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छाती पीटकर भाषण देने से नहीं होगा PM साहब, ‘शांत’ मनमोहन सिंह के समय में नहीं हुआ कोई अमरनाथ हमला

नई दिल्ली । नेशनल जनमत ब्यूरो।

इसे संयोग कहें, पीएम मोदी की राजनीतिक विफलता या सांप्रदायिक राजनीति का खेल हकीत यही है कि पूर्व पीएम मनमोहन सिंह की सरकार में अमरनाथ यात्रा पर कोई आतंकी हमला नहीं हुआ। आंकड़े बता रहे हैं कि जब-जब केंद्र में भाजपा की सरकार बनी है अमरनाथ यात्रा पर हमले शुरू हो गए हैं। इससे पहले प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई की सरकार के दौरान भी अमरनाथ यात्रा पर चार बार हमले हुए थे जिनमें सुरक्षा बलों के जवान समेत कई श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी।

कांग्रेस के शासन में अमरनाथ पर कोई हमला नहींं- 

आपको ये जानकर हैरानी होगी कि साल 2004 में अटल बिहारी की सरकार के बाद मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने। लेकिन उनके कार्यकाल में अमरनाथ यात्रा पर कोई हमला ही नहीं हुआ। साल 2004 से साल 2017 तक अमरनाथ यात्रा पर कोई भी आतंकी हमला नहीं हुआ। पर अब आतंकियों ने मोदी सरकार की सुरक्षा व्यवस्था में सेंध लगाते हुए अमरनाथ यात्रा पर अटैक करके सरकार को खुली चुनौती दे डाली है।

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पीएम नवाज शरीफ के घर दावत खाते हैं- 

एक तरफ पीएम मोदी पाकिस्तान के साथ अच्छे सम्बंधों का हवाला देकर नवाज शरीफ के घर पर दावत खाते हैं तो वहीं दूसरी तरफ सीमा पार से लगातार हमारे पाकिस्तान हमारे सैनिकों की हत्या कर रहा है।अब पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठनों ने अमरनाथ यात्रा पर हमला करके भारत-पाकिस्तान के संबंधों में पहले से ही मौजूद दरार को और चौड़ा कर दिया है।

आपको बता दें कि अमरनाथ यात्रा पर आंतकी हमले से सारे देश में पीएम मोदी की रक्षा नीति पर सवाल खड़े हो गए हैं। लोगों का कहना है कि पीएम मोदी की पाकिस्तान को लेकर तैयार की गई रणनीति फेल हो चुकी है। हालत ये है कि जो आतंकी कल तक पाकिस्तान पर ही हमले कर रहे थे वो आज फिर से भारत पर हमले करने लगे हैं।

बीजेपी के शासन काल में ही क्यों होते हैं हमले- 

वैसे इस बात की भी सोशल मीडिया पर जमकर चर्चा हो रही है कि आखिरकार भाजपा के शासन में आंतकी हमले बढ़ क्यों जाते हैं। क्या सुरक्षा व्यवस्था को चाक चौबंद रखने का भाजपा के पास पर्याप्त अनुभव नहीं है। चाहे संसद भवन या अक्षरधाम मंदिर पर हमला हो या फिर लाल किले पर हमला ये सारे हमले भाजपा की सरकार के रहते ही हुए हैं। इसके अलावा अटल बिहारी सरकार के दौरान अमरनाथ यात्रा पर तो चार-चार हमले हुए।

हर आतंकवादी हमले के बाद सरकार ने आम जनता को या तो आश्वासन दिया या मुआवजा या फिर दोनों। मगर किसी भी सरकार ने वजह नहीं बताई। सरकार ने सिर्फ ठोस कदम उठाने का वादा किया। भले ही वो पठानकोट हमला हो, गुरदासपुर हमला या उड़ी हमला या अमरनाथ यात्रियों पे हमला।

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अटल बिहारी सरकार के दौरान अमरनाथ यात्रा पर हुए हमले

साल 2000 में भी हुआ था अमरनाथ यात्रा पर हमला

यह पहली बार था  जब अटल बिहारी वाजपेई सरकार में  अमरनाथ यात्रा पर आतंकी हमला हुआ था.  इस हमले में 30 यात्रियों की मौत हो गयी थी. उस वक्त केंद्र में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार थी.

साल 2001 में जब केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली सरकार थी तब अमरनाथ यात्रियों पर हुआ आतंकी हमला आखिरी था। 17 साल ऐसा कुछ नहीं हुआ।

21 जून 2001 को अनंतनाग के निकट हुई आंतकी घटना में 6 तीर्थयात्रियों समेत 13 लोगों की मौत हुई थी। जिसमें 2 पुलिस वाले भी शामिल थे। आतंकियों ने यात्रा के रास्ते में लैंड माइन से धमाका कर और गोलीबारी कर यात्रियों पर हमला किया था। यह घटना पवित्र गुफा से महज 19 किमी दूर हुई थी। इस जगह पर बड़ी मात्रा में सुरक्षा इंतजाम थे। इस आतंकी घटना के बाद यात्रा स्थगित कर दी गई थी। जब ये हमला हुआ था उस वक्त तकरीबन 3 हजार अमरनाथ यात्री शेषनाग में रात्रि विश्राम कर रहे थे।

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वर्ष 2002- अमरनाथ यात्रा पर हुए दो अलग अलग हमलों में कुल दस श्रद्धालु मारे

वर्ष 2003- आतंकवादियों ने अमरनाथ यात्रा में शामिल होने वालों को सीधे निशाना तो नहीं बनाया लेकिन यात्रा के दौरान ही कटरा में वैष्णो देवी के आधार शिविर पर हमला कर आठ श्रद्धालुओं को मार डाला और टांडा में सेना के एक ब्रिगेडियर को भी मार डाला।

साल 2003 के बाद से साल 2017 तक कोई भी आतंकी हमला नहीं हुआ था पर अब आतंकवादियों ने नरेन्द्र मोदी की सरकार में अमरनाथ यात्रा पर आतंकी हमला करके मोदी सरकार को खुली चुनौती दे दी है।

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