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40 हजार लंबित नौकरियों की मांग को लेकर अधीनस्थ सेवा आयोग पहुंचे छात्र-छात्राओं को योगी पुलिस ने खदेड़ा

लखनऊ, नीरज भाई पटेल (नेशनल जनमत) 

सरकार बनने से पहले किए गए वायदे और घोषणाओं की सरकार बनने के बाद क्या अहमियत होती है। ये नजारा सोमवार को लखनऊ के पिकअप भवन स्थित अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ऑफिस में छात्र-छात्राओ के प्रदर्शन के दौरान देखने को मिला।

उ.प्र. अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के छात्रों ने पिछली सरकार के दौरान निकाली गई भर्तियों की लंबित प्रकियाओं को पूरी करने की मांग को लेकर पिकप भवन का घेराव किया। लेकिन शांतिपूर्ण तरीके से धरने पर बैठे छात्रों को पुलिस ने डरा-धमकाकर लाठियां भांजकर वहां से भगा दिया।

पूर्ववर्ती अखिलेश सरकार के दौरान उ.प्र. अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने ग्राम विकास अधिकारी के 16400 पद, कनिष्ठ सहायक के 13000 पद, सहायक लेखाकार के 11000 पदव उर्दू अनुवादक, गन्ना पर्यवेक्षक के मिलाकर तकरीबन 40 हजार पद निकाले थे।

इन सभी पदों की भर्ती प्रक्रिया 80 प्रतिशत तक पूरी भी कर ली गई थी। लेकिन सरकार बदल गई। योगी सरकार ने आते ही 29 मार्च 2017 को बिना कोई कारण बताए छात्रों का साक्षात्कार रोक दिया।

छात्रों का आरोप राजनीतिक रस्साकसी में फंस रहे हैं छात्र- 

उ.प्र. अधीनस्थ सेवा प्रतियोगी मोर्चा के संयोजक कासिफ सिद्दिकी ने बताया कि भर्तियो का विज्ञापन जनवरी 2016 में जारी हुआ, मई से टेस्ट, शारीरिक परीक्षा सम्पन्न हुई, दिसंबर माह से साक्षात्कार प्रारम्भ हुआ। 29 मार्च 2017 को चल रहे साक्षात्कारों पर रोक लगाकर योगी सरकार ने छात्रों के भविष्य पर भी पहरा बैठा दिया।

साथ ही अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड के अध्यक्ष व सदस्यों को हटा दिया गया जबकि 80% भर्ती प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी। भर्ती शुरू कराने को लेकर प्रतियोगी छात्रो ने लखनऊ में कई बार ज्ञापन दिए मुख्यमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन किए लेकिन भर्तियों की विजिलेंस जांच की बात कहकर सरकार पल्ला झाड़ती रही।

दिसंबर से लगातार चल रहा है प्रदर्शन- 

बीते साल 20 दिसंबर, 26 दिसंबर के बाद इसी साल 8 जनवरी, 16 जनवरी को इलाहाबाद जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन किया और 19 जनवरी 2018 को मुख्यमंत्री के इलाहाबाद आगमन पर बालसन चौराहे पर सामूहिक उपवास के बाद गिरफ्तारी दी गई।

इसके बाद सरकार ने 22 जनवरी को अधीनस्थ सेवा चयन आयोग का पुनर्गठन करके हुए अध्यक्ष व सदस्यों की नियुक्ति की प्रतियोगियो को लगा कि अब उनके अच्छे दिन आने वाले हैं।

लेकिन 31 जनवरी को बैठक में लम्बित भर्ती का मामला न उठने और नई भर्ती कराने के निर्णय से प्रतियोगी छात्र-छात्राओं को आन्दोलन करने के लिए बाध्य होना पड़ा।

चेयरमैन सीबी पालीवाल ने थमाया आश्वासन-  

पूरे प्रदेश से सैकड़ों की संख्या में जुटे छात्रों ने तकरीबन 3 घंटे तक पिकप भवन के मुख्य द्वार की सीढ़ियों पर बैठकर प्रदर्शन किया। सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

इसके बाद पांच छात्रों को बातचीत के लिए आयोग के चेयरमैन सीबी पालीवाल ने वार्ता के लिए बुलाया। वार्ता में शामिल रहे कासिफ सिद्दीकी ने बताया कि हाईकोर्ट में सरकार ने एक बार भी नहीं कहा कि भर्तियों की जांच कराई जा रही है, कोर्ट में सरकार हमेशा कहती रही कि चेयरमैन और सदस्यों के ना होने से भर्ती प्रक्रिया रुकी है।

लेकिन अब चेयरमैन के आने के बाद भी उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ की जा रही है। उन्होंने बताया कि चेयरमैन ने फिर वही बात दोहराई जांच चल रही है कि लेकिन मैं इस मामले में मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश से बात करूंग नहीं तो आप लोग कोर्ट जाने के लिए स्वतंत्र हैं।

इच्छा मृत्यु की मांग- 

इलाहाबाद से अखिलेश सिंह, वाराणसी से आए संजीत कुमार, जौनपुर से आए रामभरत यादव, प्रमोद समेक सैकड़ों छात्रों ने कहा कि सरकार यदि लम्बित भर्ती प्रक्रिया प्रारम्भ कराने की बात पर ठोस आश्वासन नही देती तो सभी प्रतियोगी भाई-बहन सरकार से इच्छामृत्यु की माँग करेंगे और गोमती नदी में आत्मदाह करने के विवश होंगे।

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