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अंबेडकर के नाम में UP सरकार ने रामजी जोड़ा, JDU का हमला, योगी अपना नाम ठाकुर अजय सिंह बिष्ट क्यों नहीं लिखते?

लखनऊ, नेशनल जनमत ब्यूरो। 

एक साल से ऊपर समय बीत गया लेकिन उत्तर प्रदेश के धार्मिक मुख्यमंत्री के खाते में हासिल उपलब्धि शून्य ही रही। ऐसे में उत्तर प्रदेश सरकार ने अपने एजेंडे पर लौटते हुए बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर का ही ‘रामकरण’ करने आदेश दे दिया।

विपक्ष ने एक सुर में इस मुद्दों को राजनीति से जोड़ते हुए कहा ‘भाजपा 2019 के चुनावों से पहले अपना खुद का एजेंडा खड़ा करना चाहती है. वे मतदाताओं को यह तक बताने की कोशिश कर सकते हैं कि आंबेडकर भी राम भक्त थे.’

बिहार में बीजेपी के सहयोगी नीतीश कुमार की जेडीयू के विधायक और राष्ट्रीय महासचिव श्याम रजक ने भी उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा लिए गए निर्णय की आलोचना की है.

रजक ने आंबेडकर के नाम में रामजी जोड़े जाने को साजिश करार दिया है और कहा है कि मनुवादी सोच के लोगों द्वारा देश में आवश्यक एजेंडे को बदलने के कुचक्र के तहत ऐसा किया जा रहा है.

योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधते हुए रजक ने कहा कि कि योगी आदित्यनाथ पहले अपना असली नाम ठाकुर अजय सिंह बिष्ट का इस्तेमाल क्यों नहीं कर रहे?

दलितों को भटकाने का प्रयास है – 

श्याम रजक ने कहा, ‘यूपी सरकार द्वारा डा. अांबेडकर के संबंध में अधिसूचना मनुवाद का एजेंडा लागू करने का प्रयास है. यह दलितों को अपने अधिकार के लिए संघर्ष करने के एजेंडे से भटकाने का प्रयास है.

बाबा साहेब के नाम में से केवल ‘रामजी’ का चुना जाना क्या भाजपा द्वारा उनके शुद्धीकरण का प्रयास है? उनका पूरा नाम डॉ. भीमराव रामजी सकपाल अांबेडकर था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पूरा नाम नरेंद्र भाई दामोदर भाई मोदी क्यों नहीं लिया जा रहा?’

जदयू नेता ने कहा कि यह सही है कि बाबा साहेब के पिता का नाम रामजी था और महाराष्ट्र की परंपरा के मुताबिक उन्होंने इसे अपने नाम में शामिल किया, लेकिन यह भी सत्य है कि अंबेडकर उनका पारिवारिक नाम नहीं था, यह नाम उन्हें उनके शिक्षक ने दिया था. बाबा साहेब का पारिवारिक नाम सकपाल था.

मूर्ति तोड़ने वाले क्या साबित करना चाहते हैं- 

रजक ने आगे कहा कि अगड़ी जाति का वर्चस्व कायम रखने के इच्छुक लोग शुद्धिकरण के बहुत शौकीन हैं. ऐसा कर वह दलितों का अपमान करते हैं. बाबा साहेब की मूर्ति तोड़ने वाले लोग रामजी लिखकर क्या साबित करना चाहते हैं?

योगी सरकार पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा, ‘आदित्यनाथ सरकार ने यह काम उस समय किया है जब दलित संविधान में सुनिश्चित किए गए अपने अधिकारों की प्राप्ति के लिए संघर्ष कर रहे हैं और उन पर हर तरफ से हमले किए जा रहे हैं. एससी-एसटी एक्ट को कमजोर किया जा रहा है.

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