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जाट महासभा का ऐलान, ब्राह्मणवादी तीर्थ यात्रा बंद करेंगे, बीजेपी-कांग्रेस दोनों को ही वोट नहीं देगे

नई दिल्ली/राजस्थान, नेशनल जनमत ब्यूरो। 

सदियों के चली आ रही मानसिक गुलामी को बेड़ियों को तोड़कर पिछड़े वर्ग के विभिन्न समुदाय अब ब्राह्रणवादी संस्कृति से बाहर निकलने के लिए छटपटा रहे हैं। महात्मा ज्योतिबा फुले ने बहुचर्चित ‘गुलामगिरी’ पुस्तक में लिखा भी है कि जब तक गुलाम को अपनी गुलामी का अहसास ही नहीं होगा वो अपनी आजादी के लिए प्रयास भी नहीं करेगा।

बाबा साहेब को मानने वाले दलितों को इस गुलामी का अहसास बहुत पहले हो गया था लेकिन अब समय के साथ खेती-किसानी कम होने और नौकरी को समाज में सम्मानित स्थान मिलने की वजह से क्षत्रित्व का लवादा ओढ़े पिछड़ों को भी अहसास हो रहा है कि कि शारीरिक रूप से ना सही लेकिन मानसिक रूप से वो ब्राह्मणवादी सिस्टम में फंसकर अपना बहुत कुछ गवां चुके हैं।

आदर्श जाट महासभा राजस्थान व वीर तेजा सेना के तत्वाधान में 23-24 सितंबर को पुष्कर अजमेर में आयोजित राष्ट्रीय जाट चिंतन शिविर में जो प्रस्ताव पारित किए गए हैं। वो इसी जागरूकता और सामाजिक न्याय के बढ़ते दायरे का एक उदाहरण नजर आता है-

महत्वपूर्ण प्रस्ताव- 

1-.ब्राह्मणवादी तीर्थ यात्राओं को बंद करेंगे व वीर तेजाजी धाम खरनाल, धन्ना भगत, सांपला व सिरसौली की यात्रा करेंगे व जाट के युवाओं को इन चारों धाम के इतिहास से रूबरू होने के लिए प्रेरित करेंगे एक जाट पर्यटन सर्किट विकसित करेंगे।

2-सिख, विश्नोई बंधुओं की तरह ब्राह्मणवादियों के लिए घर के दरवाजे बंद करने की मुहिम चलाएंगे व हर जाट को इसके लिए समझाकर राजी करेंगे।

3-कांग्रेस-बीजेपी के टिकट पर जो भी जाट चुनाव के मैदान में उतरेगा उसको हम वोट नहीं देंगे।जब किसानों की जमीन छिनने का SIR कानून पास हुआ तो एक भी विधायक ने मुंह नहीं खोला।

4.पाखंड व अंधविश्वास को छोड़ने से जो भी बचत होगी वो कौम के गरीब बच्चों की शिक्षा के लिए तेजा फाउंडेशन में जमा करवाएंगे।

5.कौम की बेटियों की पढ़ाई पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

अब विस्तार से पढ़िए जो प्रस्ताव पास किए गए- 

A)सामाजिक मंथन

1.नशा-शराब व अफीम का जिस समारोह में प्रयोग होता हो उस समारोह में शरीक नहीं होंगे।किसी शराब पिये हुए व्यक्ति से कोई बात नहीं करेंगे।

2.दहेज प्रथा का विरोध नहीं, देने वालों का मनोबल गिराएंगे।बिना दहेज की शादियों को प्रोहत्सान देंगे व उनका प्रचार-प्रसार करेंगे।

3.मृत्यु-भोज में कभी शामिल नहीं होंगे और घर से आयोजन न करने की शुरुआत करेंगे।

4.कौम के बुजुर्गों के अलावा किसी के चरण स्पर्श/पाँवा धोक नहीं करेंगे।

5.भारत माता की जय के बजाय भारत भूमि की जय बोलेंगे।

सांस्कृतिक चिंतन- 

1.हमारे पुरखों की सनातन जाट परंपराओं के हिसाब से त्यौहार मनाएंगे।

2.त्यौहारों के समय मिठाई घर मे उपलब्ध माल से बनाएंगे।

3.अपने पुरखों की पूजा करेंगे व उसके लिए घर मे उपलब्ध माल/मिठाई से करेंगे।बाजार से कोई त्यौहारों पर व पूजा के लिए कोई चीज नहीं खरीदेंगे।

4.ब्राह्मणवादी तीर्थ यात्राओं को बंद करेंगे व वीर तेजाजी धाम खरनाल,धन्ना भगत,सांपला व सिरसौली की यात्रा करेंगे व जाट के युवाओं को इन चारों धाम के इतिहास से रूबरू होने के लिए प्रेरित करेंगे एक जाट पर्यटन सर्किट विकसित करेंगे।

5.सिक्ख,विश्नोई बंधुओं की तरह ब्राह्मणवादियों के लिए घर के दरवाजे बंद करने की मुहिम चलाएंगे व हर जाट को इसके लिए समझाकर राजी करेंगे।

C) राजनैतिक- 

1.कांग्रेस-बीजेपी के टिकट पर जो भी जाट चुनाव के मैदान में उतरेगा उसको हम वोट नहीं देंगे।जब किसानों की जमीन छिनने का कानून पास हुआ तो एक भी विधायक ने मुंह नहीं खोला।

2.जो नेता कमेरे वर्ग के मौजिज लोगों को साथ लेकर विकल्प उपलब्ध करवाते है तो उसका समर्थन करेंगे।

3.किसान समाज की छात्र राजनीति को किसान-कमेरी राजनीति की विचारधारा के रूप में स्थापित करेंगे।

4-किसान-दलित-मुस्लिमों को राजनैतिक रूप से एकजुट करने की मुहिम घर-घर तक चलाएंगे।

5.हर युवा को राजनैतिक रूप से जागरूक करेंगे।वीर तेजा सेना के रूप में हमारी कौम की राजनैतिक युवा विंग स्थापित करेंगे।

D) शैक्षणिक- 

1.कौम के युवाओं को निशुल्क प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए हर जिले में कोचिंग संस्थान की स्थापना करेंगे।

2.शिक्षा के लिए तेजा फाउंडेशन ही कोर संगठन रहेगा।तेजा फाउंडेशन के तहत जयपुर से “उड़ान”कोचिंग की शुरुआत की जा चुकी है।

3.तहसील या जिला स्तर पर जो भी पहले संस्थान चल रहे है वो तेजा फाउंडेशन से मान्यता प्राप्त प्रमाण पत्र जरूर ले।

4.पाखंड व अंधविश्वास को छोड़ने से जो भी बचत होगी वो कौम के गरीब बच्चों की शिक्षा के लिए तेजा फाउंडेशन में जमा करवाएंगे।

5.कौम की बेटियों की पढ़ाई पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

अपनी आवाज, अपना मीडिया- 

सबसे ज्यादा फोकस मीडिया मैनेजमेंट पर रहेगा। हमारे कमेरे वर्ग की आवाज उठाने वाले राष्ट्रीय, राज्यस्तरीय इलेक्ट्रॉनिक व प्रिंट मीडिया का समर्थन करेंगे। कमेरे वर्ग का नया मीडिया स्थापित करने वाले लोगों का हम समर्थन करेंगे /सहयोग करेंगे। जब तक एक मजबूत मीडिया खड़ा न हो जाये तब तक सोशल मीडिया का भरपूर उपयोग करेंगे।

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