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अगर ‘बलात्कार’ शब्द से आपका खून खौलता है, तो पढ़िए वीरांगना फूलन देवी पर लिखी ये कविता…

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो विश्व की प्रतिष्ठित मैगजीन टाइम ने दो बार सांसद रहीं फूलन देवी को विश्व की सर्वश्रेष्ठ विद्रोहिणी की श्रेणी में प्रमुखता से स्थान दिया था. देश से इस श्रेणी में ये एकमात्र नाम था. आज फूलन देवी हमारे बीच में नहीं है लेकिन अत्याचार का बदला लेने के लिए उठाए गए कदम को लोग आज…

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गरीबों की हर समस्या का समाधान है ‘योगा’ भूख लगी है योगा कर, कर्ज बहुत है योगा कर !

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो हाल ही में योगा दिवस बीता है.  और इसको लेकर राजनीति भी जमकर हो रही है. सोशल मीडिया पर योग को लेकर एक कविता इन दिनों वायरल हो रही है. आप भी इस कविता को पढ़िए. कविता के लेखक का नाम ज्ञात नहीं है. भूख लगी है? योगा कर! काम चाहिये? योगा कर! क़र्ज़ बहुत…

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जिस दिन भ्रम की पट्टी टूटी उस दिन तेरा क्या होगा…करारा जवाब है धर्मेन्द्र पटेल की कविता में

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो सरकार के रवैये के प्रति लोगों में रोष है. आम आदमी में हर सरकार में परेशान होता है. बीजेपी ने अतिश्योक्तिपूर्ण भाषणबाजी से लोगों के मन में इतनी आस जगा दी थी कि पूरे ना होने पर आस गुस्से में बदल गई है. सभी अपने-अपने ढ़ंग से ये गुस्सा जाहिर कर रहे हैं. पेशे से…

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अमेजॉन द्वारा महिला को ‘प्रोडक्ट’ बनाने के बाद महिलाओं से तीखा सवाल करती एक कविता

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो अमेज़न इंडिया ने अपनी साइट पर एक प्रोडक्ट रिलीज़ किया है. प्रोडक्ट क्या रिलीज किया है, निहायत ही घटिया स्तर की मार्केटिंग तकनीकि का इस्तेमाल किया है. जिसे लेकर देश की महिलाओं में काफ़ी गुस्सा है और इस गुस्से को सोशल मीडिया पर निकाल भी रही हैं. बहरहाल अब महिलाओं की मांग है कि अमेजन…

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अगर आप जुल्म के खिलाफ हैं तो पढ़िए वीरांगना फूलन देवी निषाद पर लिखी ये कविता…

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो @nationaljanmat विश्व की प्रतिष्ठित मैगजीन टाइम ने सांसद फूलन देवी निषाद को विश्व की सर्वश्रेष्ठ विद्रोहिणी की श्रेणी में रखा था. भारत की तरफ से इस श्रेणी में ये एकमात्र नाम था. आज फूलन देवी हमारे बीच में नहीं है लेकिन अत्याचार का बदला लेने के लिए उठाए गए कदम को लोग आज भी याद…

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सहारनपुर जातीय दंगों पर लिखी ये कविता आपके रोंगटे खड़े कर देगी…

सोशल मीडिया। नेशनल जनमत डेस्क  #धर्मयुद्ध —————– वो लुटेरों की तरह आए मगर लुटेरे नही थे. लुटेरों के भी कुछ उसूल होते है उन्होंने जानवरों की तरह शिकार किया मगर जानवर नही थे जानवरों के भी कुछ उसूल होते है मनुष्यता से रहित वो स्वघोषित श्रेष्ठ मनुष्य थे उन्होंने धर्म को ओढ़ा धर्म को पहना धर्म को बिछाया और धर्म…

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