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कर्मकांड जो ज्यादा करता, समझो पिछड़ा है…. पढ़िए पिछड़ेपन की परिभाषा और कारण बताती एक कविता

नई दिल्ली, नेशनल जनमत ब्यूरो।  बौद्धिक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व पीसीएस अधिकारी राजकुमार सचान होरी एक कविता के माध्यम से बताने की कोशिश कर रहे हैं कि पिछड़ा कौन है। इस कविता के माध्यम से उन्होंने पिछड़ों की सोच को झकझोरने की कोशिश भी की है। कर्मकांड जो ज्यादा करता ,समझो पिछड़ा है । खेत किसानी में ही…

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पिछड़े वर्ग का तीसरा बौद्धिक सम्मेलन लखनऊ में कल (18 मार्च), देश भर से जुटेंगे सामाजिक चिंतक

लखनऊ, नेशनल जनमत ब्यूरो। वंचित वर्ग की बहुसंख्यक आबादी को वर्ण व्यवस्था के दकियानूसी फंदे में फंसाकर पढ़ने लिखने से दूर रखा गया ताकि वंचित वर्ग को उनके पुश्तैनी काम में उलझा दिया जाए। कुर्मी से खेती, नाई से बाल काटना, तेली को तेल निकालना, अहीर को दुग्ध व्यवसाय, गड़रिया को पशुपालन और काछी को सब्जी उगाने के काम में…

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पिछड़े वर्ग का तीसरा बौद्धिक सम्मेलन 18 मार्च को लखनऊ में, देश भर से जुटेंगे सामाजिक चिंतक

लखनऊ, नेशनल जनमत ब्यूरो।  जातिवाद के पुरोधाओं द्वारा वंचित वर्ग की बहुसंख्यक आबादी को धर्म की चासनी में लपेटकर पढ़ने लिखने से दूर रखा गया ताकि उनको वर्ण व्यवस्था के दकियानूसी फंदे में फंसाकर हर जाति को पुश्तैनी काम में उलझा दिया जाए। कुर्मी से खेती, नाई से बाल काटना, तेली को तेल निकालना, अहीर को दुग्ध व्यवसाय, गड़रिया को…

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पिछड़े वर्ग के चिंतकों, लेखकों, कवियों और पत्रकारों का दूसरा ‘बौद्धिक संघ सम्मेलन’ 28 को घाटमपुर में

नई दिल्ली, नेशनल जनमत ब्यूरो।  जातिवादियों द्वारा छद्म तरीके से वंचित वर्ग की बहुसंख्यक आबादी को पढ़ने लिखने से दूर रखा गया ताकि उनको वर्ण व्यवस्था के दकियानूसी फंदे में फंसाकर उनके पुश्तैनी काम में उलझाए रखा जाए। कुर्मी से खेती, नाई से बाल काटना, तेली को तेल निकालना, अहीर को दुग्ध व्यवसाय, गड़रिया को पशुपालन और काछी को सब्जी…

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लेखक-पत्रकार महाजुटान में कलमकारों का संकल्प, पिछड़ो को मानसिक गुलामी से मुक्ति दिला के रहेंगे

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो  पिछड़े वर्ग के लोगों ने अपनी-अपनी जातियों के नेताओं, अधिकारियों को तो खूब सम्मान दिया लेकिन असली मानसिक सम्पन्नता के सूत्रधार कवियों, लेखकों और पत्रकारों को उचित सम्मान कभी नहीं दे पाए। पिछड़ों की वैचारिक दरिद्रता का ये भी एक बड़ा कारण है। “जो जाति या वर्ग लेखन, पत्रकारिता, साहित्य में पीछे है वही पिछड़ा है…

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