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PM मोदी का मित्र अंबानी को तोहफा, बनने से पहले ही जियो इंस्टिट्यूट को मिला उत्कृष्ट संस्थान का दर्जा

नई दिल्ली, नेशनल जनमत ब्यूरो। 

किसानों और गरीबों की सरकार होने का दावा करने वाली मोदी सरकार अपने उद्योगपति मित्रों को लेकर कितनी मेहरबान है, इस बात का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि सरकार ने उत्कृष्ट इंस्टीट्यूशंस की जो सूची जारी कि है उसमें रिलायंस के उस जियो इंस्टीट्यूट का भी नाम शुमार है जो अबी तक कागजों तक ही सीमित है।

इस बारे में फेसबुक यूजर महेन्द्र यादव लिखते हैं कि अभी तो आकाश अंबानी का जो बेटा होगा, उसे भी भारत रत्न इसी साल दे दिया जाएगा। पैदा बाद में कभी भी होता रहेगा।‌‌ ये एक बानगी भर है कि मुकेश अंबानी के जियो इंस्टीट्यूट को लेकर सोशल मीडिया में लोगों को किस तरह से गुस्सा है।

क्या है मामला ?

मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा सोमवार को 6 ऐसे संस्थानों की सूची जारी की गयी, जिन्हें मंत्रालय द्वारा इंस्टिट्यूशन ऑफ एमिनेंस (आईओई) का दर्जा दिया गया है. इनमें 3 निजी और 3 सरकारी संस्थान शामिल हैं, जिन्हें सरकार की ओर से विशेष फंड्स और पूर्ण स्वायत्तता दी जाएगी.

इस सूची में आईआईटी- दिल्ली और मुंबई के साथ रिलायंस फाउंडेशन के जियो इंस्टिट्यूट का भी नाम है जो अभी तक सिर्फ कागजों में ही है।   इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार यूजीसी ने प्रस्तावित 20 संस्थानों में से इन 6 संस्थानों को मंजूरी दी है.

अगस्त 2017 में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा यूजीसी के ‘इंस्टिट्यूशन ऑफ एमिनेंस डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी रेगुलेशन 2017 को मंजूरी दी गई थी. इसे लाने का उद्देश्य सरकार ने बताया था कि देश के 10 सरकारी और 10 निजी उच्च शिक्षा संस्थानों को विभिन्न सुविधाएं मुहैया करवाते हुए विश्व स्तरीय बनाया जाएगा क्योंकि शिक्षा संस्थानों की वैश्विक रैंकिंग में भारत का प्रतिनिधित्व बेहद कम है.

जीयो इंस्टीट्यूट पर क्यों उठे सवाल- 

सरकार द्वारा दिए जाने वाले आईओई के दर्जे के लिए केवल वही उच्च शिक्षा संस्थान आवेदन कर सकते हैं, जो या तो ग्लोबल रैंकिंग में टॉप 500 में आये हों या जिन्हें नेशनल इंस्टिट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ) में टॉप 50 में जगह मिली हो.

इसमें निजी संस्थान भी आईओई दर्जे में ग्रीनफील्ड वेंचर के बतौर जगह पा सकते हैं बशर्ते वे प्रायोजक अगले 15 सालों के लिए एक ठोस, विश्वसनीय योजना दे सकें.

अब सवाल इस बात पर उठ रहे हैं कि जो संस्थान अभी तक खुला ही नहीं वो कैसे ये सारे मानक पूरे कर सकता है ?

क्या है  इंस्टिट्यूशन ऑफ एमिनेंस – 

अगर अधिकारों की बात करें तो अन्य किसी उच्च शिक्षा संस्थान की तुलना में एक आईओई को ज्यादा अधिकार मिले होते हैं. उनकी स्वायत्तता किसी अन्य किसी संस्थान से कहीं ज्यादा होती है मसलन वे भारतीय और विदेशी विद्यार्थियों के लिए अपने हिसाब से फीस तय कर सकते हैं, पाठ्यक्रम और इसके समय के बारे में अपने अनुसार फैसला ले सकते हैं.

उनके किसी विदेशी संस्थान से सहभागिता करने की स्थिति में उन्हें सरकार या यूजीसी से अनुमति लेने की जरूरत नहीं होगी, केवल विदेश मंत्रालय द्वारा प्रतिबंधित देशों के संस्थानों से सहभागिता नहीं कर सकेंगे.

एक बार आईओई का दर्जा मिल जाने के बाद इनका लक्ष्य 10 सालों के भीतर किसी प्रतिष्ठित विश्व स्तरीय रैंकिंग के टॉप 500 में जगह बनाना होगा, और समय के साथ टॉप 100 में आना होगा.

विश्व स्तरीय बनने के लिए इन आईओई दर्जा पाए 10 सरकारी संस्थानों को मानव संसाधन और विकास मंत्रालय द्वारा स्वायत्तता तो मिलेगी ही, साथ ही प्रत्येक को 1,000 करोड़ रुपये भी दिए जाएंगे. निजी संस्थानों को सरकार की तरफ से किसी तरह की वित्तीय मदद नहीं मिलेगी.

केंद्रीय मंत्री जावड़ेकर ने ट्वीट किए ये नाम- 

सोमवार को प्रकाश जावड़ेकर के ट्वीट में आईओई दर्जा पाने वाले 6 संस्थानों में आईआईटी दिल्ली, आईआईटी मुंबई, इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस (आईआईएससी), बिट्स-पिलानी, मनिपाल अकादमी ऑफ हाई एजुकेशन और रिलायंस फाउंडेशन के जियो इंस्टिट्यूट का नाम है.

उठे सवालों के बाद मंत्रालय ने दी सफाई-

जियो इंस्टिट्यूट के चयन पर उठे सवालों के बाद सोमवार को मानव संसाधन और विकास मंत्रालय द्वारा एक बयान जारी किया गया और कहा गया कि इसका प्रपोजल सभी मानकों पर खरा उतरता है. इस कैटेगरी के लिए जमीन की उपलब्धता, एक अनुभवी और उच्च शिक्षित कोर टीम, फंडिंग और एक योजना का मानक तय है, जिन्हें यह इंस्टिट्यूट पूरा करता है.

विपक्ष ने शुरू की सरकार की घेराबंदी- 

कांग्रेस समेत तमाम लोगों ने ये सवाल उठाने शुरू किए कि ऐसा संस्थान जो अब तक खुला भी नहीं है, उसे उत्कृष्टता का दर्जा कैसे दिया जा सकता है. सरकार को यह बताना चाहिए कि किस आधार पर यह दर्जा दिया गया है.

सीताराम येचुरी ने ट्वीट कर कहा, ‘अब तक वजूद में ही नहीं आये विश्वविद्यालय को प्रतिष्ठित संस्थान का तमगा देना कार्पोरेट जगत के तीन लाख करोड़ रुपये के गैरनिष्पादित कर्ज की तरह है जिसे सरकार ने चार साल में उद्योगपतियों से अपनी मित्रता निभाने के एवज में बट्टेखाते में डाल दिया.’

सपा ने सरकार के इस फैसले को अंबानी बंधुओं से मोदी की नजदीकी का परिणाम बताया. सपा के राज्यसभा सदस्य जावेद अली खान ने कहा, ‘जियो के मालिक से प्रधानमंत्री के संबध जगजाहिर हैं. जियो के लिए मोदी जी पहले विज्ञापन भी कर चुके हैं. इसलिये इस फैसले से हमें कोई आश्चर्य नहीं है.’

 

 

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