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SC/ST एक्ट कमजोर करने वाले जस्टिस को मोदी सरकार ने रिटायरमेंट के दिन ही NGT का चेयरमैन बनाया

नई दिल्ली, नेशनल जनमत ब्यूरो। 

दलित समाज के हितों के लिए काम कर रहे संगठन और बुद्धिजीवी, एससी-एसटी को सुनियोजित तरीके से कमजोर करने का आरोप केव्द्र सरकार पर लगाते रहे हैं। लेकिन सरकार का कहना था कि ये कोर्ट का निर्णय है इसमें हमारा कोई हाथ नहीं।

अब एससी-एसटी एक्ट मामले की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई करने वाले जस्टिस आदर्श गोयल को नरेन्द्र मोदी सरकार ने रिटायरमेंट के तुरंत बाद ही महत्वपूर्ण पद से नवाज दिया है जिसे लेकर सोशल मीडिया पर सरकार की मंशा पर लोग सवाल उठा रहे हैं।

इस बारे में वरिष्ठ पत्रकार व सामाजिक चिंतक दिलीप मंडल लिखते हैं कि आपको यह जानकर कैसा महसूस होगा कि सुप्रीम कोर्ट के जिस जज ने उदय ललित के साथ मिलकर SC,ST एक्ट को बर्बाद कर दिया, उसे नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने बहुत बड़ा पुरस्कार दिया है. सबसे बड़ा पुरस्कार।

दरअसल जज आदर्श गोयल कल रिटायर हुए और कल ही सरकार ने उन्हें नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल का पांच साल के लिए चेयरमैन नियुक्त कर दिया है।  यह पूरी न्यायपालिका और नौकरशाही के लिए RSS-BJP की तरफ से संदेश है कि अगर आप बहुजन तबकों के खिलाफ काम करोगे, तो इनाम मिलेगा।

क्यों महत्वपूर्ण है ये पद- 

दिलीप मंडल कहते हैं नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल का चेयरमैन न्यायपालिका से रिटायर होने वालों के लिए सबसे मालदार पद है। क्योंकि यहां सारी कंपनियों के प्रोजेक्ट से जुड़े पर्यावरण संबंधी मामलों का निपटारा होता है। जमीन अधिग्रहण से लेकर जंगल कटने और नदियों के प्रदूषण समेत सारे मामले यहां आते हैं।

आप समझ सकते हैं कि यह कैसा पद है। इस पद पर रहते हुए मिस्टर गोयल अगले पांच साल तक सुप्रीम कोर्ट के जज की कोठी पर जमे रहेंगे। वेतन मिलता रहेगा। गाड़ी-स्टाफ-प्रोटोकॉल सब मिलता रहेगा।

उन्हें इस पद पर नियुक्त करने की सिफारिश सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने की, जिसे सरकार ने बिना देरी किए कल मान लिया. SC-ST एक्ट को बर्बाद करने का मोदी सरकार गोयल को इससे बड़ा इनाम नहीं दे सकती थी.

दिलीप मंडल अगली पोस्ट में लिखते हैं

जस्टिस आदर्श गोयल कौन है? 10 लाइन में समझिए- 

1. जस्टिस आदर्श कुमार गोयल RSS का आदमी है.

2. RSS के संगठन अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद के वे महामंत्री रहे। इस संगठन के पहले सम्मेलन का उद्घाटन RSS नेता दत्तोपंत ठेंगड़ी ने किया था.

3. केंद्र में जब अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार बनी तो गोयल के पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट का जज बनाने की सिफारिश की गई. इस समय तक गोयल दिल्ली और चंडीगढ़ में वकालत की प्रैक्टिस कर रहे थे.

4.आईबी रिपोर्ट में गोयल को भ्रष्ट बताया गया और उनके राजनीतिक संबंधों का जिक्र किया गया.

5. राष्ट्रपति के.आर नारायण ने फाइल लौटा दी.

6. वाजपेयी सरकार ने गोयल की फाइल दोबारा राष्ट्रपति के पास भेजकर उसे जज बना दिया.

7. नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद गोयल सुप्रीम कोर्ट के जज बने.

8. गोयल ने SC-ST एक्ट को बर्बाद कर दिया.

9. दहेज उत्पीड़न रोकने के कानून 498 A को गोयल ने कमजोर बना दिया.

10. रिटायरमेंट के दिन ही मोदी सरकार ने गोयल को पांच साल के लिए नेशलन ग्रीन ट्रिब्यून का चेयरमैन बनाकर उनके अब तक के काम का इनाम दिया.

राष्ट्रपति ने लौटा दी थी जज बनाने की फाइल- 

SC-ST एक्ट को बर्बाद करने वाले जज आदर्श गोयल को पहली बार जज अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने मई, 2001 में बनाया था. तब अरुण जेटली देश के कानून मंत्री थे.

पंजाब-हरियाणा हाइकोर्ट के लिए गोयल के नाम की सिफारिश आने के बाद IB जांच में गोयल को “भ्रष्ट” बताया गया. साथ में यह भी कहा गया कि गोयल RSS की संस्था अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद के महामंत्री रहे हैं और उनका स्पष्ट राजनीतिक जु़ड़ाव रहा है.

अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद का गठन 1992 में हुआ था और उसके उद्घाटन सम्मेलन में प्रमुख अतिथि RSS नेता दत्तोपंत ठेंगड़ी थे. बहरहाल, पांच जजों की नियुक्ति की लिस्ट जब मंजूरी के लिए राष्ट्रपति के.आर. नारायणन के पास गई तो उन्होंने गोयल की फाइल सरकार के पास लौटा दी.

लेकिन बीजेपी सरकार गोयल को जज बनाने पर उतारु थी. इस फाइल को दोबारा के.आर. नारायणन के पास भेजा गया. अरुण जेटली की टिप्पणी थी कि गोयल ईमानदार हैं.

दूसरी बार फाइल आने के बाद राष्ट्रपति महोदय के पास इसे मंजूर करने के अलावा कोई उपाय नहीं था. इसके बावजूद उन्होंने इस फाइल पर अपनी नाराजगी भी लिख दी.

उन्हें शायद अंदाजा था कि गोयल जैसे लोग जज बन गए तो देश में किस तरह का कोहराम मचेगा.

…और गोयल ने कोहराम मचा भी दिया.

 

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