इस बात का बहुत दबाव था कि देश की 43 सेंट्रल यूनिवर्सिटी में एक भी दलित वीसी नहीं है. कई अम्बेडकरवादी संगठन देश की इस बात को लेकर मोदी सरकार की खूब खिचाई भी कर रहे थे.  इसीलिए एक दलित को वीसी बनाना मोदी सरकार की मजबूरी बन गई थी. खबर तो ये भी है कि मानव संसाधन मंत्रालय ने संघ से जुड़े जेएनयू के कुलपति जगदीश कुमार को ये जिम्मेदारी दी थी कि वे किसी दलित को कुलपति के रूप में खोजें. जगदीश कुमार ने हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी में अंग्रेजी के प्रोफेसर ई. सुरेश कुमार को चुन लिया.

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ओबीसी और दलित समुदाय से सिर्फ एक-एक वीसी- 

आपको बता दें कि देश की 47 सेंट्रल यूनिवर्सटी में एक वीसी ओबीसी है और अब एक वीसी दलित समुदाय से बनाया जा रहा है. इसके अलावा सारे वीसी सवर्ण समुदाय से हैं. और सवर्णों में भी करीब 90 फीसदी वीसी सिर्फ ब्राह्मण जाति से ही हैं.

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