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आधा दर्जन केस वाले सांसद को PM ने बनाया केन्द्रीय मंत्री, लोग बोले ‘साफ छवि’ भी मोदी जी का जुमला है

नई दिल्ली, नेशनल जनमत ब्यूरो। 

लोक सभा चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी ने साफ सुथरी छवि वाले कैंडिडेट्स को टिकट देने की बात कही थी। पार्टी ने कहा था कि वह ऐसे उम्मीदवारों को टिकट नहीं देगी जिनकी पृष्ठभूमि अपराधिक रही हो। समय बीतने के साथ ही बीजेपी सांसदों अापराधिक रिकॉर्ड सामने आ रहे हैं।

ऐसा ही मामला केंद्र सरकार में कौशल विकास राज्य मंत्री बनाए गए अनंत कुमार हेगड़े का है। कर्नाटक की उत्तर कन्नड़ लोक सभा सीट से सांसद अनंतकुमार हेगड़े को नरेंद्र मोदी सरकार में कौशल विकास मंत्री बनाया गया। 48 वर्षीय अनंत इस साल की शुरुआत में दिल्ली जाने पर छह महीने के लिए रोक लगा दी गयी थी।

हेगड़े के मंत्री बनने के बाद सोशल मीडिया पर लोग पूछ रहे हैं कि क्या ईमानदारी और भ्रष्टाचार मुक्ति भी अन्य वादों की तरह ही एक जुमला था ?

हेगड़े अपने गृह जिला सिरसी में दो जनवरी को एक निजी हॉस्पिटल में डॉक्टर पर हमला करने के आरोपी थे। हेगड़े अब भी इस मामले में मुख्य अभियुक्त हैं। पुलिस इस मामले में आरोपपत्र दायर कर चुकी है। स्थानीय अदालत में 21 अक्टूबर को इस मामले की सुनवायी होनी है।

पुलिस के मुताबिक, बीजेपी सांसद हेगड़े ने डॉक्टर मधुकेश्वर, डॉक्टर भालचंद्र भट और डॉक्टर राहुल माशेलकर की दो जनवरी की रात को पिटाई कर दी थी। हेगड़े अपनी माँ का इलाज नहीं करने से नाराज थे।

घटना के बाद अस्पताल ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराने से इनकार कर दिया लेकिन पुलिस ने स्वतःसंज्ञान लेते हुए सीसीटीवी फुटेज के आधार पर 5 जनवरी को मामला दर्ज किया था। घटना की सीसीटीवी फुटेज कई टीवी चैनलों पर प्रसारित हुआ था।

19 जनवरी को स्थानीय अदालत ने हेगड़े को जमानत दी थी और मामला निपटने तक जिला छोड़कर जाने से मना किया था। जुलाई में हेगड़े ने अदालत से संसद के मॉनसून सत्र (17 जुलाई से 11 अगस्त तक) में शामिल होने की इजाजत मांगी। चूंकि पुलिस छह महीने में भी आरोप पत्र दायर करने में विफल रही थी इसलिए अदालत ने हेगड़े को दिल्ली जाने की इजाजत दे दी।

हेगड़े के खिलाफ ये कोई अकेला मामला नहीं है। वो नफरत फैलाने वाले भाषण देने के भी आरोपी हैं। उन पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 295-ए के तहत 28 फरवरी 2016 को सिरसी में इस्लाम के खिलाफ नफरत फैलाने वाला भाषण देने का आरोप है। 19 अक्टूबर को इस मामले में अदालत आरोप तय करेगी। दोनों मामलों को मिलाकर उन पर करीब आधा दर्जन धाराओं में मामले दर्ज हैं।

आापको बता दें हाल ही में चुनाव का विश्लेषण गैर सरकारी संगठन एडीआर ने प्रमुख राजनीतिक दलों के सांसदों और विधायकों का अध्ययन किया था। इस अध्ययन में बीजेपी के सबसे ज्यादा सांसद और विधायक महिलाओं के खिलाफ किए अपराधों में संलिप्त पाए गए।

बीजेपी के 14 सांसद और विधायक यौन उत्पीड़न, महिलाओं को भगाकर ले जाने, जबरदस्ती उनके साथ शादी करने, घर वालों और रिश्तेदारों पर दवाब डालने जैसे अपराधों में शामिल रहे हैं।

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