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सहारनपुर जातीय दंगों पर लिखी ये कविता आपके रोंगटे खड़े कर देगी…

सोशल मीडिया। नेशनल जनमत डेस्क  #धर्मयुद्ध —————– वो लुटेरों की तरह आए मगर लुटेरे नही थे. लुटेरों के भी कुछ उसूल होते है उन्होंने जानवरों की तरह शिकार किया मगर जानवर नही थे जानवरों के भी कुछ उसूल होते है मनुष्यता से रहित वो स्वघोषित श्रेष्ठ मनुष्य थे उन्होंने धर्म को ओढ़ा धर्म को पहना धर्म को बिछाया और धर्म…

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