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गुजरात: रोड शो के बाद अब रैली में CM योगी की फजीहत, 100 लोग भी सुनने नहीं आए, खाली रहीं कुर्सियां

नई दिल्ली, नेशनल जनमत ब्यूरो। 

हार्दिक पटेल, जिग्नेश मेवाणी और अल्पेश ठाकोर ने गुजरात में बीजेपी की नाक में दम कर रखा है। कांग्रेस से ज्यादा बीजेपी के लिए ये तिकड़ी मुसीबत का सबब बनी हुई है। जनता की सम्मिलित ताकत के कारण इस बार का विधानसभा चुनाव बीजेपी के लिए पहले की तरह आसान नहीं रह गया।

गुजरात चुनाव में चल रहे शह और मात के खेल के बीच यूपी के धार्मिक मुख्यमंत्री आदित्यनाथ और पीएम मोदी के रोड शो को लोगों ने सिरे से खारिज कर दिया था। अब एक बार फिर जामनगर में योगी आदित्यनाथ की एक सभा में खाली कुर्सियां देखी गईं।

27 नवंबर को पीएम की रैली में नहीं आई थी भीड़- 

गुजरात विधानसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ताबड़तोड़ रैल‍ियां कर रहे हैं। सोमवार (27 नवंबर) को उन्‍होंने सौराष्ट्र के जसदण में भी एक चुनावी रैली की थी। सौराष्ट्र क्षेत्र की एक रैली में पीएम मोदी की रैली में खाली पड़ी कुर्सियां लोगों के बदलते मूड का संकेत मानी जा रही हैं।

गुजरात में विधानसभा चुनाव के लिए सभी पार्टियां जमकर प्रचार में लगी हुई हैं। यहाँ तक की राज्य के बाहर से नेताओं को बुलाकर प्रचार किया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के साथ-साथ केंद्र के 30 मंत्री भी गुजरात पहुंचे हुए हैं।

अब भाजपा के फायरब्रांड नेता और उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी प्रचार के लिए गुजरात पहुँच गए हैं। लेकिन जिस तरह गुजरात को भाजपा का घर माना जाता है उस तरह से भाजपा नेताओं को जनता का प्यार राज्य में नहीं मिल रहा है। योगी आदित्यनाथ के साथ भी यही हुआ है।

सोशल मीडिया पर राज्य की जामनगर विधानसभा की तस्वीरें वायरल हो रही हैं जिसमें योगी आदित्यनाथ की सभा में कुर्सियां खाली पड़ी नज़र आ रही हैं। जबकि मंच पर योगी बैठे दिख रहे हैं। इसको लेकर लोग ट्वीट भी कर रहे हैं। कई लोग योगी की इस सभा पर व्यंग भी कस रहे हैं।

कुमार किशन भी चुटकी लेते हुए लिखते हैं, “लाखों गुजराती योगी जी की जामनगर रैली में उन्हें सुनने आए हैं।” ये पहली बार नहीं है जब योगी को गुजरात में जनता ने इतनी ठंडी प्रतिक्रिया दी हो। इससे पहले योगी गुजरात में गौरव यात्रा के लिए आए थे लेकिन तब भी उनकी यात्रा में जनता नदारद रही थी।

उत्तरप्रदेश के बाहर लगातार मिल रही ठंडी प्रतिकिर्याएँ ये भी दिखाती हैं कि अभी योगी इतने बड़े नेता नहीं हुए हैं जो उन्हें अलग-अलग राज्यों में भाजपा स्टार प्रचारक बनाएं।

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