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सेल्फी की नौटंकी तक सिमटा स्वच्छ भारत अभियान, PM आवास से महज 50 मीटर दूर नारकीय जीवन जी रहे लोग

नई दिल्ली।  नेशनल जनमत ब्यूरो।

लगता है पीएम मोदी का पूरे जोर-शोर के साथ शुरू किया गया स्वच्छ भारत अभियान सिर्फ मंत्रिमंडल और पीएम को खुश करने में लगे दर्जनों सेलिब्रिटी की सेल्फी तक सीमित हो गया है. ये हम नहीं कह रहे बल्कि जमीनी हकीकत खुद बयां कर रही है. पीएम आवास से महज 50 मीटर दूर बस्ती का हाल देखकर तो आप भी मान लेंगे कि स्वच्छ भारत अभियान फोटो खिंचाने तक ही सीमित रह गया है.

50 मीटर  दूर की बस्ती ने खोली पोल- 

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एक तरफ पीएम मोदी पूरे भारत में घूम-घूमकर स्वच्छ भारत अभियान की तारीफ में कसीदें गढ़ रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर पीएम मोदी के आवास यानि 7 रेस कोर्स के गेट से महज 50 मीटर की दूरी पर बने बीआर कैम्प में गंदगी का साम्राज्य फैला हुआ है. हालत ये है कि इस कैम्प में सीवर लाइन का पानी सड़कों पर बह रहा है. चारों तरफ गंदगी ही गंदगी दिखाई दे रही है. और लोग इस गंदे, बदबू भरे माहौल में जीने को मजबूर हैं.

400 परिवार और 2000 लोग रहते हैं इस नर्क में- 

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हैरत की बात ये है कि इस कैम्प में रहने वाले 400 परिवारों और 2000 लोगों का जीवन तीन साल पहले तक ऐसा नहीं था. अब तो हाल ये है कि सीवर की बदबू और चारों तरफ फैली गंदगी में ये लोग जीवन जीने को मजबूर हैं लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का स्वच्छता अभियान पहुंचना तो दूर इस बस्ती को छूकर भी नहीं गुजरा है.

रात में घरों में घुसता है सीवर का पानी- 

बदबूदार और गंदे पानी के किनारे कपड़े धुल रही सुमन ने बोली क्या करें आपको बताकर अब तक पचासों लोगों को बता चुके हैं लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है. थोड़ा और कुरेदने पर सुमन ने अपना दर्द बयां किया. सुमन बोली रात में सोने समय मन में हमेशा डर लगा रहता है कि कहीं बारिश ना हो जाए और सीवर से पूरा घर भर जाए. वैसे तो हफ्ते में दो चार दिन तो ऐसा होता ही है जब बिना बारिश के ही सीवर का पानी घर में भर जाता है. सुबह बाल्टी से उस गंदे बदबूदार पानी को निकालते हैं. अब तो हमें आदत ही पड़ गई है इस गंदगी और बदबू को सहने की इसलिए यहां कपड़े धुलने और बदबू में खाना बनाने खाने में हमें कोई दिक्कत नहीं.

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बारिश में नर्क बन जाता है बीआर कैम्प

बीआर कैम्प के राजेश का कहना है कि अभी कुछ दिन बाद बारिश शुरू होने वाली है. बारिश के मौसम में यहां का जीवन नरक में बदल जाता है. सीवर लाइन के पानी में बारिश का पानी मिल जाता है और हम लोगों की मजबूरी है कि हमें उसी पानी से होकर निकलना पड़ता है. हमें इस बात का डर रहता है कि कहीं खेलते हुए बच्चे ना सीवर में गिर जाएं, वैसे ऐसा कई बार हो भी चुका है.

दिल्ली रेस क्लब के अधिकारियों की मनमानी – 

बीआर कैम्प से सटा हुआ है रहीशों का चर्चित दिल्ली रेस क्लब. रेस क्लब के पदाधिकारियों ने क्लब की बाउंड्री से किनारे-किनारे जा रही बस्ती की पाइप लाइन को ब्लॉक करा दिया है इतनाा ही नहीं कई पाइपों को उखाड़ कर फिकवा दिया है ऐसे में पूरी बस्ती का पानी बाहर निकल ही नहीं पाता. अब तीन सालों से हालात ये हैं कि पानी बस्ती के अंदर ही भरता रहता है और एनडीएमसी से लेकर पुलिस विभाग रसूखदारों के आगे हमारी सुनने को तैयार नहीं.

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यूपी के सीएम योगी की इस तस्वीर पर लोगों ने इनाम घोषित कर दिया था. 

सीएम योगी आदित्यनाथ की इस तस्वीर को लेकर सोशल मीडिया में लोगों ने खूब मजाक उड़ाया था. यहां तक फोटो को डालकर लोगों ने इनाम तक घोषित कर दिया था. फेसबुक, व्हाट्सअप पर  फोटो को डालकर लोगों ने लिखा इस फोटो मेंं अगर कूड़ा कोई ढूंढ दे तो उसे ईनाम दिया जाएगा. आप खुद देखिए स्वच्छ भारत अभियान का तस्वीर में कैसे मजाक उड़ाया जा रहा है.

पत्तियां साफ करते रहे पीएम मोदी- 

आपको ये तस्वीर भी अच्छी तरह याद होगी जब पीएम मोदी ने स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत करते हुए एनडीएमसी के साथ मिलकर दिल्ली की वाल्मीकि बस्ती में जाकर बिखरी हुई पत्तियों पर झाड़ू लगाई थी. गौरतलब है कि इलाके को साफ करने के बाद पीएम की सफाई के लिए अलग से पत्तियां बिखेर दी गईं थी . इसके बाद तो भाजपा नेताओं में भी साफ जगह पर भी पेड़ के पत्ते बिखेरकर झाड़ू से साफ करते हुए फोटो खिचाने की होड़ लग गई.

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सफाई कर्मियों को आधुनिक उपकरण दिए बिना नहीं सफल हो सकता अभियान- 

जानकारों का मानना है कि सिर्फ हाथ में झाडू लेकर फोटो खिचाने से स्वच्छ भारत अभियान सफल नहीं हो सकता. जब तक देश के सफाई कर्मियों को आधुनिक उपकरण उपलब्ध नहीं कराऐं जाएंगे तब तक पीएम मोदी के सारे प्रयास बेकार हैं. इसके अलावा सफाई कर्मियों को एक सम्मानजनक जीवन जीने का पैसा भी इस रोजगार में सुनिश्चित किए जाने की जरूरत है.

एक ही जाति के जिम्मे सफाई का जिम्मा क्यों- 

देश के लिहाज से सबसे बड़ी बात ये है कि इस धंधें से एक जाति के लोगों को काम में लगाए जाने की प्रथा और मानसिकता समाप्त किए जाना चाहिए. हालांकि यूपी में सफाई कर्मियों की भर्ती में ब्राह्मणों की भर्तियां भी हुई हैं लेकिन गांव के जातिवादी माहौल से मैला ढ़ोने और एक ही जाति के सफाई करने की प्रथा का अंत देश की तरक्की के लिए बहुत जरूरी है.

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