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भारत के सभ्य होने की राह में रोड़ा बन चुके अध्यात्म, अंधविश्वास, कर्मकांड का इलाज कैसे संभव है? (पार्ट-2)

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो  जानेमाने शोधार्थी और समाज विज्ञानी संजय श्रमण जोठे ने पहले पार्ट में लिखा था कि भारत का अध्यात्म असल में एक पागलखाना है, एक खास तरह का आधुनिक षड्यंत्र है, जिसके सहारे पुराने शोषक धर्म और सामाजिक संरचना को नई ताकत और जिन्दगी दी जाती है. पहले पार्ट को पूरा पढ़ें- भारत के सभ्य होने की राह…

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दरअसल हम अपने सम्प्रदाय, पंथ, मठ की मानसिक गुलामी को ही धर्म समझकर ‘केकड़ा’ बन बैठे हैं

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो  गुरमीत राम रहीम के करोड़ों शिष्य हैं। उनमें विज्ञान की पढ़ाई पढ़े हुए डाक्टर, इंजीनियर, आईएएस, आईपीएस, नेता, अफसर सभी हैं, वह शराबी, अय्याश, गुंडा और बलात्कारी था, उसे यह सभी बुद्धिमान लोग भगवान मानते थे। इन किताबी ज्ञान से पढ़े लिखे लोगों के मूर्ख बने रहने का सिलसिला कोई एक दो घंटे के लिए…

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समझिए इस कर्मकांडी देश में स्मार्ट सिटी का सपना क्यों कठिन है ?

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो। स्मार्ट सिटी का सपना भारत मे क्यों कठिन है ये समझना होगा। इस मुद्दे को आप भारत के धर्म की नागर जीवन के प्रति दी गयी सलाह को समझे बिना नहीं समझ सकते। मनुस्मृति, याज्ञवल्क्य स्मृति, आपस्तंब धर्मसूत्र सहित अन्य धर्म शास्त्रों में नगरीय जीवन की निंदा की गई है। वर्तमान इस्लामिक (अरबी) और ईसाई…

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