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लालू की रैली में अखिलेश और मायावती आएंगे एक साथ, मोदी की बेचैनी बढ़ी

नई दिल्ली। सोबरन कबीर यादव

राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव की 27 अगस्त को होने वाली रैली में बसपा अध्यक्ष मायावती और सपा के अध्यक्ष अखिलेश यादव के एक मंच पर एक साथ आने से केन्द्र की सत्तारूढ़ भाजपा की चिंता बढ़ गई है. बीजेपी की परेशानी ये है कि इस मंच पर ऐसा कुछ घटित होने जा रहा है जो पिछले 20 साल में नहीं घटा है. सपा और बसपा के रिश्तों में बीते 22 साल से जमी बर्फ अब पिघल रही है. बदलते हालात में सपा और बसपा एक मंच पर आकर मोदी की अगुवाई वाली भाजपा को चुनौती दे सकते हैं.

लालू यादव बन गए हैं सपा और बसपा के बीच के कड़ी-

यूपी में सपा और बसपा को एक साथ लाने में लालू यादव अहम भूमिका निभा रहे हैं. लालू यादव ने यूपी विधानसभा चुनाव में भी दोनों दलों को मिलकर चुनाव लड़ने की सलाह दी थी , पर उस समय बात नहीं बन पाई थी. पर यूपी चुनाव में सपा और बसपा की बुरी तरह से हुई हार ने दोनों दलों को एक बार फिर से सोचने को मजबूर कर दिया है.

बहुजन समाज के लोगों का दोनों दलों के नेताओं पर है भारी दबाव-

आपको बता दें कि यूपी में भाजपा की जीत से बहुजन समाज में भारी निराशा फैल गई है. बाकी रही सही कसर सहारनपुर दंगों ने और दलित और पिछड़ी जातियों के खिलाफ बढ़ते अपराधों ने यूपी में बीजेपी के प्रति पिछड़ी और दलित जातियों के गुस्से को औऱ बढ़ा दिया है. ऐसे मे दलित और पिछड़ी जातियां चाहती हैं कि सपा और बसपा के नेता अपने आपसी मतभेद भुलाकर एक मंच पर आ जाऐं, ताकि बीजेपी को चुनौती दी जा सके. इसीलिए दलित और पिछड़ी जातियों के सामाजिक चिंतक अपने नेताओ पर साथ आने का दबाव बना रहे हैं.

पिछले 20 साल में पहली बार सपा और बसपा नेता आ रहे हैं एक मंच पर

जो पिछले 20 साल में नहीं हुआ वो अब होने जा रहा है. गेस्ट हाउस कांड के बाद सपा-बसपा के रिस्तों में आई कड़वाहट की बर्फ अब समय के साथ पिघल रही है. अब दोनों दलों के नेता मंच साझा करने को तैयार हो गए हैं.

सपा – बसपा के साथ आने से भाजपा नेताओ की बैचेनी बढ़ी

लालू की रैली में सपा और बसपा के नेताओं के एक मंच पर आने से भाजपा के नेताओं के चेहरे पर शिकन आ गई है. भाजपा यूपी में दलित और पिछड़ी जातियों के वोटों का बंटवारा करके चुनाव जीतने की जुगत भिड़ा रही थी पर अब सपा और बसपा के एक साथ आने से दलित और पिछड़ी जातियों का वोट नहीं बटेगा, जिससे भाजपा के चुनाव जीतने की रणनीति फेल हो सकती है.

अगर सपा – बसपा ने मिलकर चुनाव लड़ा तो साफ हो जाएगी भाजपा

राजनीतिक जानकारों की माने तो यदि यूपी में सपा-बसपा मिलकर चुनाव लड़ती हैं तो आगामी लोकसभा चुनाव में भाजपा का यूपी से लगभग सूपड़ा साफ हो जाएगा. और यूपी में चुनाव हारते ही भाजपा की केन्द्र मे सरकार बनाने की योजना धरी की धरी रह जाएगी.

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