गुजरात: इस फायरब्रांड पटेल नेता पर दांव लगा सकते हैं राहुल गांधी, मोदी लहर में भी बने थे कांग्रेस से विधायक

अहमदाबाद/नई दिल्ली, नेशनल जनमत ब्यूरो। 

प्रथम चरण के चुनाव में अमरेली विधानसभा सीट दो कारण से चर्चाओं के केन्द्र में रही एक तो अमरेली क्षेत्र पाटीदार आंदोलन के प्रमुख केंद्र बिंदुओं में से एक है. दूसरा कांग्रेस ने यहां से फायरब्रांड युवा पाटीदार नेता और माजूदा विधायक परेशभाई धनानी को प्रत्याशी बनाया है.

2012 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी के परेश धानानी ने भाजपा के दिलीप संघानी को हराकर सीट इस सीट पर कब्जा किया था. परेश धनानी युवा हैं और राहुल गांधी से निकटता और अपनी मेहनत की बदौलत परेश बिहार जैसे राज्य के प्रभारी समेत झारखंड में नोटबंदी अभियान का सच लोगों तक पहुंचाने के लिए पर्यवेक्षक भी बनाए गए थे।

परेश भाई धनानी युवा होने के साथ ही पटेल समाज की समस्याओं पर दिल खोलकर बोलते हैं। लो प्रोफाइल रहने वाले परेश भाई अपने काम से कांग्रेस में एक अलग ही पहचान बना चुके हैं। इसलिए गुजरात में कांग्रेस से जुड़े लोग ये स्वीकार कर रहे हैं कि राहुल गांधी के युवा नेतृत्व में अगर कांग्रेस गुजरात चुनाव जीतने में सफल होती है तो परेश भाई धनानी सत्ता के शिखर पर दिखें तो इसमें किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए।

प्रचंड बीजेपी लहर में भी कांग्रेस से जीते थे धनानी- 

अमरेली विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र गुजरात विधानसभा में सीट नंबर 95 है. 1985, 1990 और 2007 में अमरेली सीट से दिलीप संघानी जीतते आ रहे थे. वहीं 1995 और 1998 में गुजरात बीजेपी के अध्यक्ष रहे पुरुषोत्तम रुपाला ने ये सीट जीती थी.

परेश धनानी ने 2002 में बीजेपी की प्रचंड लहर के बाद भी ये सीट कांग्रेस के लिए जीत ली थी, लेकिन 2007 में वो संघानी से 4000 वोटों से हार गए थे. 2012 में उन्होंने फिर से बीजेपी के बहुमत के बाद भी ये सीट जीत ली.  इस बार बीजेपी ने परेश भाई के खिलाफ यहां से बवकुभाई उधाड को प्रत्याशी बनाया है जो लाठी सीट से विधायक हैं.

संकट मोचक माने जाते हैं धनानी- 

पटेल नेता परेश धनानी को पार्टी में संकटमोचक माना जाता है. किसान परिवार से आने वाले परेश धनानी को राजनीति में लाने का श्रेय पूर्व केंद्रीय मंत्री मनुभाई कोटाडिया को दिया जाता है. अमरेली विधानसभा से साल 2002 में तत्कालीन कृषि मंत्री पुरषोत्तम रुपाला को हराकर उन्होंने प्रदेश की राजनीति में सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया था.

उस समय वो अमरेली जिले के युवा कांग्रेस के अध्यक्ष थे. धनानी गुजरात कांग्रेस के महासचिव रह चुके हैं. अभी वो अखिल भारतीय कांग्रेस में सचिव हैं. पाटीदार समाज से आने वाले धनानी राहुल गांधी के रोडशो में अहम भूमिका निभाते हैं. गुजरात राज्य सभा चुनाव के दौरान भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.

पादीदारो का गढ़ है अमरेली- 

अमरेली पाटीदारों का गढ़ है. 2012 में, बीजेपी ने सौराष्ट्र क्षेत्र में 54 में से 40 सीटें पाई थी और 12 सीटें कांग्रेस के खाते में आई थीं. देखना होगा कि पाटीदार आंदोलन के बाद बीजेपी को कितना नुकसान होता है.

हालांकि कांग्रेस ने निकाय चुनाव में बेहतर प्रदर्शन किया था. अमरेली विधानसभा क्षेत्र में 1 लाख से ज्यादा मतदाता हैं. परेश धनानी का कहना है, “बीजेपी के खिलाफ लोगों में गुस्सा है और यह गुस्सा चुनाव में नजर आ रहा है.”

पहले चरण में गुजरात की 89 सीटों पर मतदान आज हो गया है। बाकी बची सीटों पर 14 दिसंबर को मतदान होगा. इसके बाद 18 दिसंबर को इस बात का फैसला हो जाएगा कि गुजरात का ताज किससे सर सजेगा।

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