योगीराज में किसानों के साथ कर्जमाफी के नाम पर भद्दा मजाक, किसी को मिले 9 पैसे तो किसी को 50 पैसे

नई दिल्ली/लखनऊ। नेशनल जनमत ब्यूरो।

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान बीजेपी ने सूबे के किसानों का क़र्ज़ माफ करने का वादा किया था। जिसके बाद उन्हें यूपी विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक कामयाबी मिली। भाजपाइयों के झूठे वादों को जनता समझ नहीं पाई और उसने बीजेपी की झोली वोटों से भर दी।

पीएम मोदी ने भी यूपी के किसानों को लॉलीपॉप देते हुए कहा था कि अगर बीजेपी की सरकार यूपी में आई तो पहली ही कैबिनेट मीटिंग में प्रदेश के किसानों का कर्ज माफ किया जाएगा।

योगी सरकार ने सत्ता में आते ही छोटे और मंझोले किसानों को एक लाख रुपये तक का लोन माफ करने का ऐलान भी कर दिया। इसका पहला चरण पूरा हो चुका है, लेकिन ऋण माफी के बाद कई किसानों को लगता है कि उनके साथ मजाक हो गया है।

पूरे प्रदेश के किसानों की स्थिति ये है कि उन पर कर्ज तो काफी ज्यादा था, लेकिन किसी को 9 पैसे, किसी के 1 रुपये 80 पैसे, किसी के 1 रुपये 50 पैसे और किसी के 18 रुपये माफ किए गए हैं। ये सभी लोग सरकार के ऐलान और मंशा पर सवाल उठा रहे हैं।

यूपी चुनावों के बाद सरकार वादे पर खरी उतरी और उसने कर्जमाफी में लिमिट का खेल कर दिया। अब किसानों के कर्ज तो माफ हो रहे हैं लेकिन कितने कर्ज माफ हो रहे हैं इसे देखकर किसानों पर तरस जरूर आएगा। सरकार ने निश्चित रूप से लघु सीमांत किसानों के साथ भद्दा मजाक किया है।

हमीरपुर

बुंदेलखंड के हमीरपुर में बेहद चौंकाने वाले मामले भी सामने आए हैं। जहां, कुछ किसानों का 10 रुपये से लेकर 215 तक का कर्ज माफ किया गया है। बता दें कि हमीरपुर जिले में कुछ किसानों को बकायदा कार्यक्रम में बुलाकर 10 रुपये से लेकर 215 तक का कर्जमाफी का प्रमाणपत्र दिया गया। ऐसे में सवाल यह उठता है कि इतनी कम राशि के लिए किसानों को क्यों परेशान किया जा रहा है।

बिजनौर का उदाहरण देखिए- 

बिजनौर का उदाहरण समझिए। यहां ऋण मोचन योजना में किसी किसान के 9 पैसे तो किसी किसान के 84 पैसे का कर्ज माफ हुआ है। पहले चरण में 22156 किसानों का ऋण माफ हुआ है। इतना ही नहीं जिले के कई किसानों पर 2 रुपये व 3 रुपये तक का कर्ज माफ हुआ।

हिंदुस्तान अखबार ने जिला कृषि अधिकारी डॉ. अवधेश मिश्र के हवाले से कुछ आंकड़े जारी किए हैं। जिनमें न्यूनतम माफी वाले किसानों की ऋणमुक्ति के बारे में बताया गया है। ये हैं नौ पैसे से 57 रुपये तक की कर्जमाफी वाले किसानों के नाम….

वहीं धनपुरा गांव के किसान शिवपाल को जो प्रमाण पत्र सौंपा गया उसमें उसके किसान क्रेडिट कार्ड में 20 हजार 271 रुपए माफ करने की बात कही गई थी। किसान ने बताया कि उसके ऊपर बैंक का 93 हजार रुपया का ऋण है। लेकिन उसका कुल 20 हजार 271 रुपए माफ किया जा रहा है।

सबसे भद्दा मजाक महिला किसान शांति देवी के साथ हुआ। उमरी गांव की रहने वाली शांति के ऊपर 1.55 लाख रुपए का ऋण था। शांति का पुत्र प्रमाण पत्र लेने आया था, जिसे देखने के बाद वो सिर पकड़कर बैठ गया।

उसे महज 10 रुपए 37 पैसे माफ करने का प्रमाण पत्र सौंपा गया था। दूसरा किसान उमरी गांव का मुन्नीलाल था। मुन्नीलाल के ऊपर बैंक का 40 हजार रुपए का ऋण था। लेकिन उसे 215 रुपए माफी का प्रमाण पत्र सौंपा गया।

पढ़िए, RSS का असली ‘राष्ट्रवाद’ और घोर संघी स्वयंसेवक के सपनों का भारत कैसा होगा ?

BJP-RSS को धर्म से नहीं जाति से पकड़िए, RSS को हिन्दुवादी कहने से उसका जातिवादी चरित्र छुप जाता है

25 सवाल जिनको सुनते ही RSS को सांप सूंघ जाता है, पढ़िए संघी क्यों घबराते हैं इन सवालों से ?

पढ़िए RSS का पांच सूत्रीय राजनीतिक एजेंडा, जिसे हर हाल में लागू करना BJP की प्राथमिकता है !

ये कैसी राष्ट्रभक्ति? RSS को सरदार पटेल ने तिरंगे को राष्ट्रध्वज मानने पर मजबूर किया था

“गर्व से कहो हम हिन्दू हैं”, मैं RSS से पूछता हूं पिछड़े किस बात पर हिन्दू होने का गर्व करें ?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Share
Share