रौबीली मूंछ वाले ‘द ग्रेट दलित’ चंद्रशेखर रावण का जातिवाद सरकार ने क्या हाल बना डाला, खड़े होइए, लिखिए, बोलिए

नई दिल्ली, नेशनल जनमत ब्यूरो।

चंद्रशेखर रावण और भीम आर्मी नाम तो याद होगा ना। रौबीली मूंछों वाला एक नौजवान जिसने दलितों में ‘द ग्रेट दलित’ लिखने का साहस जगाया। दलितों को सम्मान से सर उठाकर जीना सिखाया। आज वो नौजवान जातिवाद के खिलाफ लड़ने की सजा काट रहा है।

दलितों के मान, सम्मान, स्वाभिमान की लड़ाई लड़ रहा ये योद्धा जेल में बीमारी से लड़ रहा है। भूलिएगा मत इस रावण को वर्ना ये जातिवादी सरकारें और मनुवाद के पुरोधा उसको जेल में ही मरने पर विवश कर देंगे।

चंद्रशेखर की एक तस्वीर वायरल हो रही है इस तस्वीर में चंद्रशेखर एक कमजोर आदमी की तरह दिख रहा है। रौब से चलने वाला ये नौजवान आज व्हीलचेयर पर है। इस तस्वीर को देखकर सोशल मीडिया पर सामाजिक न्याय के योद्धाओं ने सरकार की आलोचना शुरू कर दी। वरिष्ठ पत्रकार व सामाजिक चिंतक दिलीप मंडल लिखते हैं कि-

शंबूक तो हर युग में मारा जाएगा. अध्ययन करने की उसकी हिम्मत कसे हुई. एकलव्य का अंगूठा तो कटकर रहेगा. वह स्पोर्ट्स का चैंपियन कैसे बन सकता है. रोहित वेमुला को मरना ही होगा. पीएचडी एंट्रेंस का टॉपर होने की उसकी हिम्मत कैसे हुई.

ऊना के दलितों की खाल तो खींची ही जाएगी, वे अपना काम करके पैसा कैसे कमा सकते हैं. मिर्चपुर में विकलांग लड़की सुमन को आग में जलकर मरना ही पड़ेगा, बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन पढ़ने की उसकी हिम्मत कैसे हुई….

चंद्रशेखर रावण के साथ यह हो रहा है. देश में लाखों लोगों के साथ यह हो रहा है, जिसकी हमें कई बार खबर तक नहीं होती. आप भी कहां तक बच लोगे. या तो खस्सी बन जाओ या मरो. रीढ़ की हड्डी निकाल लो, या फिर मरो.

यह ब्राह्मणवाद है. ये किसी को नहीं छोड़ते. कुचलकर मिटा देते हैं. ब्राह्मणवाद दुनिया की सबसे हिंसक विचारधारा है. ब्राह्मणवाद की ताकत यह है कि यह जिनको मारता है, उन लोगों को भी यह मीठा सा लगता है. बर्फ की छुरी की तरह यह कलेजे पर उतर जाती है और ठंडा सा एहसास होता है. फिर आप मर जाते हैं.

ब्राह्मणवाद ही तय करेगा कि आप अपने आदमी को भी अपना आदमी मानेंगे या अपना दुश्मन मानेंगे. यह आपके शरीर को नहीं, दिमाग को कंट्रोल करता है. आप सहमति से ब्राह्मणवाद का शिकार बनते हैं.

चंद्रशेखर रावण जैसे चंद मामलों में ही ब्राह्मणवाद अपनी हिंसा दिखाता है. बाकी मामलों में तो उसका काम अपने आप हो जाता है.

वहीं बिहार के सामाजिक साथी रिंकु यादव इस मुद्दे को जिंदा रखने की अपील करते हुए लिखते हैं कि-

भीम-आर्मी…
चंद्रशेखर रावण…
युवा-लोकतांत्रिक-दलित आवाज को खामोश करने की छूट कतई नहीं दे सकते !

लोकतंत्र को योगी-मोदी चोट दे रहा है,
भाजपा-आरएसएस निगल जाने को आगे बढ़ रहा है !

भाजपा विरोधी राजनीति का बड़ा रेंज है,
भाजपा को धूल चटाने के लिए मोर्चाबंदी का शोर है !

लेकिन चंद्रशेखर रावण की रिहाई की आवाज गुम है, क्यों?
क्या चंद्रशेखर की रिहाई के सवाल को भूलकर भाजपा को धूल चटाना है?

सवाल महज एक नौजवान का नहीं है !
सवाल केवल यूपी का नहीं है !
सवाल केवल दलित का नहीं है !

सवाल लोकतंत्र के भविष्य का है !
सवाल केवल भाजपा को हटाने भर का नहीं है !

देश में ‘जय भीम’ का नारा बुलंद करने वालों की भारी तादाद है !
‘जय भीम-लाल सलाम’ कहने वाले भी कम नहीं हैं!

क्या हम चुप रहेंगे?

कहीं से तो शुरुआत हो !

चंद्रशेखर रावण की रिहाई के लिए खड़े होईए, बोलिए, लिखिए !

चंद्रशेखर रावण को रिहा करो!
……..

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