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पढ़िए गणेश का इंटरव्यू करने वाले एबीपी न्यूज के भूमिहार पत्रकार का जातिवादी चरित्र

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो 

बिहार के टॉपर गणेश का इंटरव्यू करके नीतीश कुमार और पूरी बिहार सरकार को बदनाम करने वाले उत्कर्ष सिंह एबीपी न्यूज के पत्रकार है. उन्होंने गणेश का इंटरव्यू लिया इस पर किसी को ऐतराज नहीं. हां उनके प्रायोजित सवालों पर सवाल खड़े हो सकते हैं लेकिन उनके इंटरव्यू लेने पर किसी को ऐतराज नहीं हैं.

  लेकिन यहां जानना जरूरी है भूमिहार जाति से ताल्लुक रखने वाला पत्रकार उत्कर्ष सिंह खुद कितनी बुरी तरह से जातिवाद से घिरा हुआ है. आईआईएमसी के 2015-16 बैच का स्टूडेंट रहा उत्कर्ष आईआईएमसी में भी दलितों और सवर्णों के बीच कटुता बोता रहा है.

आईआईएमसी में रहने के दौरान ही उत्कर्ष सिंह की शिकायत आईआईएमसी के छात्र प्रशांत कनौजिया ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग में भी की थी. जहां अभी उत्कर्ष सिंह के खिलाफ जांच लंबित है.

 

सोशल मीडिया पर इस शख्स के जातिवादी चरित्र को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं- 

अपने फेसबुक पर सवाल उठाते हुए एक्टीविस्ट अरविंद शेष लिखते हैं कि

एक जानकारी चाहिए-

‘बिहार टॉपर’ गणेश कुमार का इंटरव्यू लेने वाले एबीपी न्यूज के संवाददाता उत्कर्ष सिंह क्या आइआइएमसी के स्टूडेंट रहे हैं?

क्या ये वही हैं जिन्होंने आइआइएमसी में दलितों और महिलाओं के खिलाफ घृणा से भरी हुई और आपराधिक टिप्पणी की थी?

इसके बाद निकलकर आता है इस शख्स की जातिवादी सोच

आप भी पढ़िए इस शख्स ने अफनी फेसबुक पर क्या लिखा था. जिसके बाद इसकी शिकायत पत्रकार और तबके आईआईएमसी के छात्र प्रशांत कनौजिया ने एससी कमीशन में की थी तो अभी लंबित है.

 इस शख्स की पोस्ट को आप गौर से देखें तो आपको इसमें भयानक जातिवाद तो दिखेगा ही साथ ही रंडी रोना शब्द इस शख्स की स्त्री विरोधी सोच को दर्शा रहा है. आप सोचिए इस शख्स को सोच ही ऐसी दी गई है. इसके बाद ये शख्स आरक्षण के लिए भीख और मलाई शब्द प्रयोग करता है. जबकि ये देश के प्रतिष्ठित पत्रकारिता संस्थान का छात्र था. कोई गले मोहल्ले का लफंगा नहीं जो कुछ भी भाषा प्रयोग करता है.
पत्रकार और आईआईएमसी के पूर्व छात्र सरोज कुमार लिखते हैं-

इसका चेहरा मुझे इस वजह से याद है कि जब एक दलित सफाई कर्मचारी महिला के रेप के केस में विरोध प्रदर्शन करने पहुंचे थे तो यह बंदा हमारे ही विरोध में उतर आया था और बाकियों को भड़का रहा था

राजेन्द्र आर्य लिखते हैं- 

मतलब यह अपनी दिमागी गंदगी के साथ पहुंचा था इंटरव्यू करने। कुछ साबित करने

संविधान ने दिया है आऱक्षण का अधिकार उसको भीख कहना संविधान विरोध- 

भारतीय संविधान के आर्टिकल 14,15,16 के तहत अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़े वर्गों को आरक्षण का प्रावधान किया गया है. सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट नितिन मेश्राम कहते हैं कि संविधान में प्रत्येक व्यक्ति के जीवन स्तर को बेहतर करने के लिए और गैरबराबरी को दूर करने के लिए आरक्षण की व्यवस्था की गई है. ये कोई खैरात नहीं है ना ही भीख है. ये वंचितों का हक है जो डॉ. भीमराव अंबेडकर के प्रयासों और बाद में मंडल कमीशन की रिपोर्ट के आधार पर वंचितोंं को मिला है. इस संवैधानिक निर्णय को भीख और मलाई कहने वाले शख्स को जातिवादी और संविधानविरोधी ना कहा जाए तो फिर क्या कहा जाए.

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