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क्या अखिलेश औऱ शिवपाल के बीच झगड़े की जड़ में ये मिश्रा तिकड़ी है !

लखनऊ। नेशनल जनमत ब्यूरो।

समाजवादी पार्टी का बंटाधार करने और करवाले में इन ब्राह्मण युवा नेताओं का बहुत बड़ा हाथ रहा है. ये सब एक स्ट्रेटजी के तहत दो चार लोहिया, जयप्रकाश नारायण और मधुलिमए की किताब लेकर सपा में घुसते हैं और फिर अपनी जड़ें अखिलेश, मुलायम और शिवपाल के पास मजबूत बनाने में लग जाते हैं.

अब पिछले 10 साल से आज तक की हकीकत भी देख लीजिए। समाजवादी पार्टी में तीन मिश्रा ने ऐसा जाल बुना की मुलायम सिंह यादव के जिंदगी की पूरी राजनीति पस्त हो गई . बड़े बड़े को राजनीति में मात देने वाले मुलायम सिंह यादव की पार्टी को ये मिश्रा की तिगड़ी चौपट कर गई.

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1- दीपक मिश्रा (ये सारे पद दीपक मिश्रा के हैं- सचिव-इंटरनेशनल सोशलिस्ट काउन्सिल, अध्यक्ष-समाजवादी चिंतन/बौद्धिक सभा, सम्पादक- अनुचिंतन) साभारः फेसबुक

दीपक मिश्रा ने खुद को सपा में स्थापित करने के लिए राम मनोहर लोहिया पर किताबों को लिखने और शिवपाल यादव को उन किताबों का संपादक बनाने का सहारा लिया. राम मनोहर लोहिया ही सपा की मजबूती और मजबूरी थे, इस मजबूती के रास्ते दीपक सपा में ऐसे घुसे कि शिवपाल यादव को कई किताबों का संपादक तक बना दिया. हालांकि सपा के लोग ही बताते हैं कि शिवपाल यादव खुद नहीं जानते होंगे कि उन्होंने कितनी किताबें लिखीं.

शिवपाल यादव के साथ हमेशा रहने वाले दीपक मिश्रा जब सपा में सियासी संग्राम चरम पर था और शिवपाल यादव पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष थे तो दो महीने के लिए प्रवक्ता भी बनाए गए थे, लेकिन जब फिर से अखिलेश गुट हावी हुआ, तो वह क्लीन बोल्ड हो गए. आजकल शिवपाल यादव की ओर से सपा के राज्यसभा सांसद राम गोपाल यादव को ही चिट्ठी लिखकर जवाब मांग रहे हैं कि आपने क्या क्या गुनाह किया है. दीपक मिश्रा को सपा में स्थापित करने में ब्राह्मण पत्रकारों का काफी योगदान रहा. इसको लेकर लखनऊ के कथित तौर पर शीर्षस्थ पत्रकार बता सकते हैं. वह गुट बनाकर मुलायम से लेकर शिवपाल यादव तक वाहवाही कर उन्हें मजबूत करते रहे हैं.

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2- मणेंद्र मिश्रा ‘मशाल’

जैसे ही दीपक मिश्रा अखिलेश यादव से दूर हुए एक और मिश्रा मणेंद्र ‘मशाल’ ने अखिलेश यादव के चारों तरफ घूमने फिरने, आभामंडल बनाने की जिम्मेदारी संभाल ली. अखिलेश यादव के ऊपर किताब लिखने वाले मणेंद्र अपने फेसबुक अकाउंट पर लिखते हैं कि मेरा सपना है कि एक दिन समाजवादी अध्ययन केंद्र पूरे देश में लोहिया और समाजवादी धारा के लिए एक समृद्ध केंद्र के रूप में गतिशील रहे. वह खुद को समाजवादी अध्ययन केंद्र का संस्थापक बताते हैं.

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वह इस संगठन के नाम से मुलायम सिंह यादव, अखिलेश यादव और अन्य कई नेताओं की तस्वीर लगाकर अपनी पहुंच को मजबूत बना रहे हैं। मणेंद्र ‘मशाल’ ने राजेंद्र चौधरी और अखिलेश यादव के चारो ओर वह घेरा बना दिया है जहां ब्राह्मणवाद ही चढ़कर बोलता है। उनकी फेसबुक प्रोफाइल https://www.facebook.com/marinder.mishra पर जाकर काफी कुछ समझा जा सकता है।

मणेंद्र मिश्रा ‘मशाल’ की भाषा और खबरों को लेकर उनकी समझ जानने के लिए यह वीडियो भी आप देख सकते हैं. मणेंद्र को यशभारती पुरस्कार भी मिला है.

ये पोस्टर मणेंद्र मिश्रा मशाल के फेसबुक वाल से ही दिए जा रहे हैं. मणेंद्र कितने बड़े लेखक हैं। इन पोस्टरों की भाषा और मात्राओं से समझा जा सकता है. फिर कहा तो यह भी जाता है कि भी मणेंद्र राजेंद्र चौधरी की खबरों को लिखने का काम करते हैं.

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3- प्रो. अभिषेक मिश्रा

मिश्रा की तिकड़ी में अभिषेक मिश्रा तीसरे नंबर पर हैं। पहली बार विधायक बने अभिषेक मिश्रा अखिलेश सरकार में प्रोटोकाल मंत्री रहे हैं. लखनऊ से लोकसभा चुनाव लड़ चुके अभिषेक मिश्रा को नफीसा अली से भी कम वोट मिला था. इसके बाद वह विधानसभा चुनाव तक हार गए. फिर भी अखिलेश यादव के मुंहलग नेताओं में शामिल हैं. कहा जाता है कि मिश्रा जी जो कह देंगे अखिलेश यादव वही करते हैं . इस बार विधानसभा चुनाव में बुरी तरह हारने वाले नेताओं में अभिषेक मिश्रा का भी नाम है. चुनाव के दौरान तो हालात यहां तक रहे कि न तो वह खुद और न ही उनके कार्यकर्ता वोट मांगने तक कई क्षेत्रों में नहीं निकले.

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समाजवादी पार्टी के एक बड़े नेता डरते हुए नाम न छापने की शर्त पर बताते हैं कि मिश्रा नेताओं की ये तिकड़ी पूरी समाजवादी पार्टी को बर्बाद कर देगी. ये तीनों नेता अपनी-अपनी डाल को पकड़ लिए हैं. वह अपनी रोटी सेंक रहे हैं. यह नेताओं की आंख पर पट्टी बांधकर राजनीति करने को मजबूर कर देते हैं. इस नेता का यह भी कहना है कि मिश्रा की यह तिकड़ी अखिलेश यादव और शिवपाल यादव के पास पिछड़ी/दलित या मुस्लिम नेताओं को फटकने नहीं देती है.

साभार : फर्क इंडिया बेवसाइट

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