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सुलह के आसार खत्म, जल्द ही मुलायम-शिवपाल करेंगे नई पार्टी की घोषणा !

नई दिल्ली/लखनऊ, नेशनल जनमत ब्यूरो।

समाजवादी पार्टी के वास्तविक शुभचिंतकों को बहुत दिनों से इंतजार था कि दोनों धड़े किसी ना किसी दिन एक हो जाएंगे। पार्टी में सब कुछ पहले जैसा हो जाएगा, लेकिन दोनों खेमों से अच्छी खबर आती नहीं दिख रही। दोनों तरफ से मिल रहे संकेतों से साफ है कि समाजवादी पार्टी में अब सुलह के कोई आसार नहीं।

यूपी चुनाव में बीजेपी से बुरी तरह मात खाने के बाद अलग-अलग पार्टी बनाने पर विराम लग गया था लेकिन अब एक बार फिर से समाजवादी पार्टी के भीतर सरगर्मी बढ़ गई हैं। ये कहा जा रहा है कि जल्द ही नेताजी, अपने भाई शिवपाल यादव के साथ नई पार्टी या नए मोर्चे की घोषणा कर सकते हैं।

कन्नौज में दिए थे संकेत- 

दो दिन पहले शिवपाल सिंह यादव ने कन्नौज में इस बात को और हवा दे दी। शिवपाल सिंह ने कहा था कि सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव का अपमान अब बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। बताते चलें यूपी विधानसभा चुनाव के बाद शिवपाल यादव पार्टी और परिवार के झगड़े के बाद एकदम दरकिनार कर दिए गए हैं। समाजवादी पार्टी में वह सम्मान वापसी की राह तलाश रहे हैं।

वहीं सूत्रों के मुताबिक, अखिलेश यादव और उनके समर्थक किसी भी तरह उनपर भरोसा करने को तैयार नहीं हैं। जिसके चलते वह सपा संरक्षको को आगे करके कोई नया दांव खेलना चाहते हैं। 20 सितंबर को समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव लखनऊ में प्रेस कांफ्रेंस करेंगे।

लोहिया ट्रस्ट में शक्ति प्रदर्शन-

वहीं 21 तारीख को सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव और शिवपाल यादव ने लोहिया ट्रस्ट की बैठक बुलाई है। मालूम रहे कि अखिलेश और रामगोपाल दोनों ही लोहिया ट्रस्ट के सदस्य हैं। हालांकि लोहिया ट्रस्ट में मुलायम सिंह के करीबियों की ही चलती है। ऐसे में अखिलेश और रामगोपाल बैठक में शामिल होंगे या नहीं इस पर सबकी निगाहें रहेंगी।

लोहिया ट्रस्ट में अखिलेश के जो भी लोग सदस्य थे, उन सबको शिवपाल यादव पहले ही बाहर का रास्ता दिखा चुके हैं। माना जा रहा है कि अखिलेश के बचे खुचे लोगों को भी मुलायम और शिवपाल अब ट्रस्ट से बाहर का रास्ता दिखा सकते हैं।

अखिलेश यादव ने लखनऊ के रमाबाई अंबेडकर मैदान में 23 सितंबर को समाजवादी पार्टी का प्रादेशिक सम्मेलन बुलाया है और 5 अक्टूबर को आगरा में समाजवादी पार्टी का राष्ट्रीय अधिवेशन बुलाया गया है।

राजनीतिक जानकारों की मानें तो इन बैठकों के जरिये अखिलेश यादव पार्टी में अपनी पकड़ को मजबूर करके अपने अध्यक्ष होने पर एक बार फिर राष्ट्रीय अधिवेशन की मुहर लगाना चाहते हैं। सूत्रों के अनुसार अधिवेशन के लिए जो निमंत्रण भेजे जा रहे हैं उनमें मुलायम सिंह का चित्र गायब है और पोस्टर में भी वो नजर नहीं आएंगे।

इसका मतलब साफ है कि मुलायम और शिवपाल यादव अलग पार्टी या मोर्चा गठित करेंगे जिसकी भनक अखिलेश को पहले लग चुकी है।

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