धार्मिक मुख्यमंत्री के राज में UP का स्वास्थ्य, नीति आयोग के सूचकांक में देश भर में सबसे खराब

नई दिल्ली, नेशनल जनमत ब्यूरो। 

जिस सरकार की प्राथमिकता धर्म और मंदिर हों उस सरकार से शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी आवश्यक जरूरतों की उम्मीद कैसे की जा सकती है ? उत्तर प्रदेश में धार्मिक मुख्यमंत्री की सरकार बनने के बाद उनके ही गृह जिले में सैकड़ों बच्चे ऑक्सीजन की कमी से मर गए।

इस बात पर अफसोस जताना तो दूर सरकार ने अपनी नाकामी को स्वीकार तक नहीं किया। लेकिन आंकड़े कभी झूठ नहीं बोलते उत्तर प्रदेश में गिरती स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में नीति आयोग का सूचकांक चीख-चीखकर बता रहा है।

नीति आयोग द्वारा शुक्रवार को देश भर के राज्यों का स्वास्थ्य सूचकांक जारी किया गया। इसमें बड़े राज्यों में उत्तर प्रदेश सबसे निचले पायदान पर रहा है जबकि केरल शीर्ष पर रहा।

केरल के बाद पंजाब, तमिलनाडु और गुजरात को रखा गया है. इस सूचकांक में सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को जगह दी गई है। सूचकांक के लिहाज से खराब प्रदर्शन करने वाले राज्यों में उत्तर प्रदेश के बाद राजस्थान, बिहार व ओडिशा का नंबर आता है।

मिजोरम व केरल पहले स्थान पर- 

वहीं, अच्छा प्रदर्शन करने वाले छोटे राज्यों में मिजोरम पहले स्थान पर है. उसके बाद मणिपुर व गोवा हैं. वहीं, केंद्र शासित प्रदेशों में लक्षद्वीप अव्वल रहा।

21 बड़े राज्यों में श्रेष्ठ आने वाले केरल को 76.55 अंक मिले जबकि अंतिम पायदान पर रहे उत्तर प्रदेश को 33.69 अंक मिले। उत्तर प्रदेश का यह स्कोर बड़े व छोटे राज्यों और सभी केंद्र शासित प्रदेशों में न्यूनतम है।

बड़े राज्यों की बात करें तो अच्छा प्रदर्शन करने के मामले में दूसरे पायदान पर रहने वाले पंजाब को 65.21 अंक मिले हैं तो तीसरे पायदान पर रहे तमिलनाडु को 63.38 अंक मिले हैं।

वहीं, निचले से दूसरे पायदान पर रहने वाले राजस्थान को 36.79 अंक मिले हैं और तीसरा बुरा प्रदर्शन करने वाले बिहार को 38.46 अंक दिए गए हैं।

नीति आयोग द्वारा जारी ‘हेल्दी स्टेट्स प्रोग्रेसिव इंडिया’ नामक यह रिपोर्ट 2015-16 की अवधि के लिए तीन श्रेणियों बड़े राज्य, छोटे राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में देश को विभाजित करते हुए बनाई गई थी.

यह रिपोर्ट राज्य और केंद्रशासित प्रदेशों कीसरकारों द्वारा स्वास्थ्य क्षेत्र में किए गए प्रदर्शन का आकलन करने और उसे रैंक देने की केंद्र सरकार की एक कवायद है।

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