योगीराज: पूर्व IPS व सामाजिक कार्यकर्ताओं के परिजनों को संपत्ति जब्त करने की धमकी देने का आरोप

लखनऊ, नेशनल जनमत ब्यूरो

पूर्व IPS अधिकारी एस आर दारापुरी व सामाजिक कार्यकर्ता सदफ़ जाफ़र ने योगी सरकार के अधिकारियों पर आरोप लगाया है कि उनके घर जाकर परिजनों को संपत्ति जब्त करने की धमकी दी जा रही है।

प्रदेश में सरकार की ज्यादतियों के खिलाफ लगातार आवाज बुलंद करने वाले 77 साल के मानवाधिकार व सामाजिक कार्यकर्ता एसआर दारापुरी ने बताया कि उनके घर जाकर अधिकारियों ने कहा है कि अगर वे सीएए विरोधी प्रदर्शन के दौरान हुई संपत्ति के नुकसान की भरपाई करने में असफल रहे तो उनकी संपत्ति जब्त कर ली जाएगी।

दरअसल दिसंबर 19 साल 2019 को लखनऊ में नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुआ था। इस दौरान कुछ सरकारी संपत्ति क्षतिग्रस्त हुई थी। जिसपर सरकार का दावा है कि ये नुकसान प्रदर्शनकारियों द्वारा किया गया है।

इसलिए सरकार ने प्रदर्शन में क्षतिग्रस्त हुई सरकारी संपत्ति के नुकसान की भरपाई के लिए प्रदर्शनकरियों से ही वसूली करने का फैसला किया था। इसी पर सामाजिक कार्यकर्ता के परिवार वालों ने यूपी सरकार पर आरोप लगाया है कि प्रशासन ने उनकी संपत्ति जब्त करने की घमकी दी है।

आपको बता दें कि दोनों सामाजिक कार्यकर्ता उन 57 लोगों में शामिल हैं, जो लखनऊ में सार्वजनिक संपत्ति के नुकसान के आरोपी हैं और इन सभी से 1.55 करोड़ के नुकसान की भरपाई करने के लिए कहा गया है जिसमें असफल होने पर उनकी संपत्तियां जब्त कर ली जाएंगी। इसी मामले में दारापुरी को 20 दिसंबर और जाफ़र को 19 दिसंबर को गिरफ्तार कर लिया गया था। हालांकि दोनों जमानत पर बाहर हैं।

दारापुरी के पोते सिद्धार्थ ने कहा, ‘बीते शुक्रवार को करीब 20 अधिकारी हमारे घर पर आए और हमें धमकाना शुरू कर दिया। उन्होंने हमसे पूछा कि दारापुरी जी कहां हैं। मेरे दादाजी यहां नहीं थे. उन्होंने कहा कि हम जहां रहते हैं वे उस संपत्ति को सील कर देंगे। उन्होंने हमारे घर, कारों के अलावा अधिकारियों के साथ हमारे चाचा की बातचीत का वीडियो बनाया’।

उन्होंने आगे कहा, ‘अगले दिन एक अन्य टीम हमारे घर आई और मेरे दादाजी के बारे पूछने लगी. उन्होंने कहा कि अगर दारापुरी जी उनसे नहीं मिलते हैं तो वे हमारे घर को जब्त कर लेंगे। हमने सभी नोटिसों का जवाब दिया जबकि प्रशासन ने हमारे किसी भी जवाब के बारे में कुछ नहीं कहा। मेरी दादी बहुत बीमार हैं। अगर वे हमें निकाल देंगे तो इस महामारी के दौरान हम कहां जाएंगे?’

वहीं, जाफ़र ने कहा कि पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की एक टीम चार जुलाई की दोपहर गोमती नगर इलाके में स्थित उनके घर आई. उन्होंने कहा, ‘उन्होंने मेरे बच्चों को डराया-धमकाया और पूरी बातचीत का वीडियो बनाया।’

दोनों घरों पर जाने वाली नायब तहसीलदार काकोरी महिमा मिश्रा ने कहा कि अधिकारियों ने परिवारों के साथ न तो दुर्व्यवहार किया और न ही धमकी दी।

उन्होंने कहा, ‘हम वहां गए क्योंकि उन्हें नोटिस दिया गया था और उन्हें दिया गया समय अब खत्म हो गया है। हमने बातचीत का वीडियो बनाया है ताकि कोई भी हम पर किसी भी तरह का आरोप न लगा सके।’

बता दें कि इस साल फरवरी में दिए गए आदेश में लखनऊ प्रशासन ने 28 लोगों को 19 दिसंबर, 2019 को सीएए-विरोधी प्रदर्शन के दौरान हजरतगंज इलाके में 6,337,637 रुपये के नुकसान की भरपाई के लिए कहा था.

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