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जन्मजात श्रेष्ठता का दंभ तोड़ती है देश के सबसे सफल कोचिंग संस्थान के फाउंडर आनंद की कहानी

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो।

देश के सबसे सफलतम कोचिंग संस्थान के रूप में पहचान बना चुका सुपर 30 आज किसी पहचान का मोहताज नहीं. सुपर 30 और उसके संचालक गणितज्ञ आनंद कुमार की कहानी जन्मजात श्रेष्ठता के झूठे दंभ और घमंड को तोड़ने वाली कहानी है. पिछड़े परिवार में जन्मे आनंद कुमार में वो हुनर वो काबिलियत थी जिसने शिक्षा पर जातिवादियों के अधिकार को पूरी ताकत से चुनौती दी है.

आईआईटी में जाने का सपना हर इंजीनियरिंग स्टूडेंट का होता है, लेकिन कई बार गरीबी हुनर के आड़े आ जाती है. ऐसे में बिहार की सुपर 30 कोचिंग ने गरीबों के संस्थान और आनंद कुमार गरीबों के मसीहा के रूप में अपनी पहचान बनाई. इस बार फिर सुपर 30 के सभी 30 बच्चों ने आईआईटी जेईई एंट्रेस क्लीयर करने में बाजी मारी है. जो मुफ्त में गरीब बच्चों के सपनों को पूरा करने में मदद करता है.

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फेसबुक पर आनंद कुमार लिखते हैं-

जब मेहनत इरादों के रथ पर सवार होकर अपने सफर पर चल पड़ती है तो लाख मुसीबतों के बाद भी सफलता कदम चूमने को बेकरार हो जाती है और इस बार के आईआईटी प्रवेश परीक्षा के रिजल्ट में मेरे सभी 30 बच्चों ने सफलता के झंडे गाड़कर यह सिद्ध भी कर दिया है.

गरीबी को करीब से देखा है इसलिए उसका मतलब समझते हैं आनंद- 

आनंद कुमार ने गरीबी को बहुत करीब से देखा है. बचपन मुफलिसी में गुजारा है तो गरीब बच्चों के चेहरे पर खुशी भी देखना चाहते हैं. इसलिए इस बार सुपर 30 में कोई बेरोजगार पिता का बेटा केवलिन, सड़क किनारे अंडे बेचने वाले का बेटा अरबाज आलम, खेतों में मजदूरी करने वाले का बेटा अर्जुन और भूमिहीन किसान का बेटा अभिषेक शामिल हैं.

आनंद सुविधाओं से वंचित परिवारों के तीस बच्चों को अपनी कोचिंग में मुफ्त में आईआईटी की कोचिंग देते हैं. सिर्फ इतना ही नहीं इन बच्चों को अपने घर पर रखते हैं और उनकी मां उनके लिए भोजन बनाती हैं.

यूपी में खुल सकता है सुपर 30- 

सुपर 30 की सफलता पर रियेक्शन देने के साथ उन्होंने अपनी आगे की प्लानिंग बताते हुए लिखा कि जल्द ही वह सुपर 30 का दायरा बढ़ाने जा रहे हैं ताकि 30 से ज्यादा बच्चों को उनकी मंजिल तक पहुंचा सकूं. उनके प्लान में यूपी के भी शामिल होने की संभावना है जिसका जिक्र उन्होंने कुछ समय पहले लखनऊ में किया था.

संस्थान का खर्चा आनंद खुद अपने पैसों से चलाते हैं और इस बारे में वह लिखते हैं कि सुपर 30 को बड़ा करने के लिए पैसे नहीं चाहिए, हां आपके सपने जरूर चाहिए.

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कैंब्रिज यूनिवर्सिटी से आया था बुलावा नहीं गए- 

बिहार के पटना से ताल्लुक रखने वाले आनंद कुमार के पिता डाक विभाग में में क्लर्क थे. घर की माली हालत अच्छी न होने की वजह से उनकी पढ़ाई हिंदी मीडियम सरकारी स्कूल में हुई, यही से उन्होंने खुद से मैथ्स के नए फॉर्मूले इजाद करने शुरू कर दिए थे.

ग्रेजुएशन के दौरान ही उन्होंने नंबर थ्योरी में पेपर सब्मिट किए जो मैथेमेटिकल स्पेक्ट्रम और मैथेमेटिकल गैजेट में पब्लिश हुए. इसके बाद आनंद कुमार को प्रख्यात कैंब्रिज यूनिवर्सिटी से एडमीशन के लिए बुलाया गया लेकिन पिता की मृत्यु और तंग आर्थिक हालत के चलते वो कैंब्रिज नहीं गए.

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दिन में पढ़ाते थे शाम को मां के साथ पापड़ बेचते- 

पिता के जाने के बाद सारी जिम्मेदारी आनंद पर ही थी. इस दौरान उन्होंने रामानुजम स्कूल ऑफ मैथेमैटिक्स नाम का एक क्लब खोला था. यहां वे अपने प्रोफेसर की मदद से मैथ के छात्रों को ट्रेनिंग दिलाते थे जिसके बदले में पैसा नहीं लेते थे. दिन में वह क्लब में पढ़ाते और शाम को अपनी मां के साथ घर चलाने के लिए पापड़ बेचा करते थे.

ऐसे रखी गई सुपर 30 की नींव- 

आनंद ने जब रामानुजम स्कूल ऑफ मैथेमैटिक्स में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराना शुरू किया तो दो बच्चों से वहां आने वले स्टूडेंट्स की संख्या 500 तक हो गई. एक दिन एक लड़के ने आनंद से कहा कि सर हम गरीब हैं हमारे पास फीस ही नहीं है तो देश के अच्छे कॉलेजों में हम कैसे पढ़ सकते हैं. और तब जाकर 2002 में आनंद ने सुपर 30 की नींव रखीं.

15 साल में 396 बच्चे पहुंचे गए आईआईटी- 

इस कोचिंग में हर साल परीक्षा के जरिए 30 बच्चों का चयन किया जाता है . उनके रहने, खाने-पीने के साथ-साथ किताबें भी उपलब्ध कराई जाती हैं वो भी फ्री में. 15 साल में अब तक उनकी संस्था से 396 बच्चे आईआईटी में पहुंच चुके हैं.

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दर्जनों पुरस्कार मिल चुके हैं आनंद को- 

आनंद कुमार को बिहार की नीतीश कुमार सरकार ने अब्दुल कलाम आजाद शिक्षा अवार्ड से भी नवाजा है. डिस्कवरी चैनल ने आनंद कुमार पर एक डाक्यूमेंट्री भी बनाई है. अमेरिकी अखबार न्यूयार्क टाइम्स में भी इनकी बायोग्राफी प्रकाशित हो चुकी है. आनंद कुमार को प्रो. यशवंतराव केलकर पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका हैं.

चलते-चलते फेसबुक पर लिखी आनंद कुमार की लाइनों के साथ आनंद लिखते हैं कि आंसुओं से नज़रें चुराकर हंसने का हुनर देखना है तो सुपर 30 के आंगन में एक बार आइएगा जरूर. 

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