क्या है आचार संहिता और क्या हैं इसके नियम? जानिए इस रिपोर्ट में

नूपेन्द्र सिंह

देश के 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, चुनाव आयोग द्वारा इन चुनावों की तारीखों के ऐलान करने के बाद से ही आचार संहिता लागू हो जाएगी। ऐसे में कुछ लोगों के सवाल होते हैं कि क्या होती है चुनाव आचार संहिता, क्यों लागू होती है और कब से कब तक लगी रहेगी? जानते हैं इन सभी सवालों के जवाब नेशनल जनमत की इस खास रिपोर्ट में।

क्या होती है चुनाव आचार संहिता और क्यों लागू होती है ?

आदर्श आचार संहिता राजनैतिक पार्टियों और चुनाव प्रत्याशियों के मार्गदर्शन के लिए तय किए गए कुछ नियम होते हैं, जिनका चुनाव के दौरान पालन किया जाना आवश्यक होता है. इन्हीं नियमों को आचार संहिता कहते हैं. इस दौरान राज नेताओं और मौजूदा जनप्रतिनिधियों पर कुछ पाबंदियां लग जाती है. लोक सभा चुनाव के दौरान यह पूरे देश में जबकि विधानसभा चुनाव के दौरान प्रदेश में लागू हो जाती है. आचार संहिता में निर्धारित किया जाता है कि राजनीतिक दलों, निर्वाचन लड़ने वाले अभ्‍यथियों और सत्ताधारी दल को निर्वाचन प्रक्रिया के दौरान कैसा व्‍यवहार करना चाहिए. इसमें बैठकें आयोजित करने, रैली, जुलूस, मतदान दिवस की गतिविधियां, सत्ताधारी दल के कामकाज से जुड़े नियम होते हैं.

कब से कब तक लागू होगी आचार संहिता

देश में लोकसभा के चुनाव हर पांच साल पर होते हैं. अलग-अलग राज्यों की विधानसभा के चुनाव अलग-अलग समय पर होते रहते हैं. चुनाव आयोग द्वारा इन चुनावों की तारीख की घोषणा के साथ ही आचार संहिता लागू हो जाती है.

आचार संहिता चुनाव प्रक्रिया के संपन्न होने तक लागू रहती है. चुनाव की तारीख की घोषणा के साथ ही आचार संहिता देश में लगती है और वोटों की गिनती होने तक जारी रहती है.

क्या होते हैं आचार संहिता के नियम

चुनाव आचार संहिता लागू होने के बाद कई नियम भी लागू हो जाते हैं.

इनकी अवहेलना कोई भी राजनीतिक दल या राजनेता नहीं कर सकता.

सार्वजनिक धन का इस्तेमाल किसी विशेष राजनीतिक दल या नेता को फायदा पहुंचाने वाले काम के लिए नहीं होगा.

सरकारी गाड़ी, सरकारी विमान या सरकारी बंगले का इस्तेमाल चुनाव प्रचार के लिए नहीं किया जायेगा.

किसी भी तरह की सरकारी घोषणा, लोकार्पण और शिलान्यास आदि नहीं होगा.

किसी भी राजनीतिक दल, प्रत्याशी, राजनेता या समर्थकों को रैली करने से पहले पुलिस से अनुमति लेनी होगी.

किसी भी चुनावी रैली में धर्म या जाति के नाम पर वोट नहीं मांगे जाएंगे.

कौन-कौन से काम नहीं होंगे?

चुनाव आयोग के अनुसार, सत्ताधारी पार्टी की संभावनाओं को बढ़ावा देने के लिए उपलब्धियों के संबंध में सरकारी कोष की लागत पर कोई भी विज्ञापन जारी नहीं हो सकते.

– सरकार के होर्डिंग, विज्ञापन आदि के बोर्ड हटा दिए जाएंगे. इसके अतिरिक्‍त, अखबारों और इलेक्‍ट्रॉनिक मीडिया सहित अन्‍य मीडिया पर सरकारी राजकोष के खर्चें पर कोई विज्ञापन जारी नहीं किया जाएगा।

– चुनाव के दौरान कोई भी जनप्रतिनिधि अनुदान या भुगतान नहीं कर सकते हैं.

– चुनाव की घोषणा से पहले जारी कार्य आदेश के संबंध में अगर क्षेत्र में वास्‍तविक रूप से कार्य शुरू नहीं किया गया है तो उसे शुरू नहीं किया जाएगा.

– ऐसे किसी भी क्षेत्र में जहां चुनाव चल रहे है, वहां निर्वाचन प्रक्रिया पूर्ण होने तक एमपी/एमएलए/एमएलसी स्‍थानीय क्षेत्र विकास फंड की किसा योजना के अंतर्गत निधियों को नए सिरे से जारी नहीं किया जाएगा.

– कोई भी मंत्री या अन्‍य प्राधिकारी किसी भी रूप में कोई वित्तीय अनुदान या उससे संबंधित कोई वायदा नहीं करेंगे. किसी परियोजना अथवा योजना की आधारशिला इत्‍यादि नहीं रखेंगे, या सड़क बनवाने, पीने के पानी की सुविधा इत्‍यादि उपलब्‍ध करवाने का कोई वायदा नहीं करेंगे. इसके अलावा सरकार या निजी क्षेत्र के उपक्रमों में तदर्थ आधार पर कोई नियुक्ति नहीं करेंगे.

– चुनाव अवधि के दौरान ऐसी योजनाओं के उद्घाटन/घोषणा पर प्रति‍बंध है. चाहे पहले से इसका काम हो चुका हो.

– संबंधित क्षेत्र में चुनाव प्रक्रिया के पूर्ण होने तक ऐसे मामलों पर कार्रवाई को आस्‍थगित किया जा सकता है और सरकार वहां अंतरिम व्‍यवस्‍था कर सकती है जहां यह अपरिहार्य रूप से आवश्‍यक हो.

बता दें कि इसके अलावा चुनाव प्रचार को लेकर भी कई तरह के नियम तय किए जाते हैं और नियमों के आधार पर ही प्रत्याशी चुनाव कर सकते हैं. इन नियमों में गाड़ी का इस्तेमाल, लाउडस्पीकर, पोस्टर, बैनर, खर्च आदि से जुड़ी जानकारी शामिल होती है.

आचार संहिता के उल्लंघन पर कार्रवाई

चुनाव आचार संहिता के नियम सख्ती से लागू होते हैं. अगर इन नियमों का उल्लंघन किया जाता है तो उसके लिए सज़ा का प्रावधान भी है. चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन पर दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है.

4 Comments

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